लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज, अमित शाह ने विपक्ष पर साधा निशाना

लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर करीब 13 घंटे चर्चा हुई, जिसमें 42 से ज्यादा सांसदों ने भाग लिया। चर्चा के बाद सदन ने वॉयस वोट से प्रस्ताव को खारिज कर दिया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि करीब चार दशक बाद पहली बार किसी लोकसभा स्पीकर के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव लाया गया, जो संसदीय परंपरा के लिहाज से दुर्भाग्यपूर्ण है।

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज, अमित शाह ने विपक्ष पर साधा निशाना

सदन ने इस अविश्वास प्रस्ताव को ध्वनि मत से खारिज कर दिया।

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Highlights

  • लोकसभा स्पीकर के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनि मत से खारिज कर दिया गया।
  • अमित शाह ने कहा स्पीकर पूरे सदन के प्रतिनिधि होते है, उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
  • शाह ने संसद के रिकॉर्ड गिनाते हुए कहा कि हाल के वर्षों में लोकसभा की प्रोडक्टिविटी लगभग 91% रही है।

लोकसभा में स्पीकर के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर हुई चर्चा के बाद यह प्रस्ताव खारिज कर दिया गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बहस का जवाब देते हुए कहा कि लगभग चार दशक बाद पहली बार लोकसभा स्पीकर के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव आया है, जो संसदीय परंपरा के लिहाज से एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। शाह ने कहा कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला किसी एक पार्टी के नहीं बल्कि पूरे सदन के प्रतिनिधि हैं। उनका काम सभी सांसदों के अधिकारों की रक्षा करना और सदन में व्यवस्था बनाए रखना है। ऐसे में स्पीकर की निष्पक्षता और ईमानदारी पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को कमजोर करता है।

इस मुद्दे पर करीब 13 घंटे तक चर्चा हुई, जिसमें 42 से ज्यादा सांसदों ने हिस्सा लिया। बहस के बाद सदन ने वॉयस वोट से इस अविश्वास प्रस्ताव को खारिज कर दिया। शाह ने कहा कि चर्चा के दौरान विपक्ष के कई नेताओं ने स्पीकर के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव की जगह सरकार पर ही ज्यादा निशाना साधा। शाह ने संसद के कुछ रिकॉर्ड और आंकड़े भी पेश किए। उन्होंने बताया कि 16वीं लोकसभा में कुल 331 बैठकें हुई थीं, जबकि 17वीं लोकसभा में 274 बैठकें हुईं। वहीं मौजूदा 18वीं लोकसभा में 2025 तक 103 बैठकें हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि 16वीं, 17वीं और 18वीं लोकसभा की प्रोडक्टिविटी लगभग 91% रही है, जबकि 2025 के बजट सत्र में प्रोडक्टिविटी 118% तक पहुंच गई थी।

गृह मंत्री ने यह भी कहा कि लोकसभा के कामकाज के लिए तय नियम हैं और हर सदस्य को उन्हीं के अनुसार बोलना होता है। यदि कोई सदस्य नियमों का उल्लंघन करता है तो स्पीकर को हस्तक्षेप करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि संसद कोई सार्वजनिक सभा नहीं है, जहां कोई भी अपनी मर्जी से बोल सके। शाह ने दावा किया कि विपक्ष को बोलने के लिए पर्याप्त समय दिया गया है। उनके मुताबिक 17वीं लोकसभा में विपक्ष को 150 घंटे से ज्यादा और 18वीं लोकसभा में अब तक करीब 71 घंटे बोलने का समय मिला है, जो उनकी संख्या के हिसाब से ज्यादा है।

उन्होंने कहा कि कई बार विपक्ष के नेता यह शिकायत करते हैं कि उन्हें बोलने का मौका नहीं मिलता, जबकि रिकॉर्ड बताता है कि उन्हें पर्याप्त समय दिया गया। शाह ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह संसद की कार्यवाही को लेकर गलत जानकारी फैलाकर सदन की छवि खराब करने की कोशिश कर रहा है।

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