पूर्वी नागालैंड को ऐतिहासिक स्वायत्तता : FNTA समझौते से विकास और अधिकारों की नई शुरुआत

इस समझौते का उद्देश्य इन पिछड़े इलाकों में रहने वाली 8 प्रमुख जनजातियों को उनका हक दिलाना और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।

पूर्वी नागालैंड को ऐतिहासिक स्वायत्तता : FNTA समझौते से विकास और अधिकारों की नई शुरुआत

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री नेफिउ रियो और उप-मुख्यमंत्री यांथुंगो पैटन की मौजूदगी में ये समझौता हुआ।

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Highlights

  • पूर्वी नागालैंड के लिए FNTA नाम की नई स्वायत्त प्रशासनिक व्यवस्था बनाई जाएगी।
  • अब अलग राज्य की मांग की जगह विकास और अधिकारों पर सहमति बनी है।
  • केंद्र सरकार पूर्वी नागालैंड के विकास में सहायता करेगी।

नागालैंड के लिए 5 फरवरी 2026 का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। नई दिल्ली में भारत सरकार, नागालैंड सरकार और पूर्वी नागालैंड के लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाली ईस्टर्न नागालैंड पीपल्स ऑर्गनाइजेशन (ENPO) के बीच एक बड़ा और ऐतिहासिक समझौता हुआ है। यह समझौता पिछले कई दशकों से चली आ रही अलग राज्य की मांग और विकास के मुद्दों को सुलझाने की दिशा में एक बहुत बड़ी सफलता माना जा रहा है। इस समझौते की सबसे खास बात यह है कि अब नागालैंड के भीतर ही एक नई प्रशासनिक व्यवस्था बनाई जाएगी, जिसे फ्रंटियर नागालैंड टेरिटोरियल ऑथोरिटी (FNTA) नाम दिया गया है। यह ऑथोरिटी पूर्वी नागालैंड के 6 जिलों, तुएनसांग (Tuensang), मोन (Mon), किफिरे (Kiphire), नोकलाक (Noklak) और शमाटोर (Shamator) के प्रशासन की जिम्मेदारी संभालेगी।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफिउ रियो (Neiphiu Rio) और उप-मुख्यमंत्री यांथुंगो पैटन (Yanthungo Patton) की मौजूदगी में हुए इस समझौते का उद्देश्य इन पिछड़े इलाकों में रहने वाली 8 प्रमुख जनजातियों को उनका हक दिलाना और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। दरअसल पश्चिमी या मध्य नागालैंड की तुलना में पूर्वी नागालैंड विकास के मामले में कहीं पिछड़ गया था और वहां बुनियादी सुविधाओं की भी कमी थी। इसलिए वहां के लोग अलग राज्य की मांग कर रहे थे। लेकिन अब बातचीत के जरिए स्वायत्त निकाय (Autonomous Body) पर सहमति बनी है। इस नई व्यवस्था के तहत, इस क्षेत्र को करीब 46 अलग-अलग विषयों पर फैसले लेने का अधिकार दिया गया है। इसका मतलब है कि वहां के लोग अपने इलाकों की जरूरतों के हिसाब से खुद ही नीतियां बना सकेंगे। भारत सरकार स्वयं पूर्वी नागालैंड के विकास में सहायता भी करेगी और इसकी जिम्मेदारी भी उठाएगी। इसके अलावा गृह मंत्रालय भी स्थापना के शुरूआती खर्चों का वहन करेगा।

इस समझौते पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने X पर लिखा, "यह वास्तव में एक ऐतिहासिक समझौता है, जो विशेष रूप से पूर्वी नागालैंड के विकास पथ को गति प्रदान करेगा। मुझे पूरा विश्वास है कि इससे लोगों के लिए अवसरों और समृद्धि के नए द्वार खुलेंगे। यह पूर्वोत्तर में शांति, प्रगति और समावेशी विकास के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।" गृह मंत्री शाह ने इसे विवादमुक्त उत्तर-पूर्व के सपने को पूरा करने वाला कदम बताया है। मुख्यमंत्री रियो ने भी X पर लिखा, "मुझे पूरी उम्मीद और विश्वास है कि यह समझौता आपसी विश्वास को दर्शाता है, पूर्वी नागालैंड और पूरे राज्य की आकांक्षाओं को पूरा करता है और विकास को हर घर तक पहुंचाने का प्रयास करता है। मैं पूर्वी नागालैंड के अपने भाइयों और बहनों को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हार्दिक बधाई देता हूं। मैं सभी की प्रगति और विकास की हमारी सामूहिक आकांक्षा के लिए पूर्ण सहयोग का आश्वासन देता हूं। हम भारत सरकार के आभारी हैं और आशा करते हैं कि केंद्र सरकार सर्वांगीण विकास की दिशा में हमारा मार्गदर्शन करती रहेगी।"

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