भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) के बीच 18 साल का लंबा इंतज़ार अब खत्म होने वाला है। दोनों पक्षों ने ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत पूरी कर ली है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि दोनों पक्षों के बीच डील फाइनल हो चुकी है और आज यानि 27 जनवरी को आधिकारिक तौर पर इसकी घोषणा की जाएगी। कई लोगों द्वारा इसे "मदर ऑफ ऑल डील्स" भी कहा जा रहा है। इसकी घोषणा भारत-EU शिखर सम्मेलन के दौरान की जाएगी, जिसकी मेजबानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नई दिल्ली में करेंगे। यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन की वार्ता करेंगे।
ये समझौता दोनों पक्षों के बाज़ारों को एक दूसरे के लिए खोलने वाला है। सरल शब्दों में कहें तो भारत से यूरोप जाने वाले या यूरोप से भारत आने वाले सामानों पर टैक्स या तो बहुत कम हो जाएगा अथवा खत्म हो जाएगा। इस समझौते से भारतीय आईटी, कपड़ा और इलेट्रॉनिक्स आदि सेक्टरों को यूरोप के बाज़ारों में बेहतर पहुंच मिलेगी। इसके अलावा भारत में यूरोपियन निवेश भी बढ़ने की संभावना है, जिससे हमारे देश में रोज़गार के नए अवसरों का निर्माण होगा। जानकारी के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच FTA में कपड़ा और जूते जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के साथ-साथ कारों और शराब पर इम्पोर्ट ड्यूटी में कटौती को शामिल किए जाने की उम्मीद है।
इस समझौते को "बैलेंस्ड और फॉरवर्ड लुकिंग" बताया गया है जिसका मतलब है कि दोनों ही पक्षों के हितों का ध्यान रखा गया है। हालांकि बताया जा रहा है कि FTA से कृषि और डेयरी सेक्टर को फिलहाल बाहर रखा गया है। ये डील ऐसे समय पर हो रही है, जब दुनियाभर में व्यापार को लेकर तनाव बढ़ रहा है। यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जिसके साथ वित्तीय वर्ष 2024-25 में 130 अरब डॉलर्स का द्विपक्षीय व्यापार हुआ। इस समझौते के बाद भारत की अन्य देशों पर निर्भरता कम हो जाएगी और उन्हें यूरोप जैसा एक बड़ा बाज़ार मिल जाएगा। भले ही आज इसकी घोषणा हो जाएगी, लेकिन इसे ज़मीन पर उतरने में थोड़ा समय लगेगा। अगले कुछ महीनों तक FTA से जुड़े कानूनी कागज़ातों की बारीकी से जांच होगी, जिसे "लीगल स्क्रबिंग" कहते हैं।