आतंकवाद अब बर्दाश्त नहीं, पाकिस्तान को जयशंकर की कड़ी चेतावनी

IIT मद्रास में आयोजित एक कार्यक्रम में विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत अब आतंकवाद बर्दाश्त नहीं करेगा और अपनी रक्षा कैसे करनी है, ये फैसला खुद करेगा। उन्होनें सिंधु जल समझौते, नेबरहुड पॉलिसी, बांग्लादेश और श्रीलंका पर भी अपना पक्ष प्रस्तुत किया।

आतंकवाद अब बर्दाश्त नहीं, पाकिस्तान को जयशंकर की कड़ी चेतावनी

डॉ. जयशंकर ने कार्यक्रम में विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी।

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Highlights

  • आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों पर भारत सख्त कार्रवाई करेगा।
  • सिंधु जल समझौते पर दो टूक, आतंकवाद और सहयोग एक साथ नहीं चल सकते।
  • भारत अच्छे पड़ोसियों की हमेशा मदद करेगा।

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने एक बार फिर पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर कोई पड़ोसी देश आतंकवाद को बढ़ावा देता है, तो भारत को अपनी सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि भारत अब आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा और अपनी रक्षा कैसे करनी है, ये फैसला खुद करेगा।

IIT मद्रास में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जयशंकर ने कहा, "दुर्भाग्य से हमारे पास कुछ ऐसे बुरे पड़ोसी हैं, जो जानबूझकर और लगातार आतंकवाद का सहारा लेते हैं। ऐसे में हम लोगों को अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है और हम उस अधिकार का ज़रूर प्रयोग करेंगे। हम अपनी रक्षा के लिए क्या कदम उठाते हैं, ये पूरी तरह से हमारा फैसला होगा। कोई भी बाहरी देश हमें ये नहीं सीखा सकता कि हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं।" विदेश मंत्री ने आतंकवाद और सिंधु जल समझौते को जोड़ते हुए कहा कि सद्भावना दोनों ओर से होनी चाहिए। एक तरफ तो आप हमसे पानी साझा करने की उम्मीद करते हैं और दूसरी ओर आतंकवाद फैलाते हैं। दोनों बातें एक साथ नहीं हो सकती है।

उन्होंने साफ़ किया कि जब दशकों तक आतंकवाद चलता रहे, तो अच्छे पड़ोसियों वाले रिश्ते भी खत्म हो जाते हैं। ऐसे में उन समझौतों के फायदे भी मिलना बंद हो जातें हैं, जो अच्छे संबंधों की बुनियाद पर टिके हो। बांग्लादेश में अशांति और भारत की नेबरहुड पॉलिसी के बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने कहा, "मैं दो दिन पहले ही बांग्लादेश में था। मैं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा ज़िया के अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व करने गया था। हमें कई तरह के पड़ोसी मिले हैं। अगर आपका कोई पड़ोसी आपके लिए अच्छा है या कम से कम आपके लिए नुकसानदायक नहीं है, तो आपकी स्वाभाविक प्रवृत्ति उस पड़ोसी के प्रति दयालु होने, उसकी मदद करने की होती है, और एक देश के तौर पर हम यही करते हैं।"

उन्होनें कहा कि जहाँ भी अच्छे पड़ोसीपन की भावना होती है, वहां भारत निवेश करता है, मदद करता है और साझा करता है। COVID के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे ज़्यादातर पड़ोसियों को वैक्सीन की पहली खेप भारत से मिली। कुछ पड़ोसी बहुत ही असाधारण तनाव से गुज़रे, इनमें से एक श्रीलंका था। उस समय भारत ने 4 बिलियन डॉलर्स के पैकेज के साथ श्रीलंका की मदद की थी। डॉ. जयशंकर ने कहा हमारे ज़्यादातर पड़ोसियों को यह एहसास है कि भारत की ग्रोथ आज एक बढ़ती हुई लहर है। अगर भारत बढ़ता है, तो हमारे सभी पड़ोसी हमारे साथ बढ़ेंगे। यही संदेश लेकर वो बांग्लादेश भी गए थे।

अंत में डॉ. जयशंकर के शब्दों से ये साफ़ झलकता है कि भारत की विदेश नीति कितनी संतुलित और स्पष्ट है। भारत सहयोग में विश्वास रखता है, लेकिन आतंकवाद के मामले में किसी तरह की नरमी बरतने को तैयार नहीं है। इसके अलावा अपने राष्ट्रीय हितों और रक्षा से जुड़े फैसले भी भारत खुद ही करेगा। इस मामले में कोई भी अन्य देश उसे प्रभावित नहीं कर सकता।

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