धार भोजशाला मामला : वसंत पंचमी पर पूजा-नमाज़ को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कल

जानकारी के लिए बता दें कि भोजशाला परिसर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा किए गए सर्वेक्षण में ऐसे साक्ष्य मिले हैं जो यह संकेत देते हैं कि वर्तमान संरचना का निर्माण 11वीं शताब्दी के देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर के कुछ हिस्सों से किया गया था।

धार भोजशाला मामला : वसंत पंचमी पर पूजा-नमाज़ को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कल

भोजशाला को हिन्दू समाज देवी सरस्वती का मंदिर मानता है और मुस्लिम पक्ष कमाल मौला मस्जिद मानता है।

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Highlights

  • वसंत पंचमी शुक्रवार को होने से भोजशाला में पूजा-नमाज़ को लेकर बढ़ा विवाद।
  • जुमे की नमाज़ पर रोक वाली याचिका पर गुरूवार को होगी सुनवाई।
  • इस संवेदनशील मामले को देखते हुए स्थानीय प्रशासन पहले से हुआ अलर्ट।

मध्य प्रदेश के धार में ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर एक बार फिर कानूनी हलचल तेज़ हो गई है। आगामी वसंत पंचमी के अवसर पर हिन्दू पक्ष ने भोजशाला परिसर में जुमे की नमाज़ पर रोक लगाने की मांग की है। इस महत्वपूर्ण याचिका पर सुप्रीम कोर्ट गुरूवार यानि 22 जनवरी को सुनवाई करने जा रहा है। इस मुद्दे पर सभी की नज़रें टिकी हुई हैं। भोजशाला को हिन्दू समाज ज्ञान की देवी सरस्वती या वाग्देवी का मंदिर मानता है। वहीं मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद मानता है।

जानकारी के लिए बता दें कि भोजशाला परिसर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा किए गए सर्वेक्षण में ऐसे साक्ष्य मिले हैं जो यह संकेत देते हैं कि वर्तमान संरचना का निर्माण 11वीं शताब्दी के देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर के कुछ हिस्सों से किया गया था।

ASI के आदेश के मुताबिक, मंगलवार को हिन्दू पक्ष यहां पूजा करता है और मुस्लिम पक्ष शुक्रवार को नमाज़ अदा करता है। इस साल वसंत पंचमी का त्योहार शुक्रवार को पड़ रहा है। हिन्दू पक्ष का तर्क है कि वसंत पंचमी देवी सरस्वती के प्रकटोत्सव का दिन है और उनके लिए बेहद पवित्र है। इस दिन बड़ी मात्रा में श्रद्धालु भोजशाला पहुंचते हैं और मंत्र, भजन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। साथ ही पूरे इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहते हैं।

मुख्य याचिका में मांग की गई है कि वसंत पंचमी के दिन केवल देवी सरस्वती की पूजा की अनुमति दी जाए और नमाज़ को प्रतिबंधित किया जाए, ताकि किसी तरह का टकराव न हो। हिन्दू पक्ष का कहना है कि एक ही दिन पूजा और नमाज़ होने से कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। साथ ही भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। वहीं मुस्लिम पक्ष का तर्क है कि अप्रैल 2003 के ASI आदेश के तहत उन्हें नमाज़ पढ़ने की अनुमति मिली हुई है, इसलिए वे इस परंपरा को जारी रखने पर ज़ोर दे रहे हैं।

अब सुप्रीम कोर्ट को ये तय करना है कि इस विशेष परिस्थिति में पूजा और नमाज़ को लेकर कुछ अस्थाई बदलाव किए जाए या पुरानी व्यवस्था को ही बरकरार रखा जाए। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जिला प्रशासन पहले से ही एक्टिव हो गया है। बीते रविवार एहतियात के तौर पर 1000 से अधिक जवानों ने शहर में फ्लैग मार्च निकाला। इसके साथ ही भोजशाला और आसपास के इलाकों में ड्रोन कैमरों और 900 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के जरिए 24 घंटे निगरानी की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट की ये सुनवाई न केवल इस वर्ष के लिए अहम है, बल्कि भविष्य में ऐसे धार्मिक आयोजनों के दौरान होने वाले विवादों के लिए एक मिसाल भी बन सकती है।

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