भारत और यूरोपियन संघ (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की बातचीत अब निर्णायक दौर में पहुंच चुकी है। स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि EU भारत के साथ एक बड़े और ऐतिहासिक समझौते को फाइनल करने के करीब है। उन्होंने इस प्रस्तावित समझौते को "मदर ऑफ ऑल डील्स" भी बताया है। उनके मुताबिक, ये समझौता सिर्फ दो देशों या संस्थाओं के बीच नहीं होगा, बल्कि इससे 2 अरब लोगों का साझा बाज़ार तैयार होगा। ये संयुक्त बाज़ार दुनिया की कुल अर्थव्यवस्था या वैश्विक GDP का 25% होगा, जो इसे बेहद अहम बनाता है।
भारतीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल पहले ही कह चुके हैं कि ये समझौता भारत के अब तक के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण व्यापार समझौतों में से एक हो सकता है। इससे भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति और अधिक मज़बूत हो सकती है। इस संभावित डील की अहमियत का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस साल यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। ये दोनों शीर्ष नेता 25 जनवरी से भारत की तीन दिन की राजकीय यात्रा पर आएंगे।
इस दौरे के दौरान, वे 27 जनवरी को 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करेंगे। कोस्टा और वॉन डेर लेयेन भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलेंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सीमित और प्रतिनिधिमंडल-स्तर की बातचीत भी करेंगे। हालांकि अब तक इस FTA पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर नहीं हुए हैं और कुछ मुद्दों पर बातचीत जारी है। अगर ये समझौता लागू होता है तो भारत को कई फायदें मिल सकते हैं। भारतीय इंजीनियरिंग, कपड़ा, चमड़ा, फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को EU के 27 देशों के बाज़ारों में बेहतर पहुंच मिल सकती है। इसके अलावा भारत में यूरोपियन निवेश बढ़ने की उम्मीद है, जिससे रोज़गार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। इस पर अंतिम मुहर लगना बाकी है, लेकिन दोनों पक्ष इसे जल्द से जल्द पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।