टी20 विश्व कप जीत के बाद मंदिर जाने पर विवाद, कीर्ति आजाद के बयान पर गंभीर का जवाब

टी20 विश्व कप 2026 जीतने के बाद कप्तान सूर्यकुमार यादव, कोच गौतम गंभीर और आईसीसी चेयरमैन जय शाह ट्रॉफी लेकर अहमदाबाद के हनुमान टेकरी मंदिर आशीर्वाद लेने पहुंचे। इस पर कीर्ति आजाद ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि ट्रॉफी को मस्जिद, चर्च या गुरुद्वारे भी ले जाना चाहिए था। उनके बयान के बाद विवाद बढ़ गया। गौतम गंभीर ने इसे अनावश्यक बताते हुए कहा कि खिलाड़ियों की नीयत पर सवाल उठाना टीम की उपलब्धि को छोटा करना है।

टी20 विश्व कप जीत के बाद मंदिर जाने पर विवाद, कीर्ति आजाद के बयान पर गंभीर का जवाब

कीर्ति आजाद के बयान पर हेड कोच गौतम गंभीर ने उन्हें जोरदार जवाब दिया है।

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Highlights

  • टी20 विश्व कप जीत के बाद ट्रॉफी को अहमदाबाद के हनुमान टेकरी मंदिर ले जाने पर विवाद शुरू।
  • कीर्ति आजाद ने ट्रॉफी को मंदिर ले जाने पर सवाल उठाए।
  • गौतम गंभीर और हरभजन सिंह ने की आजाद के बयान की कड़ी आलोचना।

टी20 विश्व कप 2026 में भारत की शानदार जीत के बाद अब एक नया विवाद शुरू हो गया है। यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब टी20 फॉर्मेट में भारत के कप्तान सूर्यकुमार यादव, हेड कोच गौतम गंभीर और आईसीसी चेयरमैन जय शाह विश्व कप ट्रॉफी लेकर अहमदाबाद के मोटेरा इलाके में स्थित हनुमान टेकरी मंदिर आशीर्वाद लेने पहुंचे। इस घटना पर पूर्व क्रिकेटर और वर्तमान राजनीतिज्ञ व सांसद कीर्ति आजाद ने प्रतिक्रिया दी, जिसके बाद अब गौतम गंभीर ने उन्हें करारा जवाब दिया है। दरअसल, आजाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भारतीय टीम के कुछ सदस्यों के मंदिर जाने पर सवाल उठाए थे।

उन्होंने X पर एक पोस्ट के माध्यम से कहा था कि यह ट्रॉफी पूरे देश की है और इसमें हर धर्म के लोगों का योगदान है। आजाद ने सवाल किया कि ट्रॉफी को सिर्फ मंदिर ही क्यों ले जाया गया? उन्होंने इसे मस्जिद, चर्च या गुरुद्वारे ले जाने की बात भी कही। उन्होंने यहां तक लिख दिया कि उन्हें टीम इंडिया की इस हरकत पर "शर्म" आती है। उनके मुताबिक खेल को धर्म से जोड़ना गलत है और यह टीम पूरे भारत का प्रतिनिधित्व करती है, किसी एक धर्म का नहीं।

इस पूरे विवाद पर हमेशा बेबाक अंदाज में अपनी बात कहने वाले गौतम गंभीर ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। इस आलोचना का जवाब देते हुए गंभीर ने कहा कि इतनी ऐतिहासिक जीत के बाद टीम के एक्शन्स पर सवाल उठाना अनावश्यक है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के इरादों पर सवाल उठाने से राष्ट्रीय टीम की उपलब्धियों पर असर पड़ता है। गंभीर के मुताबिक, पब्लिक में ऐसी बातें कहना असल में "अपनी ही टीम को नीचा दिखाना है," खासकर तब जब खिलाड़ियों ने देश के लिए अभी-अभी एक बड़ा ग्लोबल टाइटल जीता हो।

भारत के पूर्व ओपनर ने जोर देकर कहा कि बड़ी जीत के बाद जश्न का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए या इसे विवाद में नहीं बदलना चाहिए। सिर्फ गौतम गंभीर ही नहीं, पूर्व भारतीय क्रिकेटर और दिग्गज ऑफ-स्पिनर हरभजन सिंह ने भी कीर्ति आजाद की आलोचना की। उन्होंने कहा कि, "ये बहुत बेतुकी सी बात है कि कोई इस बात को लेकर भी राजनीति कर रहा है कि वे मंदिर क्यों गए? यदि उन्होंने भगवान से कुछ मांगा है और उनकी मन्नत पूरी होती है तो यह उनकी मर्जी है। वे जहां जाना चाहते हैं, जाएं। इस पर राजनीति करना ठीक नहीं है।"

जानकारी के लिए बता दें कि कीर्ति आजाद वर्तमान में तृणमूल कांग्रेस पार्टी में हैं और बर्धमान-दुर्गापुर लोकसभा सीट से सांसद हैं। तृणमूल कांग्रेस से पहले वे भाजपा और कांग्रेस में भी रह चुके हैं। 1999 से 2004 और 2009 से 2019 तक वे दरभंगा से भाजपा के सांसद रहे हैं। इससे पहले वे 1993 से 1998 तक दिल्ली की गोल मार्केट सीट से विधायक भी रहे हैं। 1983 विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य से इस तरह की प्रतिक्रिया सामने आना बेहद शर्मनाक है। भारतीय टीम की इतनी बड़ी उपलब्धि के बाद भी वे राजनीति को ज्यादा महत्व देते हुए दिखाई दिए, जो ठीक बात नहीं है।

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