मुंबई देश की आर्थिक राजधानी तो है ही, साथ ही ये एक ऐसा शहर है जिसने अब तक न जाने कितनी ही महान हस्तियों के सपनों को भी पूरा किया है। मुंबई न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे भारत के लिए बेहद अहम है। यहां हज़ारों लोग अपने रोज़मर्रा के जीवन, काम और व्यापार के सिलसिले में यात्रा करते हैं। इसे "दौड़ती हुई मुंबई" भी कहा जाता है क्योंकि यहां जीवन कभी रूकता नहीं है। ऐसे में इस शहर का विकास और मूलभूत सुविधाएं हमेशा ही चर्चा के विषय होते हैं। हालांकि पिछले कुछ समय में मुंबई ने विकास कार्यों की तेज़ रफ्तार भी देखी है और कई योजनाओं में देरी भी।
2014 से 2019 तक महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार थी। इस दौरान मुंबई मेट्रो, कोस्टल रोड और ट्रांस हार्बर लिंक जैसी बड़ी योजनाओं पर काम शुरू हुआ या उन्हें आगे बढ़ाया गया। हालांकि 2019 के विधानसभा चुनावों के बाद परिस्थिति में परिवर्तन देखने को मिला जब किसी भी एक राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। आगे चलकर शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस ने गठबंधन किया और महा विकास आघाड़ी (MVA) सरकार सत्ता में आई। इस दौरान कई विकास योजनाओं पर रोक लगाई गई या कुछ फैसले टाल दिए गए। मेट्रो का आरे कारशेड का काम रोकना सबसे अधिक चर्चा में रहा। इससे प्रोजेक्ट का काम देर से हुआ और खर्च में भी वृद्धि हुई। मुंबईवासियों को भी ज़मीनी स्तर पर परेशानी का सामना करना पड़ा।
कोरोना काल में भी मुंबई समेत पूरे राज्य को कई मुश्किलों से गुज़रना पड़ा। इस दौरान सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठे और लोगों का कहना था कि उनकी ज़रूरतों पर पूरा ध्यान नहीं दिया गया। 2022 में NDA की वापसी के बाद विकास कार्यों को फिर से रफ़्तार मिली। ट्रांस हार्बर लिंक, जिसे अब अटल सेतु कहा जाता है, को लोगों को लिए खोला गया। कोस्टल रोड को भी चरणबद्ध तरीके से शुरू किया गया।
9 सालों के लंबे अंतराल के बाद 15 जनवरी 2026 को देश की सबसे धनी म्यूनिसिपल बॉडी बृहन्मुंबई म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) में चुनाव है, जिसे लेकर राजनीतिक हलचल पहले से ही तेज़ है। विश्लेषण किया जाए तो चुनावों का परिणाम स्थानीय मुद्दों पर भी पड़ेगा। हालांकि एक सामान्य मुंबई निवासी की यही आशा होगी कि शहर का विकास भी होता रहे और स्थानीय समस्याओं का निराकरण भी हो जाए। अब आने वाला वक़्त ही बताएगा कि मुंबई किस दिशा में आगे बढ़ती है।