INDIA गठबंधन ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ खोला मोर्चा, दिल्ली में आयोजित किया गया सार्वजनिक महाभियोग कार्यक्रम

इस प्रतीकात्मक सार्वजनिक महाभियोग कार्यक्रम में मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि CEC ज्ञानेश कुमार प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के सीधे निर्देशों पर चुनाव आयोग चला रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि सात महीने पहले संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के 193 सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से हटाने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया था। हालांकि, उनके नोटिस खारिज कर दिए गए और उन पर कोई विचार नहीं किया गया।

INDIA गठबंधन ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ खोला मोर्चा, दिल्ली में आयोजित किया गया सार्वजनिक महाभियोग कार्यक्रम

यह कार्यक्रम कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर आयोजित किया गया।

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Highlights

  • पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने इस कार्यक्रम की अध्यक्षता की है।
  • राहुल गांधी और सोनिया गांधी सहित कई प्रमुख नेताओं ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।
  • मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव आयोग पर भाजपा के विरोधियों के वोट हटाने का आरोप लगाया।

राजधानी दिल्ली में विपक्षी INDIA गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक बड़ा मोर्चा खोलते हुए सार्वजनिक महाभियोग कार्यक्रम आयोजित किया। यह कार्यक्रम कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर आयोजित किया गया। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने INDIA गठबंधन के इस सार्वजनिक महाभियोग कार्यक्रम की अध्यक्षता की।

कार्यक्रम में मौजूद प्रमुख हस्तियों में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, कपिल सिब्बल, राजीव शुक्ला, डॉ. शशि थरूर, मनीष तिवारी, के.सी. वेणुगोपाल और इमरान मसूद शामिल थे। इनके अलावा, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, चरणजीत सिंह चन्नी, धर्मेंद्र यादव और गौरव गोगोई सहित कई अन्य प्रमुख हस्तियां भी मौजूद थीं।

इस प्रतीकात्मक सार्वजनिक महाभियोग कार्यक्रम में खरगे ने आरोप लगाया कि CEC ज्ञानेश कुमार प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के सीधे निर्देशों पर चुनाव आयोग चला रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि सात महीने पहले संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के 193 सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से हटाने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया था। हालांकि, उनके नोटिस खारिज कर दिए गए और उन पर कोई विचार नहीं किया गया।

खरगे ने साफ किया कि उस दिन वे जो प्रस्ताव लाए थे, उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति से व्यक्तिगत दुश्मनी निभाना नहीं, बल्कि एक संवैधानिक संस्था की गरिमा की रक्षा करना था। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका एकमात्र मकसद यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव आयोग संविधान की भावना के अनुरूप पूरी तरह निष्पक्ष होकर काम करे, ताकि आम जनता का उस पर भरोसा बना रहे। उन्होंने आगाह किया कि उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि कमजोर वर्गों, महिलाओं और युवाओं के वोटिंग अधिकारों को दिल्ली में बैठा कोई व्यक्ति कंप्यूटर के जरिए चुपके से हटा न दे।

2014 से सत्ता हथियाने और उसे बनाए रखने के लिए हर संभव साजिश रची गई है। उन्होंने सांसदों को चुराया है, राजनीतिक दलों को तोड़ा है, सरकारों को गिराया है और इलेक्टोरल बॉन्ड, ED तथा CBI का इस्तेमाल किया है। अब वे वोट चुरा रहे हैं। हमारे पास वोटों की ऐसी चोरी के सैकड़ों उदाहरण हैं। ज्ञानेश कुमार इस चोरी को इसलिए अंजाम दे पा रहे हैं, क्योंकि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 लागू है।

उन्होंने आगे कहा कि यह कानून दिसंबर 2023 में विपक्ष के 145 सांसदों को निलंबित करके पारित किया गया था। यह शर्मनाक और अपमानजनक है। यह कानून चुनाव आयुक्तों को आजीवन सुरक्षा कवच प्रदान करता है, ऐसा सुरक्षा कवच जो भारत के राष्ट्रपति या भारत के मुख्य न्यायाधीश को भी हासिल नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि ECI ने रातों-रात SIR की घोषणा कर दी। इसे पूरे देश में लागू किया गया, जिसका असली मकसद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विरोधियों के वोट हटाना था।

खरगे ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए बाहरी लोगों और घुसपैठियों का बहाना ले रही है। उनका आरोप है कि हम घुसपैठियों को शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा बिल्कुल नहीं है। हम तो बस असली और वैध मतदाताओं को मतदाता सूची में बनाए रखने की वकालत कर रहे हैं। हम ऐसा उनके अधिकारों की रक्षा के लिए कर रहे हैं।

यह स्पष्ट है कि दिसंबर 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने अपनी सरकार के माध्यम से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को जो आजीवन कानूनी सुरक्षा प्रदान की थी, उसका उद्देश्य उनके द्वारा देश और भारतीय संविधान के विरुद्ध की गई आपराधिक गतिविधियों पर पर्दा डालना था। इसलिए, उन्हें तुरंत पद से हटाया जाना चाहिए।

खरगे ने कहा कि भारत की 60 प्रतिशत से अधिक आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले INDIA गठबंधन के सांसदों और 31 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में एकत्रित नागरिकों ने यह संकल्प लिया कि भारत की जनता के साथ किए गए इस गंभीर विश्वासघात के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भारतीय संविधान के कानूनी ढांचे के अनुसार देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाना चाहिए।

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