भारत ने कल अपना 77वां गणतंत्र दिवस बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया। इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को बधाई दी और एक मज़बूत व विकसित भारत बनाने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “X” के माध्यम से कहा, “सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की बहुत-बहुत बधाई। भारत की आन-बान और शान का प्रतीक यह राष्ट्रीय महापर्व आप सभी के जीवन में नई ऊर्जा और नए उत्साह का संचार करे। विकसित भारत का संकल्प और अधिक सुदृढ़ हो, यही कामना है।” उन्होंने यह भी लिखा, “गणतंत्र दिवस हमारी स्वतंत्रता, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का सशक्त प्रतीक है। यह पर्व हमें एकजुट होकर राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ आगे बढ़ने की नई ऊर्जा और प्रेरणा देता है।”
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने एक सुभाषित श्लोक भी साझा किया था, जिसकी पंक्तियाँ इस प्रकार थी :
पारतन्त्र्याभिभूतस्य देशस्याभ्युदयः कुतः।
अतः स्वातन्त्र्यमाप्तव्यमैक्यं स्वातन्त्र्यसाधनम्॥
जिसका अर्थ यह बताया गया था कि, “जो देश पराधीन है, उसका विकास संभव नहीं है। अतः स्वतंत्रता और एकता को साधन बनाकर ही राष्ट्र की प्रगति सुनिश्चित की जा सकती है।” इस दिन ने यह याद दिलाया कि भारत का गणतंत्र सभी की एकजुटता और परिश्रम से ही फलता-फूलता है।
गणतंत्र दिवस के मुख्य समारोह से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचे थे। वहाँ उन्होंने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उन्हें नमन किया। इसके बाद वे कर्तव्य पथ पहुंचे, जहाँ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तिरंगा फहराया। तिरंगे को 21 तोपों की सलामी दी गई और ध्वज फॉर्मेशन में 129 हेलिकॉप्टर यूनिट के 4 Mi-17 1V हेलिकॉप्टरों ने राष्ट्रीय ध्वज को सलामी देते हुए फूलों की पंखुड़ियों की वर्षा की।
इस अवसर पर ISRO के अंतरिक्षयात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था। इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा रहे। परेड में भारतीय सेना के अर्जुन और टी-90 भीष्म टैंक जैसे हथियारों द्वारा सलामी दी गई। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान टी-90 भीष्म टैंक का उपयोग ऊँचाई वाले क्षेत्रों में किया गया था। भारतीय सेना की पहली मध्यम-लिफ्ट अटैक हेलीकॉप्टर यूनिट Apache AH-64E द्वारा गरुड़ फॉर्मेशन बनाया गया था। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्तेमाल किए गए इंटीग्रेटेड ऑपरेशनल सेंटर की झांकी भी निकाली गई, जिसने इस अभियान के संचालन को संक्षेप में दर्शाया।
‘परंपरा में दृढ़, आत्मनिर्भरता और नवाचार की ओर अग्रसर’ थीम पर आधारित भारतीय नौसेना की झांकी परेड का हिस्सा रही, जिसमें आईएनएस विक्रांत को प्रदर्शित किया गया था। पंजाब की झांकी नौवें सिक्ख गुरु श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की शहादत के 350वें वर्ष को समर्पित रही, जिन्हें धार्मिक स्वतंत्रता और न्याय की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान के लिए ‘हिंद दी चादर’ के रूप में स्मरण किया गया जाता है। नागालैंड की झांकी में हॉर्नबिल महोत्सव को प्रदर्शित किया गया था, वहीं छत्तीसगढ़ की झांकी ने देश के पहले आदिवासी डिजिटल संग्रहालय की झलक पेश की। केरल की झांकी में देश की पहली वॉटर मेट्रो और 100 प्रतिशत डिजिटल साक्षरता की उपलब्धि को प्रदर्शित किया गया। इस साल मध्य प्रदेश की झांकी मातोश्री अहिल्याबाई होलकर पर आधारित थी, जो आत्मनिर्भरता, योग्य शासन और सांस्कृतिक संरक्षण का प्रतीक थी। इनके अलावा अन्य राज्यों की झांकियों ने भी इस समारोह को भव्य बना दिया।