लोक सभा स्पीकर ओम बिरला ने विपक्ष के 8 सांसदों का निलंबन किया रद्द

निलंबित होने वाले सांसदों में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया-मार्क्सवादी के एस. वेंकटेशन, कांग्रेस के डीन कुरियाकोस, सी. किरण कुमार रेड्डी, हिबी ईडन, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, गुरजीत सिंह औजला, माणिकम टैगोर और प्रशांत पडोळे शामिल थे। निलंबन रद्द किए जाने के बाद इन सांसदों ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

लोक सभा स्पीकर ओम बिरला ने विपक्ष के 8 सांसदों का निलंबन किया रद्द

निलबंन वापस लेते समय सांसदों से सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की गई।

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Highlights

  • लोक सभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन के 8 विपक्षी सांसदों का निलंबन वापस ले लिया है।
  • ध्वनि मत के माध्यम से इन सांसदों का निलंबन रद्द किया गया।
  • स्पीकर द्वारा सभी सांसदों को ये हिदायत दी गई कि सदन में प्लेकार्ड्स-बैनर न लेकर आएं।

लोक सभा की कार्रवाई से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। 17 मार्च को विपक्षी सांसदों और सरकार के बीच चल रही तनातनी में थोड़ी नरमी देखने को मिली। लोक सभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन के 8 विपक्षी सांसदों का निलंबन वापस ले लिया है। इन सांसदों को बजट सत्र के दौरान हंगामा करने और अनुचित व्यवहार करने के कारण निलंबित कर दिया गया था। निलंबन रद्द करने का यह फैसला केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा रखे गए एक प्रस्ताव के बाद लिया गया। इससे पूर्व कांग्रेस के चीफ व्हिप के. सुरेश द्वारा पार्टी के सांसदों की गलती पर खेद भी व्यक्त किया गया। इस प्रस्ताव का समर्थन समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SP) की सुप्रिया सुळे ने किया। 

निलंबन वापस लेते समय स्पीकर ने सांसदों को सख्त हिदायतें दीं। उन्होंने सांसदों से कहा कि सदन के भीतर प्लेकार्ड्स और बैनर न लाएं। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि सांसद सदन में एआई जनरेटेड तस्वीरें न लेकर लाएं और सदन की गरिमा बनाकर रखें। निलंबित होने वाले सांसदों में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया-मार्क्सवादी (CPI-M) के एस. वेंकटेशन, कांग्रेस के डीन कुरियाकोस, सी. किरण कुमार रेड्डी, हिबी ईडन, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, गुरजीत सिंह औजला, माणिकम टैगोर और प्रशांत पडोळे शामिल थे। निलंबन रद्द किए जाने के बाद इन सांसदों ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। निलंबन रद्द किए जाने के बाद सभी दलों के अलग-अलग नेताओं की विभिन्न प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं।

मेरठ लोक सभा सीट से सांसद अरूण गोविल ने कहा, "सदन की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए। सदन की मर्यादा का पालन करना अनिवार्य है। बस दो-तीन बातें ध्यान में रखनी हैं। अगर विपक्षी सांसद ऐसा कर सकें तो यह बहुत अच्छी बात होगी। मुझे उम्मीद है कि विपक्ष इसे समझेगा और सदन की मर्यादा का सम्मान करेगा।" गोरखपुर से सांसद रवि किशन ने इस मुद्दे पर कहा कि, "यह देश की सबसे बड़ी पंचायत है, इतना बड़ा मंदिर है, इसे प्रेम से संचालित होना चाहिए। यह विचारों की लड़ाई है और इस पर बहस होनी चाहिए। जनता हमें यहां अपनी समस्याओं पर चर्चा करने के लिए भेजती है और यहां कोई व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं होनी चाहिए।" 

वहीं तिरूवनंतपुरम कांग्रेस सांसद डॉ. शशि थरूर ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि, "यह बहुत अच्छी बात है कि हमारे 8 साथियों का हर रोज निलंबित होकर सदन की सीढ़ियों पर बैठे रहने और भाग न ले पाने का दुखद दृश्य अब समाप्त हो गया है। उनके निर्णय या व्यवहार में जो भी गलतियां हुई हों, जिनके कारण उन्हें सदन से बाहर रखा गया है, वह हमारे लोकतंत्र को ठेस पहुंचाती है। मेरा मानना ​​है कि दोनों पक्षों की ओर से अच्छे व्यवहार का आश्वासन दिया गया है और मुझे उम्मीद है कि इसे बरकरार रखा जाएगा।"

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