पीएम मोदी इस समय जापान और चीन की यात्रा पर है ,दरअसल वह टोक्यो में हो रहे भारत-जापान शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए गए थे. इस बीच वह भारत से जुड़े एक बौद्ध मंदिर पहुंचे जहां के पुजारी ने उन्हें एक विशेष गुड़िया उपहार में दी है, जिसे जापान में 'दारुमा डॉल' बोला जाता है. इस दारुम डॉल का भारत से बहुत पुराना नाता है. ऐसे में जानते हैं कैसे जापान के एक विशेष प्रतीक चिह्न का भारत से पुराना कनेक्शन है. दरअसल दुनिया भर की अलग-अलग संस्कृतियों में ऐसी कई प्रतीकात्मक वस्तुएँ मिलती हैं, जिन्हें लोग शुभ, सौभाग्यशाली या धार्मिक दृष्टि से मानते हैं। जापान की संस्कृति में ऐसी ही एक प्रसिद्ध वस्तु है – दारुमा डॉल (Daruma Doll)। यह डॉल देखने में साधारण गुड़िया जैसी नहीं होती, बल्कि इसका चेहरा कठोर, गोलाकार और आँखों में बिना पुतलियों के खालीपन लिए होता है। पहली नज़र में बहुत से लोग इसे डरावनी या भूतिया समझ लेते हैं, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। दारुमा डॉल जापानियों के लिए भाग्य, मनोकामना पूर्ति और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है।
दारुमा डॉल का इतिहास और उत्पत्ति :
दारुमा डॉल का संबंध बौद्ध धर्म के महान गुरु बोधिधर्म (Bodhidharma) से माना जाता है। बोधिधर्म मूल रूप से भारत से थे और उन्होंने ध्यान (Zen Meditation) की परंपरा को चीन और फिर जापान तक पहुँचाया। कहा जाता है कि उन्होंने कई वर्षों तक गुफा में ध्यान लगाया और उसी के आधार पर जापान में उनके प्रतीक स्वरूप दारुमा डॉल बनाई जाने लगी।
गुड़िया का गोलाकार होना इस बात का प्रतीक है कि इंसान चाहे कितनी भी बार गिरे, उसे दोबारा उठ खड़ा होना चाहिए। जापान में इससे जुड़ी कहावत है –"Nanakorobi yaoki" यानी “सात बार गिरो, आठवीं बार उठो।”
दारुमा डॉल की बनावट और विशेषताएँ
इच्छाओं की पूर्ति का प्रतीक :
दारुमा डॉल को "लकी चार्म" या "गुड लक डॉल" भी कहा जाता है। इसकी सबसे खास परंपरा है कि जब कोई व्यक्ति मनोकामना करता है, तो वह डॉल की एक आँख में काला गोला (पुतली) भरता है। जब उसकी मनोकामना पूरी हो जाती है, तब दूसरी आँख में पुतली बनाई जाती है।
इस तरह यह डॉल इंसान को अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखने की प्रेरणा देती है।
रंगों का महत्व :
समय के साथ दारुमा डॉल विभिन्न रंगों में बनने लगी, और हर रंग का अलग प्रतीकात्मक अर्थ है:
क्या दारुमा डॉल भूतिया है? :
अब बड़ा सवाल – क्या दारुमा डॉल सच में भूतिया है? असल में इसका जवाब है – नहीं। दारुमा डॉल को जापान में हमेशा शुभ माना गया है। यह दृढ़ संकल्प, धैर्य और सफलता की निशानी है। लेकिन इसके खाली आँखों और गंभीर चेहरे को देखकर कई लोग इसे डरावनी समझ लेते हैं। साथ ही इंटरनेट और कुछ हॉरर कहानियों ने भी इसे "भूतिया गुड़िया" के रूप में प्रस्तुत किया, जिससे लोगों के मन में भ्रम पैदा हुआ। यानी दारुमा डॉल का भूतों से कोई संबंध नहीं है। यह पूरी तरह से एक सकारात्मक प्रतीक है, जिसे लोग अपने घर, ऑफिस या दुकान में रखते हैं ताकि उनका काम सफल हो और मनोकामनाएँ पूरी हों।
दारुमा डॉल जापानी संस्कृति का एक अनोखा हिस्सा है। यह केवल एक गुड़िया नहीं, बल्कि संघर्ष, धैर्य और जीत का प्रतीक है। इसकी खाली आँखें, गोल आकार और खास परंपरा इसे अलग पहचान देती हैं। जो लोग इसे देखकर डरते हैं या भूतिया मानते हैं, वह केवल इसके रूप और अफवाहों के कारण भ्रम में रहते हैं। असलियत में दारुमा डॉल इंसान को यह संदेश देती है – “कितनी भी बार गिरो, हमेशा उठ खड़े हो।”