परीक्षा पे चर्चा 2026 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों को दिया सफलता का महामंत्र

यह कार्यक्रम दिल्ली स्थित 7, लोक कल्याण मार्ग में आयोजित हुआ, जहां प्रधानमंत्री मोदी ने बेहद सरल और आत्मीय अंदाज में परीक्षा, तनाव और जीवन से जुड़े विषयों पर छात्रों से बातचीत की।

परीक्षा पे चर्चा 2026 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों को दिया सफलता का महामंत्र

प्रधानमंत्री मोदी ने परीक्षा पे चर्चा के माध्यम से देशभर के छात्रों से जीवंत संवाद किया।

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Highlights

  • प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों से कहा, दूसरों की सलाह सुनें, लेकिन अपने पढ़ाई के पैटर्न पर भरोसा रखें।
  • लक्ष्य ऐसा होना चाहिए जो पहुँच में हो, पर इतना आसान नहीं कि मेहनत ही न लगे।
  • अंकों से ज्यादा जरूरी है जीवन में क्या सीखा और एक जिम्मेदार नागरिक कैसे बने।

आज सुबह देश के लाखों छात्रों, शिक्षकों और पेरेंट्स की नजरें टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर टिकी थीं, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “परीक्षा पे चर्चा 2026” (PPC 2026) के 9वें संस्करण के माध्यम से देशभर के छात्रों से जीवंत संवाद किया। यह कार्यक्रम दिल्ली स्थित 7, लोक कल्याण मार्ग में आयोजित हुआ, जहां प्रधानमंत्री मोदी ने बेहद सरल और आत्मीय अंदाज में परीक्षा, तनाव और जीवन से जुड़े विषयों पर छात्रों से बातचीत की। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने उनसे अलग-अलग सवाल पूछे, जिनका प्रधानमंत्री ने अपने विशिष्ट लहजे में जवाब दिया।

कार्यक्रम के दौरान छात्रा सान्वी आचार्य ने सवाल किया कि पेरेंट्स भी हमारी चिंता करते हैं और टीचर्स भी हमें सपोर्ट करते हैं, लेकिन समस्या तब आती है जब टीचर्स पढ़ने के लिए एक पैटर्न सुझाते हैं, पेरेंट्स किसी दूसरे तरीके से पढ़ने की सलाह देते हैं और स्टूडेंट्स के बीच कोई अलग ट्रेंड चल रहा होता है। ऐसे में यह समझना मुश्किल हो जाता है कि किस पैटर्न को फॉलो करें।

इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आपके माता-पिता, शिक्षक या दोस्त चाहे कुछ भी कहें, अपने पैटर्न पर विश्वास रखें और उसे फॉलो करें, साथ ही आपको मिलने वाले सभी सुझावों को ध्यान में रखें।” उन्होंने यह भी कहा कि, “हमारा लक्ष्य हमेशा पहुँच के भीतर होना चाहिए, लेकिन आसानी से प्राप्त होने वाला नहीं। पहले मन को जोड़ो, फिर मन को समझो और उसके बाद पढ़ाई के विषय रखो।”

इसके बाद छात्र आयुष तिवारी ने सवाल किया कि कई बार हम स्कूल या टीचर की स्पीड से मैच नहीं कर पाते। जो टॉपिक छूट जाता है, उसे कवर करने के चक्कर में आगे के चैप्टर्स भी मिस होते चले जाते हैं। ऐसी स्थिति में पढ़ाई को कैसे मैनेज किया जाए? इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि टीचर का प्रयास यह होना चाहिए कि वह स्टूडेंट की स्पीड से केवल एक कदम आगे रहे। उन्होंने कहा कि लक्ष्य ऐसा होना चाहिए जो पहुँच में हो, लेकिन पकड़ में न हो। यदि टारगेट बहुत दूर रख दिया जाए, तो स्टूडेंट को लगेगा कि यह उसके बस का काम नहीं है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे किसान खेत को जोतता है, वैसे ही स्टूडेंट के मन को भी तैयार करना चाहिए। स्कूल टीचर्स को सुझाव देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पढ़ाए जाने वाले टॉपिक्स का शेड्यूल पहले से छात्रों को बता दिया जाए और उनसे कहा जाए कि वे पहले से तैयारी करके आएँ। इससे बच्चों की जिज्ञासा बढ़ती है और विषय की समझ भी बेहतर होती है।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी को लेकर भी अहम बातें रखीं। उन्होंने कहा कि शिक्षा को बोझ नहीं समझना चाहिए, बल्कि इसमें पूरी भागीदारी जरूरी है। टुकड़ों-टुकड़ों में शिक्षा ग्रहण करने से सफलता सुनिश्चित नहीं होती। अंकों पर केंद्रित रहने के बजाय छात्रों को इस पर ध्यान देना चाहिए कि उन्होंने जीवन में क्या सीखा और क्या हासिल किया है।

प्रधानमंत्री ने नागरिक कर्तव्यों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को एक जिम्मेदार नागरिक बनना चाहिए। यदि देश को विकसित भारत बनाना है, तो स्वच्छता सुनिश्चित करनी होगी और इसके प्रति जागरूकता बढ़ानी होगी। उन्होंने टेक्नोलॉजी को एक वरदान बताते हुए कहा कि इसे अपनाना समय की आवश्यकता है। साथ ही छात्रों से आग्रह किया कि वे अपनी बुद्धि और व्यक्तित्व को निखारने के लिए एआई का समझदारी से उपयोग करें।

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