ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं। सत्ताधारी वर्कर्स पार्टी (WP) के उम्मीदवार और मौजूदा राष्ट्रपति लुई इनैसियो लूला डा सिल्वा (Luiz Inácio Lula da Silva) ने चुनाव के दूसरे दौर में जीत हासिल कर ली है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो (Jair Bolsonaro) के बेटे फ्लेवियो बोलसोनारो (Flávio Bolsonaro) को पराजित कर चौथी बार राष्ट्रपति की कुर्सी हासिल की है। जानकारी के अनुसार, पहले दौर में लूला डा सिल्वा को 45.16% वोट मिले, जबकि बोल्सोनारो को 47.03% वोट मिले थे। दूसरे दौर में, लूला डा सिल्वा को 51.79% वोट मिले, जबकि बोल्सोनारो को 48.21% वोट प्राप्त हुए।
लूला डा सिल्वा ने 2003 से 2011 तक राष्ट्रपति के रूप में सेवा दी थी और 2023 से इस पद पर लगातार बने हुए हैं। चुनाव जीतने के बाद, लूला डा सिल्वा ने कहा कि हम लोगों को यह समझाने में कामयाब रहे कि ब्राजील में लोकतंत्र की रक्षा के लिए मतदान करना बेहद जरूरी है। हमने डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए बाहरी दखल को नाकाम कर दिया। ब्राजील किसी की जागीर नहीं है। हम देश चलाने के तरीके को बदलेंगे और लोगों को निर्णय लेने की प्रक्रिया में और अधिक शामिल करेंगे।
चुनाव जीतने के बाद उन्हें कई वर्ल्ड लीडर्स से शुभकामनाएं भी मिली हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने X पर एक पोस्ट में लिखा, "मेरे प्रिय मित्र, राष्ट्रपति लूला को उनके शानदार पुनर्निर्वाचन पर हार्दिक बधाई। मैं भारत-ब्राजील की बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी को और गहरा और व्यापक बनाने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने को उत्सुक हूँ। हम साथ मिलकर विभिन्न क्षेत्रों में अपने सहयोग को मजबूत करना जारी रखेंगे, ग्लोबल साउथ की साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाएंगे और एक अधिक इन्क्लूसिव, इक्विटेबल तथा सस्टेनेबल वर्ल्ड के निर्माण की दिशा में काम करेंगे।"
मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने भी X पर लूला डा सिल्वा को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह एक कड़ा मुकाबला था, जिसमें ब्राजील की जनता ने उन्हें अपने राष्ट्र का नेतृत्व करने के लिए एक नया जनादेश दिया है। उन्होंने आगे लिखा कि सामाजिक न्याय, गरीबी कम करने और विकासशील देशों की आवाज को अहमियत दिलाने के प्रति लूला के आजीवन समर्पण ने उन्हें ब्राजील के बाहर भी बहुत सम्मान दिलाया है।
अनवर इब्राहिम ने बताया कि उन्होंने हमेशा उनकी दोस्ती को महत्व दिया है और वह लूला के इस विचार से सहमत हैं कि एक अधिक न्यायपूर्ण अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाने में ग्लोबल साउथ की आवाज और अधिक मजबूत होनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मलेशिया, राष्ट्रपति लूला के नेतृत्व में ब्राजील के साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक है और वे साथ मिलकर व्यापार और निवेश को मजबूत करने, ASEAN और लैटिन अमेरिका के बीच सहयोग को बढ़ावा देने, तथा दोनों देशों के बीच की साझेदारी को और अधिक सार्थक बनाने जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य कर सकते हैं।
तिरूवनंतपुरम से लोकसभा सांसद डॉ. शशि थरूर ने भी लिखा कि लूला डा सिल्वा की जीत इस बात की याद दिलाती है कि ब्राजील की धड़कन उसके लोगों में बसती है। मजदूर वर्ग और गरीबों के एक मजबूत समर्थक के रूप में, उनका सत्ता में लौटना ब्राजील में सामाजिक समावेश, आर्थिक न्याय और गरीबी के खिलाफ लड़ाई में नई जान फूंकता है।
इसके भू-राजनीति और विशेष रूप से BRICS पर भी गहरे प्रभाव पड़ेंगे। लूला का नेतृत्व बहुध्रुवीय विश्व (multipolarity) के प्रति ब्राजील की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और शासन व्यवस्था को नया रूप देने में, ग्लोबल साउथ की एक अहम आवाज के तौर पर ब्रिक्स गुट और भी सशक्त होगा। यह वाशिंगटन के साथ संबंधों के लिए भी एक चुनौती है, जिसने खुले तौर पर उनके प्रतिद्वंद्वी का समर्थन किया था।
हालांकि आर्थिक और कूटनीतिक तनाव बने रहने की संभावना है, लेकिन लूला की पूरी तरह से स्वतंत्र विदेश नीति, किसी के अधीन रहने के बजाय राष्ट्रीय संप्रभुता को प्राथमिकता देना जारी रखेगी। ब्राजील ने सामाजिक प्रगति, लोकतांत्रिक मजबूती और वैश्विक सहयोग का रास्ता चुना है। लैटिन अमेरिका में दक्षिणपंथी विचारधारा के उभार के बीच, यह एक ऐतिहासिक और अधिकांश लोगों के लिए अप्रत्याशित परिणाम है।