नरक चतुर्दशी या रूप चौदस दीपावली के पांच दिवसीय पर्व का दूसरा दिन होता है। दीपावली से एक दिन पहले आने वाला यह पर्व छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन घरों, मंदिरों और चौखटों पर दीप जलाकर नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता का आगमन होता है। रूप चौदस को बुराई पर अच्छाई की जीत और जीवन में नई सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। नरक चतुर्दशी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और माता काली की पूजा-अर्चना करने की भी परंपरा है।
भगवान श्रीकृष्ण ने किया था नरकासुर का वध
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा और माता महाकाली की सहायता से अत्याचारी नरकासुर का वध किया था। नरकासुर ने देवताओं और स्त्रियों पर अत्याचार किए थे और 16,100 राजकुमारियों एवं महिलाओं को बंदी बना रखा था। भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध कर सभी बंदियों को मुक्त कराया। इस विजय की खुशी में दीप जलाकर उत्सव मनाया गया। इसी परंपरा को छोटी दिवाली और दीपदान से जोड़कर देखा जाता है।
अभ्यंग स्नान की विशेष परंपरा
नरक चतुर्दशी के दिन अभ्यंग स्नान करने की भी विशेष परंपरा है। इसमें सूर्योदय से पहले शरीर पर तेल और उबटन लगाकर स्नान किया जाता है। मान्यता है कि तेल और उबटन से स्नान करने से शरीर में निखार आता है, सौंदर्य बढ़ता है और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
इस परंपरा के पीछे शरीर की स्वच्छता, सुंदरता और आरोग्य से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं भी हैं। इसे नरकासुर वध की कथा से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है की नरकासुर का वध करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने भी तेल लगाकर स्नान किया था। तभी से इस दिन अभ्यंग स्नान की परंपरा शुरू हुई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन तेल स्नान करने से नरक की यातनाओं से मुक्ति मिलती है तथा सौंदर्य और स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
यम दीपदान से जुड़ी मान्यता
नरक चतुर्दशी पर यम दीपदान की भी परंपरा निभाई जाती है। इस दिन यमराज की विशेष पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-शांति, परिजनों के अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की जाती है। दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना गया है। इसलिए सायंकाल घर के बाहर दक्षिण दिशा में यम दीपक जलाने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है।
7 नवंबर की रात नरक चतुर्दशी, 8 नवंबर को अभ्यंग स्नान
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 7 नवंबर की रात नरक चतुर्दशी का पूजन और यम दीपदान किया जाएगा, जबकि 8 नवंबर की सुबह रूप चौदस का पारंपरिक अभ्यंग स्नान किया जाएगा। रूप चौदस और नरक चतुर्दशी से जुड़ी ये परंपराएं केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक ही नहीं हैं, बल्कि तन की स्वच्छता, स्वास्थ्य, सकारात्मकता और जीवन में शुभता के महत्व का भी संदेश देती है।