मध्य प्रदेश के ये चार महानगर दुनियाभर में बढ़ा रहे राज्य का गौरव

मध्य प्रदेश के चार प्रमुख महानगर—इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर—राज्य की आर्थिक, शैक्षिक और चिकित्सा प्रगति के केंद्र हैं। इंदौर कारोबार, भोपाल शिक्षा-चिकित्सा, ग्वालियर ऐतिहासिक-आधुनिक संगम और जबलपुर न्याय-रक्षा उद्योग में अग्रणी हैं। आधुनिक हाइवे, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और निवेश इनकी प्रगति को बढ़ा रहे हैं।

मध्य प्रदेश के ये चार महानगर दुनियाभर में बढ़ा रहे राज्य का गौरव

वक़्त के साथ बदल रहे मध्यप्रदेश के चार महानगर तेजी से बढ़ा रहे विकास की ओर कदम

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Highlights

  • मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर ने स्वच्छता और व्यापारिक क्षेत्र में बनाई अपनी पहचान।
  • शिक्षा, ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत ने बढ़ाया जबलपुर का गौरव।
  • भोपाल से लेकर ग्वालियर तक मौजूद है कई चिकित्सक और शैक्षिणक संस्थान।

भोपाल :  मध्य प्रदेश, जिसे भारत का "हृदय" भी कहा जाता है, भौगोलिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक दृष्टि से देश का अहम राज्य है। इस राज्य के चार प्रमुख महानगर – इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर – न सिर्फ राज्य की पहचान हैं बल्कि विकास, कारोबार, शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में मध्य प्रदेश की नई तस्वीर गढ़ रहे हैं। इन शहरों में बढ़ते निवेश, नए हाइवे नेटवर्क, उन्नत चिकित्सा सुविधाएँ और तेजी से फैलता शिक्षा तंत्र इन्हें देश के विकसित होते शहरी क्षेत्रों की सूची में लाकर खड़ा कर रहे हैं।

1. इंदौर- कारोबार और स्वच्छता की राजधानी :

एक के बाद एक नई उपलब्धियाँ हासिल कर चुका है, अहिल्या नगरी इंदौर, टियर-2 शहरों में अपनी अलग पहचान बना रहा है। लगातार 8वीं बार भारत के सबसे स्वच्छ शहर का खिताब जीतने के बाद, मध्य प्रदेश का यह आर्थिक और औद्योगिक क्षेत्र हाल ही में एक महानगरीय शहर बन गया है। यह सरकार की स्मार्ट सिटी मिशन का भी हिस्सा है। शहर में नए औद्योगिक केंद्र और लॉजिस्टिक पार्क विकसित हो रहे हैं।​ वहीं कारोबार और उद्योग में इंदौर देशभर के कपड़ा, खाद्यान्न और ऑटोमोबाइल व्यापार का प्रमुख केंद्र भी माना जाता है। यहां का संजय गांधी ग्रेन मार्केट और छप्पन दुकान जैसे कारोबारी क्षेत्र देशभर में प्रसिद्ध हैं।

मेट्रो रेल परियोजना वर्तमान में लगभग 5.9 किलोमीटर के अपने प्रारंभिक चरण में चालू है, और इसका संपूर्ण विस्तार 31.3 किलोमीटर तक होगा। 

इंदौर के आईटी सेक्टर में भी तेजी से विकास और वृद्धि देखने के लिए मिला है। TCS एवं इन्फोसिस जैसी कंपनियों ने यहां अपने बड़े कैंपस स्थापित किए जा चुके है। इतना ही नहीं वर्ष 2023-24 के आर्थिक आंकड़ों के मुताबिक इंदौर का JDP 14 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक आंका गया है। 

डेवलपमेंट और हाइवे कनेक्टिविटी : 

सुपर कॉरिडोर, रिंग रोड और कई अन्य क्लस्टर पहले से ही चालू हैं।  इतना ही नहीं, शहर रियल एस्टेट के क्षेत्र में "स्वर्णिम काल" का अनुभव कर रहा है, जहाँ सालाना 10-12% की वृद्धि हो रही है। 2024-25 में, मध्य प्रदेश ने अपना अब तक का सबसे अधिक निर्यात हासिल किया, जिसमें इंदौर का योगदान लगभग 13,500 करोड़ रुपये रहा। वहीं यहां का देवी अहिल्या एयरपोर्ट देश के टॉप 20 व्यस्ततम हवाई अड्डों में शुमार है। रिपोर्ट्स का कहना है कि इंदौर-उज्जैन, इंदौर-भोपाल और इंदौर-दिल्ली एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट्स ने शहर की कनेक्टिविटी को और मजबूत किया है। इस शहर में एशिया का सबसे बड़ा बायो-सीएनजी प्लांट बनाया गया है, जो प्रतिदिन लगभग 550 टन गीले कचरे का प्रसंस्करण करता है। इसे 2025 में रामसर कन्वेंशन द्वारा एक प्रतिष्ठित आर्द्रभूमि शहर घोषित किया गया था।

चिकित्सा सुविधा : 

इंदौर का एम.जी.एम. मेडिकल कॉलेज, अरविंदो हॉस्पिटल और बॉम्बे हॉस्पिटल पूरे मध्य भारत में प्रसिद्ध हैं। यहां की चिकित्सा सुविधाएँ न केवल मध्य प्रदेश बल्कि राजस्थान, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से आए हुए मरीजों को भी बेहतर इलाज और सुविधा प्रदान करती है।

शिक्षा :

इंदौर को शिक्षा का हब भी माना जाता है। इतना ही नहीं इंदौर में यहां का देवी अहिल्या विश्वविद्यालय देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों में गिना जाता है। मध्य भारत के शिक्षा केंद्र के रूप में उभरता यह शहर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) और भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) दोनों का घर है।

2. भोपाल - राजधानी और शिक्षा-चिकित्सा का केंद्र :

भोपाल, जो मध्य प्रदेश की राजधानी है, अपनी परंपरा और विरासत से आगे बढ़ते हुए, यह शहर अब एक स्मार्ट, तकनीक-संचालित, अच्छी तरह से जुड़ा हुआ महानगर है जो शिक्षा, अनुसंधान, उद्यमिता के साथ-साथ पर्यटन पर भी ध्यान केंद्रित करता है। "झीलों के शहर" को सर्वश्रेष्ठ शासन और प्रशासनिक प्रथाओं में भी तीसरा स्थान मिला है। 

भोपाल मेट्रो परियोजना के सभी कॉरिडोर 2028 में पूरे हो जाएंगे

यह भारत का 14वाँ सबसे बड़ा और तीसरा सबसे हरा-भरा शहर है, जिसे सबसे स्वच्छ राजधानी का पुरस्कार मिला है,भोपाल में ऑटोमोबाइल, औषधि, इलेक्ट्रॉनिक्स और सर्विस सेक्टर हर दिन विकसित हो रहे है। जबकि एशिया के सबसे कम प्रदूषित शहरों में 27वाँ स्थान प्राप्त किया है। भोपाल विद्युत मशीनरी और परिवहन उद्योग में निवेश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा आकर्षित करता है। भेल (दुनिया की सबसे बड़ी विनिर्माण और इंजीनियरिंग कंपनी) के अलावा, आयशर, एलएंडटी, प्रॉक्टर एंड गैंबल जैसी कई अन्य प्रतिष्ठित संस्थाओं का मुख्यालय भोपाल औद्योगिक उपनगर में है।  

डेवलपमेंट और हाइवे : 

भोपाल-इंदौर एक्सप्रेसवे और भोपाल-नागपुर हाइवे ने इस शहर को औद्योगिक दृष्टि से मजबूत किया है। राजाभोज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा देश के कई प्रमुख शहरों से कनेक्टिविटी प्रदान करता है। मेट्रो रेल प्रोजेक्ट (भोपाल मेट्रो) शहर के विकास की नई पहचान बनेगा। चिकित्सा सुविधाभोपाल में एम्स भोपाल, हमीदिया अस्पताल एवं चिरायु मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े संस्थान हैं। यहां की चिकित्सा सुविधाएँ देशभर के मरीजों को आकर्षित करती हैं। इतना ही नहीं कोविड महामारी के दौरान भोपाल ने पूरे राज्य के लिए मेडिकल सपोर्ट सिस्टम तैयार किया।

शिक्षा :

शिक्षा के बारें में बात की जाए तो भोपाल शिक्षा के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। यहां का मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MANIT), भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER) और राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय इसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाते हैं। यहां के कई निजी और सरकारी स्कूल पूरे मध्य भारत में शिक्षा की गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध हैं।

3. ग्वालियर - ऐतिहासिक धरोहर और आधुनिक विकास का संगम :

ग्वालियर को उसकी ऐतिहासिक धरोहर और सांस्कृतिक महत्व के लिए जाना जाता है, लेकिन आज यह तेजी से आधुनिक विकास और शिक्षा-चिकित्सा का केंद्र बन रहा है। कारोबार और उद्योग में ग्वालियर का टेक्सटाइल और हैंडलूम बिज़नेस प्रसिद्ध है। यहां फार्मास्यूटिकल्स, खाद्य प्रसंस्करण और सीमेंट उद्योग भी लगातार बढ़ रहे हैं। 2024 के आंकड़ों के अनुसार ग्वालियर का औद्योगिक कारोबार 5 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है। 2023 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19,260 करोड़ रुपये की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र भी विकास के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। 

​ ग्वालियर में आज भी सबसे पुराना संगीत घराना मौजूद है।  

डेवलपमेंट और हाइवे :

ग्वालियर दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-भोपाल हाइवे से जुड़ा है, जिससे इसकी कनेक्टिविटी बेहद मजबूत है।  ग्वालियर हवाई अड्डा (राजमाता विजयाराजे सिंधिया एयरपोर्ट) शहर को देश के प्रमुख शहरों से जोड़ता है। ग्वालियर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट ने शहर की तस्वीर बदल दी है।

 

चिकित्सा सुविधा :

ग्वालियर का गजराराजा मेडिकल कॉलेज मध्य भारत के पुराने और प्रतिष्ठित संस्थानों में गिना जाता है। साथ ही जेएएच और कई सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल मरीजों को आधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध करा रहे हैं।

शिक्षा : 

ग्वालियर शिक्षा का भी अहम केंद्र है। यहां का आईआईटीटीएम (भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन संस्थान), जीवालियर चंबल विश्वविद्यालय और एलएन मेडिकल कॉलेज शिक्षा के क्षेत्र में शहर की पहचान बना रहे हैं। ग्वालियर के स्कूल और कॉलेज भी मध्य भारत के छात्रों के मध्य लोकप्रिय हैं।

4. जबलपुर - न्याय, सैन्य और शिक्षा का गढ़ :

जबलपुर को मध्य प्रदेश का न्यायिक और सैन्य केंद्र कहा जाता है। यह शहर औद्योगिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक दृष्टि से लगातार प्रगति कर रहा है। कारोबार और उद्योग के मामले में जबलपुर रक्षा से जुड़े उद्योग और ऑटोमोबाइल निर्माण इकाइयाँ प्रमुख हैं। गन कैरिज फैक्ट्री और व्हीकल फैक्ट्री जैसी इकाइयाँ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम हैं। वर्ष 2024 की रिपोर्ट के अनुसार जबलपुर का कुल औद्योगिक कारोबार 6 अरब अमेरिकी डॉलर के आसपास था। 

 

संस्कारधानी जबलपुर अब मध्य प्रदेश के सबसे लंबे फ्लाईओवर का घर बन गया है 

डेवलपमेंट और हाइवे : 

जबलपुर ज़िले में 2,000 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत वाली प्रमुख बुनियादी ढाँचा और विकास परियोजनाओं के साथ एक बड़े बदलाव के दौर से गुज़र रहा है, जिससे कनेक्टिविटी, जन सुविधाओं और आर्थिक अवसरों को बढ़ावा मिलेगा। यह अब सिर्फ़ अपने खूबसूरत झरनों और प्राकृतिक सौंदर्य में फैला, इतिहास और संस्कृति में गहराई से समाया हुआ एक स्थान नहीं रह गया है, बल्कि यह विकसित भी हो रहा है। जबलपुर का हवाई अड्डा (डुमना एयरपोर्ट) तेजी से विस्तार कर रहा है। यहां से नागपुर, भोपाल, दिल्ली और मुंबई के लिए सीधी उड़ानें उपलब्ध हैं। जबलपुर-कटनी, जबलपुर-रीवा और जबलपुर-भोपाल हाइवे ने शहर को औद्योगिक दृष्टि से और भी मजबूत किया है। 

चिकित्सा सुविधा : 

जबलपुर का नेता जी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज प्रदेश का एक प्रमुख मेडिकल संस्थान है। यहां कैंसर, कार्डियक और न्यूरोलॉजी से जुड़ी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

शिक्षा :

जबलपुर का रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय शिक्षा का बड़ा केंद्र है। साथ ही इंजीनियरिंग, लॉ और मेडिकल कॉलेज शहर को छात्रों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाते हैं। जबलपुर हाई कोर्ट की उपस्थिति के कारण यह शहर न्यायिक शिक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है।

इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर – ये चारों महानगर मध्य प्रदेश की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक धड़कन हैं। इंदौर जहां कारोबार और उद्योग में सबसे आगे है, भोपाल शिक्षा और चिकित्सा का केंद्र है, ग्वालियर अपनी ऐतिहासिक पहचान के साथ आधुनिक विकास का संगम है, और जबलपुर न्याय और रक्षा उद्योग का गढ़ है।

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 के दौरान, मध्य प्रदेश को 26.61 ट्रिलियन रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। इन शहरों में आने वाली नई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के साथ-साथ, सरकार निवासियों की सहायता के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन परियोजनाएँ और लाडली बहना योजना जैसी कई अन्य विकास योजनाओं को भी आगे बढ़ा रही है। एमएसएमई पर ध्यान केंद्रित करने से रोजगार सृजन होगा, जो अंततः लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाएगा और भविष्य को आकार देगा। यहाँ का कारोबारी माहौल, बेहतर निवेश के अवसर और सुनियोजित विकास निवेशकों और नौकरी चाहने वाले युवाओं, दोनों के लिए नए द्वार खोल रहा है। और, अगर राज्य इसी दर से विकास करता है, तो इन शहरों की एसजीडीपी में लगभग 20.01% हिस्सेदारी हो सकती है।

 

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