समानता के नाम पर असमानता? UGC नियमों पर बढ़ा विवाद

नए नियमों के खिलाफ कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन भड़क उठे। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि इससे कॉलेज या विश्वविद्यालय परिसरों में उल्टा भेदभाव या अराजकता फैल सकती है।

समानता के नाम पर असमानता? UGC नियमों पर बढ़ा विवाद

नए नियमों का बचाव करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि इनका गलत उपयोग नहीं होने दिया जाएगा।

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Highlights

  • UGC के नए नियमों का उद्देश्य जाति आधारित भेदभाव को दूर करना है।
  • विरोध करने वालों का कहना है कि इसमें सामान्य वर्ग के साथ भेदभाव का जिक्र नहीं है।
  • नियमों के गलत उपयोग को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।

यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने जनवरी 2026 में उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026 के नाम से नए नियम नोटिफाई किए हैं। UGC के मुताबिक, इन नियमों का उद्देश्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव को रोकना और समान और सुरक्षित शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करना है। इन नियमों के तहत सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में इक्वल ऑपोर्चुनिटी सेंटर और इक्विटी कमेटी स्थापित करना अनिवार्य किया गया है। नियमों में विशेष तौर पर SC,ST और OBC वर्ग के छात्रों के साथ होने वाले जाति आधारित भेदभाव पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। UGC का कहना है कि इससे वंचित वर्गों को न्याय और सुरक्षा मिलेगी।

हालांकि नियमों को लाते ही इन पर विवाद भी शुरू हो गया है। विरोध करने वालों का कहना है कि नियमों में जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा को लेकर असंतुलन है। उनका कहना है कि इन नियमों में मुख्य रूप से SC, ST और OBC छात्रों से होने वाले भेदभाव को ही परिभाषित किया गया है। जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव का कोई ज़िक्र नहीं है। लोगों का यह भी कहना है कि ये कानून अंग्रेज़ों के ज़माने की सोच को फिर से वापस ले आया है, जहां कुछ वर्गों को पहले से ही पीड़ित और एक वर्ग के विद्यार्थियों को पहले ही दोषी मान लिया जाएगा। सिर्फ जाति के ही आधार पर किसी को सही या गलत मान लेना, समानता के सिद्धांतों का उल्लंघन है।

नए नियमों के खिलाफ कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन भड़क उठे। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि इनसे कॉलेज या विश्वविद्यालय परिसरों में उल्टा भेदभाव या अराजकता फैल सकती है। इनके कुछ पहलुओं की समीक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दायर की गई है। कुछ अफसरों और नेताओं ने तो अपने-अपने पदों से इस्तीफा तक दे दिया है। उन्होंने इन नियमों को काला कानून बताया और कहा कि इन नियमों से सद्भाव की जगह अशांति फैल सकती है। इतने विरोध और हंगामे के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भरोसा तो दिलाया है कि इनका गलत उपयोग नहीं होने दिया जाएगा। हालांकि भविष्य को देखते हुए इस मुद्दे पर एक निष्पक्ष और स्थाई समाधान की ज़रूरत है, वरना जिस तरह SC-ST एक्ट के गलत उपयोग की खबरें सामने आती हैं, उसी तरह इन नियमों के भी गलत उपयोग हो सकते हैं। इससे कॉलेज और विश्वविद्यालय परिसरों में संघर्ष ही बढ़ेगा।

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