कड़ी सुरक्षा के बीच धार की भोजशाला में मनाई जा रही बसंत पंचमी

मुख्य स्थान के चारों ओर RAF, CRPF और महिला पुलिस यूनिट्स समेत 5,000 से ज़्यादा सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है।

कड़ी सुरक्षा के बीच धार की भोजशाला में मनाई जा रही बसंत पंचमी

भोजशाला को केसरिया झंडों और फूलों से सजाया गया है।

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Highlights

  • सुप्रीम कोर्ट द्वारा बसंत पंचमी पर पूजा नमाज दोनों की अनुमति दी गई।
  • इस स्थल को फूलों से सजाया गया है और श्रद्धालु सुबह से ही दर्शन के लिए आने लगे है।
  • मुख्य स्थान के चारों ओर 5,000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों की तैनाती।

मध्य प्रदेश के धार जिले के ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में आज वसंत पंचमी का पर्व कड़ी सुरक्षा के बीच मनाया जा रहा है। इस साल वसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ने से स्थिति संवेदनशील हो गई थी, क्योंकि शुक्रवार को मुस्लिम समाज द्वारा यहां पर नमाज़ अदा की जाती है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद पूजा और नमाज़ दोनों के लिए समय साफ तौर पर तय किया किया गया था। कोर्ट के आदेश के अनुसार, हिन्दू पक्ष को यहां सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा-अर्चना की अनुमति दी गई है, वहीं मुस्लिम पक्ष यहां दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज़ अदा कर सकता है।

इस ऐतिहासिक स्थल को केसरिया झंडों और फूलों से सजाया गया है और श्रद्धालु सूर्योदय से ही दर्शन के लिए आने लगे थे। भक्तों ने वसंतोत्सव समिति के सदस्यों के साथ मिलकर देवी सरस्वती, जिन्हें माँ वाग्देवी के नाम से भी जाना जाता है, की मूर्ति स्थापित की, आरती की और हवन कुंड में आहुतियां दीं, जिसके साथ पूजा की शुरुआत हुई। प्रशासन ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम किए हैं। धार जिले में बड़ी संख्या में सुरक्षाबल तैनात किया गया है। मुख्य स्थान के चारों ओर रैपिड एक्शन फोर्स (RAF), सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फोर्स (CRPF) और महिला पुलिस यूनिट्स समेत 5,000 से ज़्यादा सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। कोई अप्रिय घटना न घटे, इसके लिए ड्रोन कैमरों से नज़र भी रखी जा रही है।

भोजशाला को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। हिन्दू समाज इसे माँ सरस्वती के मंदिर के रूप में देखता है, वहीं मुस्लिम समाज इसे कमाल मौला मस्जिद मानता है। भोजशाला परिसर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा सर्वेक्षण किया गया था। इसमें ऐसे साक्ष्य मिले थे जो यह संकेत देते हैं कि वर्तमान संरचना का निर्माण 11वीं शताब्दी के देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर के कुछ हिस्सों से किया गया था। वर्षों से चली आ रही व्यवस्था के तहत हिन्दू यहां मंगलवार को पूजा करते हैं और मुस्लिम शुक्रवार को नमाज़ अदा करते हैं। इस बार वसंत पंचमी और जुमे की नमाज़ एक ही दिन होने से स्थिति संवेदनशील हो गई थी, जिसे कानूनी और प्रशासकीय व्यवस्था के तहत संतुलित रखने की कोशिश की गई है।

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