चीन-जापान दौरे पर पीएम मोदी, बड़ी डोनाल्ड ट्रंप की चिंता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान और चीन यात्रा वैश्विक व्यापारिक तनाव के बीच भारत की आर्थिक और रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने का प्रयास है। जापान के साथ 100+ समझौतों और 68 अरब डॉलर निवेश की संभावना है, जबकि चीन के साथ SCO सम्मेलन में संबंध सुधार पर फोकस है।

चीन-जापान दौरे पर पीएम मोदी, बड़ी डोनाल्ड ट्रंप की चिंता

प्रधानमंत्री मोदी जापान और चीन की यात्रा पर, पूरी दुनिया की निगाहें दौरे पर टिकीं

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Highlights

  • जापान और चीन की यात्रा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।
  • जापान में 100 से अधिक समझौते पत्रों पर हस्ताक्षर की संभावना।
  • चीन में पीएम मोदी की सात साल बाद यात्रा, एससीओ सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।

टोक्यो: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एशिया के दी बड़ी आर्थिक ताकतों चीन एवं जापान की यात्रा पर बने हुए है। भारतीय उत्पादों पर अमेरिका के 50 प्रतिशत टैरिफ और संबंधों में तनाव के मध्य पूरी दुनिया की निगाहें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस यात्रा पर हैं। इतना ही नहीं अब अनुमान लगाया जा रहा है कि इस दौरे के दौरान 100 से अधिक समझौता पत्रों (MoUs) पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। 

बातचीत का फोकस क्रिटिकल मिनरल्स और हाई वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग में जापानी निवेश पर होगा। भारत में रेयर अर्थ का बड़ा भंडार मौजूद है, लेकिन इसके दोहन के लिए तकनीक की कमी है। ऐसे में जापान भारत को तकनीकी सहयोग देने पर सहमत हो सकता है।

  • जापानी कंपनियां अगले दशक में भारत में 68 अरब डॉलर का निवेश करने का मन बना रही है।
  • वहीं, सुजुकी मोटर ने अगले छह वर्षों में भारत में 8 अरब डॉलर के निवेश की योजना बनाई है।
  • पिछले पांच वर्षों में लगभग 25,000 भारतीय विशेषज्ञ जापान की वर्कफोर्स से जुड़े हैं।
  • स्पष्ट है कि इस दौरे से भारत की मेक इन इंडिया पहल को नई गति मिलने की संभावना है।

चीन दौरा: रिश्तों में सुधार की कवायद :

  • यात्रा के दूसरे चरण में पीएम मोदी चीन पहुंचेंगे और शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) के सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
  • यह दौरा खास है क्योंकि पीएम मोदी सात वर्षों बाद चीन जा रहे हैं।
  • 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद से दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं।

खबरों का कहना है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीतियों से उत्पन्न अनिश्चितता के दौरान इंडिया एवं चीन अपने संबंधों को नए सिरे से सुधारने के प्रयास करने में लगे हुए है। कुछ रिपोर्ट्स में  तो ये भी कहा गया है कि, पीएम नरेंद्र  मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात से दोनों देशों के मध्य आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग बढ़ाने की राह खुल सकती है। चीन ने हाल ही में अमेरिकी टैरिफ को लेकर भारत के पक्ष में बयान भी दे डाला है जिससे संकेत मिलता है कि दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाएं मतभेदों के बावजूद व्यापारिक साझेदारी पर आगे बढ़ने को तैयार हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है यह यात्रा? :

  • अमेरिका के 50% टैरिफ के चलते भारत पर व्यापारिक दबाव बढ़ता जा रहा है।
  • जापान  एवं चीन से मजबूत सहयोग भारत को इस दबाव से उबरने में मदद करेगा।
  • यह यात्रा भारत को एशियाई भू-राजनीति में और मजबूत भूमिका दिलाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

दरअसल प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा सिर्फ द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने की कोशिश नहीं है, बल्कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की आर्थिक और रणनीतिक स्थिति को मजबूती देने की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम है।

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