UGC नियमों पर कोर्ट की रोक के बाद JNU और DU कैंपसों में हुआ बवाल

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार विवाद का कारण विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियम और उन पर सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला है।

UGC नियमों पर कोर्ट की रोक के बाद JNU और DU कैंपसों में हुआ बवाल

JNU कैंपस में साबरमती हॉस्टल के बाहर हुई नारेबाज़ी।

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Highlights

  • सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियमों पर फिलहाल रोक लगा दी है।
  • इस रोक के विरोध में JNU कैंपस में विरोध प्रदर्शन हुए।
  • इन नियमों के कारण कॉलेज कैंपसों में वैचारिक बहस तेज़ हो सकती है।

दिल्ली का जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार विवाद का कारण विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियम और उन पर सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के विरोध में छात्रों ने कल JNU कैंपस में साबरमती हॉस्टल के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन और नारेबाज़ी की।

दरअसल, UGC ने कुछ समय पहले ही इक्विटी रेगुलेशंस 2026 पेश किए थे। इन नियमों का उद्देश्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति और लिंग आधारित भेदभाव को रोकना था। लेकिन इन नियमों को लेकर दो तरह की राय सामने आई। एक पक्ष का कहना था कि इससे पिछड़े वर्ग के छात्रों को सुरक्षा मिलेगी, वहीं सामान्य वर्ग के लोगों का कहना था कि इन नियमों का गलत इस्तेमाल हो सकता है। उनका मानना है कि इससे कॉलेज और विश्वविद्यालय कैंपसों में विभाजन बढ़ सकता है।

कल, 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर फिलहाल रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि नियमों की परिभाषा स्पष्ट नहीं है और इनका दुरुपयोग हो सकता है। इसके अलावा, यह सवाल भी उठाया गया कि जब “भेदभाव” की परिभाषा में सभी प्रकार के भेदभावपूर्ण व्यवहार शामिल हैं, तो फिर “जाति-आधारित भेदभाव” को अलग से क्यों परिभाषित किया गया है। साथ ही कोर्ट ने यह भी पूछा कि कहीं इन नियमों से समानता के अधिकार का उल्लंघन तो नहीं हो रहा है।

कोर्ट के इस फैसले के बाद JNU में माहौल गरमा गया। नाराज़ होकर JNU के वामपंथी संगठनों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पुतले जलाए गए और “ब्राह्मणवाद मुर्दाबाद, रोहित के हत्यारों को एक धक्का और दो, मनुवाद जलेगा” जैसे नारे लगाए गए। छात्रों ने इन नए नियमों को लागू करने की मांग की। कुछ ऐसा ही नज़ारा दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में भी देखने को मिला। DU के वामपंथी समर्थित ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने बढ़ते भेदभाव का आरोप लगाते हुए इन नियमों को लागू करने की मांग को लेकर मार्च निकाला। इन नियमों को लेकर बहस अब अदालतों और सड़कों से आगे बढ़कर विश्वविद्यालय कैंपसों तक पहुँच चुकी है।

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