जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में एक बार फिर आधी रात को जबरदस्त हिंसा और हंगामा देखने को मिला। 22 फरवरी की देर रात और 23 फरवरी की सुबह कैंपस में दो छात्र गुटों, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (JNUSU) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के बीच जमकर झड़प हुई, जिसमें कई छात्र घायल हो गए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा। ये पूरा मामला तब शुरू हुआ जब JNUSU ने "समता जुलूस" नामक एक मार्च निकाला था। छात्र संघ की मांग थी कि JNU की वाइस-चान्सलर (VC) डॉ. शांतिश्री धुलिपुडी पंडित अपने पद से इस्तीफा दे। छात्रों का आरोप है कि VC ने हाल ही में दलितों और UGC नियमों के खिलाफ टिप्पणियां की थी।
जैसे ही ये मार्च साबरमती टी पॉइंट से ईस्ट गेट की तरफ बढ़ने लगा, वहां माहौल तनावपूर्ण हो गया और देखते ही देखते पत्थरबाजी शुरू हो गई। वामपंथी छात्र संगठनों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे, तभी ABVP के कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि निहत्थे छात्रों पर पत्थर भी फेंके गए थे। दूसरी ओर ABVP ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि कुछ लोग नकाब पहनकर आए थे और उन्होंने शांति से पढ़ रहे बच्चों को मार्च में जबरदस्ती शामिल होने के लिए धमकाया।
इन हमलों के बारे में ABVP के सदस्य प्रतीक भारद्वाज ने बताया, "मुझे याद नहीं कि मैं किस मंजिल पर था। खुद को बचाने के लिए मैं इधर-उधर भागा, लेकिन सिर्फ एक ही टॉयलेट खुला था। मैं उस टॉयलेट में घुस गया और खुद को अंदर से बंद कर लिया। लगभग आधे घंटे बाद, कम से कम 150 लोगों का एक ग्रुप आया। उन्होंने देखा कि दरवाजा बंद है और उसे तोड़ने लगे। उन्होंने दरवाजे में एक छेद कर दिया और फायर एक्सटिंग्विशर से टॉयलेट को धुएं से भर दिया। एक छात्र प्रतीक भारद्वाज पर स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज परिसर के अंदर वामपंथी संगठन के छात्रों ने हमला किया। पहले उनकी आंखों में फायर एक्सटिंग्विशर पाउडर डाला गया और फिर बेरहमी से पीटा गया। इस जानलेवा हमले के दौरान एक सिलेंडर खोलकर उसका इस्तेमाल भी किया गया।
हमले के बाद प्रतीक को काफी चोटें आई हैं। उसे अस्पताल ले जाया गया है जहां उसकी हालत गंभीर है। फिलहाल JNU प्रशासन ने सोमवार तड़के हुई इस हिंसा का संज्ञान लिया है और कहा है कि अच्छे शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने के लिए वह सख्त कार्रवाई करेगा।