भ्रष्टाचार के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस की नीति को अपनाते हुए गुजरात सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 2015 बैच के IAS अधिकारी और सुरेंद्रनगर के एक्स कलेक्टर डॉ. राजेंद्र कुमार पटेल को सस्पेंड कर दिया है। ये कार्रवाई उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा रिश्वत से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार करने के बाद की गई।
नियमों के मुताबिक, यदि कोई अधिकारी 48 घंटे तक पुलिस अथवा न्यायिक हिरासत में रहता है, तो उसे Deemed Suspended की श्रेणी में रखा जाता है। पटेल को ED ने 2 जनवरी को गिरफ्तार किया था। बाद में अहमदाबाद की एक अदालत ने उन्हें 7 जनवरी तक ED की रिमांड पर भेज दिया था। 48 घंटे की अवधि पार होने के साथ ही उनके सस्पेंशन का आदेश जारी कर दिया गया था।
पटेल पर सुरेंद्रनगर कलेक्टर रहते हुए CLU (Change of Land Use) मंज़ूरी के लिए भारी रिश्वत लेने का आरोप है। जांच में सामने आया है कि कृषि भूमि को गैर-कृषि कराने के लिए 5 से 10 रूपए प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से रेट तय किया गया था। जांच एजेंसी का दावा है कि 800 से ज़्यादा CLU आवेदनों को पास करने के बदले में लगभग 10 करोड़ रूपए की वसूली की गई। छापेमारी के दौरान ED को हिसाब की कुछ शीट्स भी मिली है, जिसमें पूरा ब्यौरा दर्ज है।
इस घोटाले की पिछली परतें तब खुलना शुरू हुई, जब ED ने इसी कार्यालय के डिप्टी मामलतदार चन्द्रसिंह मोरी को गिरफ्तार किया था। मोरी के घर से भी बड़ी रकम बरामद की गई थी। पूछताछ में मोरी ने खुलासा किया था कि रिश्वत का 10% खुद को, 50% कलेक्टर पटेल को, 25% आवासीय अतिरिक्त कलेक्टर आरके ओझा को, 10% मामलतदार मयूर दवे को और 5% क्लर्क मयूर सिंह गोहिल को जाता था। फिलहाल पटेल ED की रिमांड में है और जांच एजेंसी इस मामले में शामिल अन्य लोगों की तलाश कर रही है।