नीला ड्रम मर्डर केस : सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को मौत की सजा

वकील कृष्ण कुमार ने बताया कि इस अपराध के लिए दोनों को मौत की सजा सुनाई गई है। उन्हें धारा 302 के तहत 50 हजार रुपये और धारा 238A के तहत 20 हजार रुपये का जुर्माना भरने का आदेश भी दिया गया है। यह एक ऐतिहासिक फैसला है। पूरा देश इसे देख रहा था। जनता की नजरें इस बात पर टिकी थीं कि इस अपराध को अंजाम देने वालों को क्या सजा मिलेगी।

नीला ड्रम मर्डर केस : सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को मौत की सजा

अदालत ने इस हत्या के मामले में 22 गवाहों के बयान दर्ज किए थे।

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Highlights

  • यह सजा एक साल से ज्यादा चली कार्यवाही और 120 से ज्यादा सुनवाइयों के बाद सुनाई गई।
  • दोनों आरोपी जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए और सुनवाई के दौरान मौन रहे।
  • इस फैसले पर संतोष जताते हुए सौरभ की माता रेणु देवी ने कहा की हमें न्याय मिल गया है।

उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक बड़ी खबर सामने आई है। एक स्थानीय अदालत ने चर्चित 'ब्लू ड्रम मर्डर केस' में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को पूर्व मर्चेंट नेवी ऑफिसर सौरभ राजपूत की हत्या का दोषी मानते हुए मौत की सजा सुनाई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह सजा एक साल से ज्यादा चली कार्यवाही और 120 से ज्यादा सुनवाइयों के बाद सुनाई गई। दोनों जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए और सुनवाई के दौरान चुप रहे। अदालत ने 22 गवाहों के बयान दर्ज किए, जिनमें ड्रम, चाकू और दवाइयाँ बेचने वाले लोग भी शामिल थे। वकील कृष्ण कुमार ने बताया कि इस अपराध के लिए दोनों को मौत की सजा सुनाई गई है।

उन्हें धारा 302 के तहत 50 हजार रुपये और धारा 238A के तहत 20 हजार रुपये का जुर्माना भरने का आदेश भी दिया गया है। यह एक ऐतिहासिक फैसला है। पूरा देश इसे देख रहा था। जनता की नजरें इस बात पर टिकी थीं कि इस अपराध को अंजाम देने वालों को क्या सजा मिलेगी। वे सदमे में लग रहे थे। बचाव पक्ष ने तर्क दिए थे, जैसे कि हत्या को किसी ने नहीं देखा और दोनों आरोपियों की बेटियाँ हैं, लेकिन इन सभी तर्कों को खारिज कर दिया गया, क्योंकि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए सबूत इतने मजबूत, महत्वपूर्ण और सटीक थे कि उन्होंने उनके अपराध को पूरी तरह साबित कर दिया।

मुख्य आधार हत्या का तरीका था। उसने अपने पति, जिससे उसने प्यार करके शादी की थी, की हत्या की और फिर शव को ठिकाने लगाने के लिए उसके शरीर को तीन हिस्सों में काट दिया और अवशेषों को एक नीले ड्रम में छिपा दिया। यह बहुत सोच-समझकर बनाई गई साजिश और रणनीति थी। उसने शांत और स्थिर दिमाग से हत्या को अंजाम दिया। नतीजतन, ऐसी पहले से सोची-समझी हत्या के लिए मौत की सजा ही उचित सजा थी। देश के अदालती फैसलों में यह एक महत्वपूर्ण फैसला है। किसी महिला को मौत की सजा सुनाया जाना अपने आप में एक मिसाल कायम करने वाली घटना है।

वहीं, वकील विजय बहादुर ने कहा कि यह अपने आप में एक बड़ा फैसला है और समाज को एक कड़ा संदेश देता है। सौरभ की मां रेणु देवी ने इस निर्णय पर राहत जताते हुए कहा, "हमें बहुत अच्छा लग रहा है। हमें इस बात का गहरा संतोष है कि उन दोनों को मौत की सजा सुनाई गई है। हमें वह न्याय मिला, जिसकी हमें तलाश थी। हम अपने वकीलों, सहयोगियों और स्टाफ के बहुत आभारी हैं। हम हमेशा उनका धन्यवाद करेंगे और उनके ऋणी रहेंगे। जेल में बंद बेटी से हमारा कोई लेना-देना नहीं है। रही बात बड़ी बेटी की, तो अगर उसके नाना-नानी उसे बिना किसी शर्त के हमें सौंप देते हैं, तो हम उसे अपने साथ रखेंगे।"

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