पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा कहा जाता है। मान्यता है की इस नक्षत्र में किया गया कार्य लंबे समय तक सुख-समृद्धि प्रदान करता है। वैदिक ज्योतिष में 27 नक्षत्रों में पुष्य नक्षत्र को सबसे शुभ और पवित्र माना गया है। इसके स्वामी शनिदेव है, जबकि देवता देवगुरु बृहस्पति है। कहते है की इस नक्षत्र में जन्मे लोग मेहनती, परोपकारी और धार्मिक स्वभाव के होते हैं। वे दूसरों की सहायता के लिए हमेशा तैयार रहते है और मिलनसार होते है। जब पुष्य नक्षत्र गुरुवार के दिन पड़ता है, तो उसे गुरु पुष्य योग कहा जाता है, जबकि रविवार को पड़ने पर यह रवि पुष्य योग कहलाता है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ योग भी बन रहा है।
मान्यताओं के अनुसार दीपावली से पहले पड़ने वाला पुष्य नक्षत्र खरीदारी के लिए धनतेरस के समान फलदायी माना जाता है। इसका प्रतीक गाय का थन है, जो पालन-पोषण का प्रतीक है। जिस तरह गाय का थन निस्वार्थ भाव से दूध देकर बछड़े और समाज का पोषण करता है, उसी तरह यह नक्षत्र जीवन में स्थिरता, सुरक्षा, समृद्धि और उन्नति प्रदान करने वाला माना जाता है। यही वजह है कि इसे पोषण करने वाला और वृद्धिशीलता देने वाला नक्षत्र भी कहा जाता है।
शास्त्रों में कहा गया है, पुष्ये सर्वकाय सिद्धिः, यानी इस नक्षत्र में किए गए कार्यों में सफलता मिलने की मान्यता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस नक्षत्र को माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त है। इसलिए इस दिन किए गए शुभ कार्यों को विशेष फलदायी माना जाता है। इस वर्ष धनतेरस और दीपावली से पहले पुष्य नक्षत्र का बेहद शुभ संयोग बन रहा है।
इस वर्ष 1 नवंबर 2026 रविवार को पुष्य नक्षत्र पड़ रहा है। रविवार होने के कारण इस दिन रवि पुष्य योग का निर्माण होगा, जिसे ज्योतिष शास्त्र में दुर्लभ और अत्यंत शुभ माना जाता है। यह संयोग विशेष फलदायी माना जा रहा है। खास बात यह है की इसी दिन अहोई अष्टमी भी मनाई जाएगी, जिससे इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ जाएगा।
रवि पुष्य और सर्वार्थ सिद्धि योग के शुभ मुहूर्त
- रवि पुष्य योग : 1 नवंबर सुबह 10:37 से 2 नवंबर सुबह 9:04 बजे तक।
- सर्वार्थ सिद्धि योग : 1 नवंबर सुबह 6:33 से 2 नवंबर सुबह 4:30 बजे तक।
- अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 11:42 से 12:27 बजे तक।
- गोधूलि मुहूर्त : शाम 5:36 से 6:02 बजे तक।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दिन किसी नए कार्य की शुरुआत करना, सोना-चांदी खरीदना, वाहन, लोहा या मशीनरी खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। सोना-चांदी का संबंध देवगुरु बृहस्पति और चंद्रमा से माना जाता है, इसलिए इस दिन इनकी खरीदारी विशेष फलदायी मानी जाती है। इसके अलावा नई गाड़ी, जमीन, मकान या किसी भी प्रकार की संपत्ति में निवेश करना भी शुभ माना जाता है।
पुष्य नक्षत्र को अमृत नक्षत्र भी कहा जाता है, जो पोषण और शुभता का प्रतीक है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष पुष्य नक्षत्र 1 नवंबर की सुबह 5 बजकर 39 मिनट से शुरू होकर 2 नवंबर की सुबह 4 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। ऐसे में दीपावली की खरीदारी की शुरुआत इस शुभ अवसर से करना विशेष फलदायी माना जा रहा है।