जबलपुर की यूनिवर्सिटी में पंचगव्य कैंसर रिसर्च के नाम हुआ करोड़ों का घोटाला

जबलपुर के नानाजी देशमुख वेटरनरी साइंस यूनिवर्सिटी में कैंसर रिसर्च के नाम पर एक घोटाला सामने आया है। सरकार ने पंचगव्य से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज पर रिसर्च में 3.5 करोड़ रूपए की राशि मंज़ूर की थी, मगर ये पैसा अधिकारियों की फिज़ूलखर्ची की ही भेंट चढ़ गया।

जबलपुर की यूनिवर्सिटी में पंचगव्य कैंसर रिसर्च के नाम हुआ करोड़ों का घोटाला

नानाजी देशमुख वेटरनरी साइंस यूनिवर्सिटी में कैंसर रिसर्च के नाम पर एक बड़ा घोटाला सामने आया है।

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Highlights

  • गोमूत्र, गोबर, कच्चा माल और कुछ मशीनें खरीदने में 1.9 करोड़ रूपए खर्च कर दिए गए।
  • बाजार में मशीनों और कच्चे माल की कीमत 15 से 20 लाख रूपए के आसपास ही है।
  • फंड की राशि से 7.5 लाख रूपए की एक कार भी खरीदी गई और इतना ही पैसा इसके रख-रखाव में भी खर्च हुआ।

मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख वेटरनरी साइंस यूनिवर्सिटी में कैंसर रिसर्च के नाम पर एक बड़ा घोटाला सामने आया है। सरकार ने गोबर, गोमूत्र आदि से बने पंचगव्य से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज पर रिसर्च में 3.5 करोड़ रूपए की राशि मंज़ूर की थी, मगर ये पैसा अधिकारियों की फिज़ूलखर्ची की ही भेंट चढ़ गया।

जानकारी के मुताबिक, सबसे ज़्यादा धांधली खरीददारी में हुई। गोमूत्र, गोबर, कच्चा माल और कुछ मशीनें खरीदने में 1.9 करोड़ रूपए खर्च कर दिए गए। जबकि बाज़ार में इन मशीनों और कच्चे माल के कीमत 15 से 20 लाख रूपए के आसपास ही है। मतलब इतना बड़ा हेरफेर सीधे तौर पर दिखाई दे रहा है।

जांच में यह भी सामने आया कि रिसर्च के नाम पर अधिकारियों ने जमकर यात्राएं भी की थी। टीम ने बेंगलुरू और गोवा जैसे कई शहरों में 23 से 24 हवाई यात्राएं की, जिसकी उपयोगिता पर अब सवाल उठ रहे है। सिर्फ इतना ही नहीं, प्रोजेक्ट फंड की राशि से 7.5 लाख रूपए की एक नई कार भी खरीदी गई। लगभग इतना ही पैसा कार के पेट्रोल और रख-रखाव आदि में भी खर्च हुआ था। साथ ही करीब 15 लाख रूपए टेबल और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं पर खर्च किए गए थे, जिनका रिसर्च से कोई सीधा लेना-देना ही नहीं था।

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब संभाग आयुक्त के आदेश पर जिला प्रशासन द्वारा जांच बिठाई गई। एडिशनल कलेक्टर की अगुवाई वाली टीम ने अपनी रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी है। हालांकि यूनिवर्सिटी ने किसी भी तरह के गलत काम से इंकार किया है। उनका कहना है कि हर खरीद और पेमेंट सरकारी नियमों और टेंडर प्रक्रियाओं के अनुसार हुआ है। अब एडिशनल कलेक्टर की रिपोर्ट कलेक्टर द्वारा संभाग आयुक्त को भेजी जाएगी, जिसके बाद उम्मीद है कि प्रशासन रिपोर्ट के नतीजों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा।

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