लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ पेश हुआ अविश्वास प्रस्ताव, तृणमूल कांग्रेस ने बनाई दूरी

इस प्रस्ताव पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रविड़ मुनेत्र कळगम समेत अन्य दलों के 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं।

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ पेश हुआ अविश्वास प्रस्ताव, तृणमूल कांग्रेस ने बनाई दूरी

कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी गठबंधन ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है।

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Highlights

  • कांग्रेस ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया।
  • इस प्रस्ताव पर 118 विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर है, लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने इससे दूरी बनाई।
  • विपक्ष का आरोप है कि सदन में उनकी बात नहीं सुनी जा रही और राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया गया।

संसद के बजट सत्र 2026 के दौरान विपक्षी दलों में बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी गठबंधन ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। कांग्रेस सांसद के. सुरेश और मोहम्मद जावेद ने लोकसभा के महासचिव उत्पल कुमार सिंह को इस प्रस्ताव का नोटिस सौंपा है। इस प्रस्ताव पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रविड़ मुनेत्र कळगम समेत अन्य दलों के 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, इस मुद्दे पर विपक्षी गठबंधन में कुछ मतभेद भी सामने आए हैं। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने इस अविश्वास प्रस्ताव से खुद को अलग रखा है और उसके सांसदों ने इस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

विपक्ष का कहना है कि सदन के अंदर उनकी बातों को दबाया जा रहा है। मुख्य मुद्दों में राहुल गांधी को बोलने का मौका न मिलना और कांग्रेस की महिला सांसदों के खिलाफ की गई टिप्पणियां शामिल हैं। कांग्रेस का आरोप है कि स्पीकर निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रहे हैं और सरकार के दबाव में फैसले ले रहे हैं। इसी नाराजगी के चलते विपक्षी दलों ने मिलकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह कदम उनकी बढ़ती नाराज़गी को दिखाता है और उन्हें अपने मुद्दे रखने का पूरा मौका नहीं दिया जा रहा है।

लोकसभा में फरवरी के शुरुआत से ही माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है। विपक्षी सांसदों ने कई मुद्दों को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया है। इनमें एक बड़ा मुद्दा यह भी है कि स्पीकर ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी को पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे द्वारा भारत-चीन संघर्ष पर लिखे गए एक अप्रकाशित संस्मरण से जुड़े लेख का हवाला देने से रोक दिया था। हंगामे के बीच, पिछले सप्ताह आठ विपक्षी सांसदों को सत्र के बाकी समय के लिए निलंबित कर दिया गया था।

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