जिष्णु देव वर्मा ने मंगलवार 10 मार्च को महाराष्ट्र के नए राज्यपाल के रूप में शपथ ले ली है। मुंबई के लोक भवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में उन्होंने अपना पदभार संभाला। इस खास मौके पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार समेत कई बड़े नेता मौजूद थे। जिष्णु देव वर्मा का ताल्लुक त्रिपुरा के राजघराने से है। उनका जन्म 15 अगस्त 1957 को अगरतला में हुआ था। उनके पिता रामेंद्र किशोर देव वर्मा त्रिपुरा के शासक महाराजा वीर विक्रम माणिक्य के सैन्य सचिव और गृह सचिव थे।
जिष्णु देव वर्मा श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान 1990 के दशक की शुरुआत में भाजपा में शामिल हुए थे। 1993 में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव भी बनाया गया था। महाराष्ट्र आने से पहले वे तेलंगाना के राज्यपाल के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे थे। त्रिपुरा की राजनीति में भी उनका बड़ा कद रहा है। वे चारिलाम विधानसभा सीट से विधायक रहे हैं और साल 2018 से 2023 के बीच उन्होंने त्रिपुरा के उपमुख्यमंत्री के रूप में काम किया था। उस दौरान उन्होंने वित्त, बिजली और ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों को संभाला। महाराष्ट्र में राज्यपाल का पद तब चर्चा में आया जब पूर्व राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन देश के उपराष्ट्रपति चुन लिए गए।
उनके जाने के बाद गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को महाराष्ट्र का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया था। अब जिष्णु देव वर्मा की नियुक्ति के साथ महाराष्ट्र को एक पूर्णकालिक राज्यपाल मिल गया है। जिष्णु देव वर्मा सिर्फ एक राजनेता ही नहीं, बल्कि एक लेखक भी हैं। उन्हें साहित्य और कला से गहरा लगाव है। साथ ही वे खेलों में भी काफी रुचि रखते हैं और बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उनकी यह बहुमुखी प्रतिभा उन्हें अन्य राजनेताओं से थोड़ा अलग बनाती है। अब महाराष्ट्र के संवैधानिक प्रमुख के तौर पर उनके सामने राज्य की प्रगति और शासन व्यवस्था को सुचारू रूप से देखने की जिम्मेदारी होगी।