हाल ही में पश्चिम एशिया में बिगड़ते हालातों के बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियां (Dr. Masoud Pezeshkian) से बात की। इस बातचीत का उद्देश्य इलाके में बिगड़ते हालात और उससे होने वाले जान-माल के नुकसान पर चर्चा करना था। प्रधानमंत्री मोदी ने चिंता जताई कि जिस तरह से संघर्ष बढ़ रहा है, उससे न केवल निर्दोष लोगों की जान जा रही है, बल्कि वहां के इंफ्रास्ट्रक्चर को भी नुकसान पहुंच रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया के जरिए इस बातचीत की जानकारी दी।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, "मैंने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियां से बातचीत की, जिसमें क्षेत्र की गंभीर स्थिति पर चर्चा हुई। मैंने तनाव बढ़ने, नागरिकों की जान जाने और सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की। भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और सामान एवं बिना रुकावट ऊर्जा के परिवहन की आवश्यकता भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है। मैंने शांति और स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया और संवाद एवं कूटनीति का आग्रह किया।"
इस चर्चा में भारत की कुछ अपनी प्राथमिकताएं शामिल थीं। मोदी जी ने ईरानी राष्ट्रपति के सामने साफ किया कि इस संकट के समय में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा भारत सरकार के लिए सबसे ऊपर है। ईरान और उसके आसपास के इलाकों में हजारों भारतीय काम करते हैं या पढ़ाई कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने उनकी सुरक्षा को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इसके अलावा, उन्होंने 'एनर्जी सिक्योरिटी' यानी ईंधन और व्यापार की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। दोनों नेताओं ने आने वाले समय में एक-दूसरे के संपर्क में रहने और स्थिति पर नजर बनाए रखने पर सहमति जताई है।