आज, 14 अगस्त को पूरे देश में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस (Partition Horrors Remembrance Day) मनाया जा रहा है। यह दिन 1947 में भारत के विभाजन के दौरान लोगों द्वारा झेली गई पीड़ा और उसमें मारे गए लोगों की याद में मनाया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद इसे पहली बार 2021 में मनाया गया था।
आज, X पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, "विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर उन सभी देशवासियों का हृदय से नमन, जिन्होंने उस वीभत्स दौर से निकलकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने अपने साहस और सामर्थ्य से दिखाया कि कैसे विपरीत परिस्थितियों में भी संकल्पों को सिद्ध किया जाता है। आइए, सद्भावना और एकजुटता की राष्ट्रीय भावना को और सशक्त करें।"
इस अवसर पर आज उत्तर प्रदेश के लखनऊ में एक मौन यात्रा का आयोजन किया गया। इस यात्रा का नेतृत्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। उन्होंने इसकी कुछ तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर साझा की। उन्होंने लिखा, "विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर आज लखनऊ में आयोजित मौन पदयात्रा में सम्मिलित हुआ। इस अवसर पर विभाजन त्रासदी पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा इस त्रासदी की पीड़ा झेलने वाले विस्थापित परिवारों के सदस्यों को सम्मानित भी किया। यह दिवस केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि इतिहास के उन काले अध्यायों से सीख लेकर राष्ट्र की एकता, अखंडता एवं सामाजिक समरसता को और सुदृढ़ करने का संकल्प भी है। इस नृशंस त्रासदी में काल-कवलित हुए सभी ज्ञात-अज्ञात नागरिकों को विनम्र श्रद्धांजलि।"
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी इस मौके पर X पर एक तस्वीर (जो संभवतः उनके परिवार की है) साझा करते हुए लिखा, "हमारे देश का विभाजन सबसे क्रूर, दर्दनाक और हिंसक मानवीय त्रासदियों में से एक के रूप में हमेशा याद किया जाएगा। इतिहास के इस काले दौर से जुड़ी कहानियाँ आने वाली पीढ़ियों की यादों में जीवित रहेंगी। विभाजन के दंश और दंश झेलने वाले माता-पिता के यहां जन्मा, मैं उन लोगों की पीड़ा की गहरी व्यक्तिगत समझ के साथ बड़ा हुआ हूं, जिन्हें सबसे भयावह परिस्थितियों में अपने घरों से उखाड़ दिया गया और अपनी जमीन से दूर कर दिया गया।"
उन्होंने आगे लिखा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर, मैं उन सभी को याद करता हूं जिन्होंने विभाजन के साथ हुई हिंसा और नरसंहार में अपनी जान गंवाई। मैं जीवित बचे अनगिनत लोगों को भी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिनमें मेरे अपने माता-पिता और हमारे परिवार के कई सदस्य शामिल हैं, जिन्होंने अपना सब कुछ खो दिया और मेरे पिता जैसे कई अन्य लोगों को भी, जो अपने पहने हुए कपड़ों के अलावा कुछ भी नहीं लेकर भारत भाग आए।
फिर भी, उन्होंने अद्भुत साहस दिखाया और अपनी जिंदगी को नए सिरे से खड़ा किया। उनकी कहानियाँ आम लोगों के उस असाधारण हौसले और मजबूती की मार्मिक याद दिलाती हैं, जिन्होंने अकल्पनीय तकलीफें सहीं। आइए, हम उनके दर्द को सहानुभूति के साथ याद करें, उनके हौसले का विनम्रता के साथ सम्मान करें और यह पक्का करें कि उन्होंने जिस भयावहता का सामना किया, उसे कभी भुलाया न जाए। अगर हम बंटवारे से जुड़े कुछ भयावह आंकड़ों पर नजर डालें, तो इसमें 2 लाख से 20 लाख लोगों की मौत हो गई थी। इसके अलावा, लगभग 2 करोड़ लोग विस्थापित भी हुए थे।