मध्य प्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड पारित, उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद बना देश का चौथा राज्य

वॉइस वोट से UCC बिल पास होने के बाद, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य ने अब UCC लागू कर दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हिंदुओं और मुसलमानों को वोट बैंक के तौर पर दो अलग-अलग नजरिए से देखती है और पार्टी को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। कांग्रेस देश के 80 प्रतिशत से ज्यादा भू-भाग से पहले ही गायब हो चुकी है और उसे आगे भी इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।

मध्य प्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड पारित, उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद बना देश का चौथा राज्य

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा की यह कदम महिलाओं को बहुविवाह से होने वाली परेशानियों से आजाद करेगा​।

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Highlights

  • कांग्रेस के हंगामे के बावजूद विधानसभा ने ध्वनि मत के जरिए UCC बिल पास किया।
  • उमंग सिंघार ने मांग की थी की बिल को विस्तृत जांच के लिए एक सिलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए।
  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कह चुके थे चाहे राम हो, रहीम हो, रविंदर हो या रॉबिन सब को बराबर अधिकार मिलने चाहिए।

21 जुलाई का दिन मध्य प्रदेश के लिए ऐतिहासिक रहा। आज विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल पास हो गया। इसके साथ ही मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद UCC लागू करने वाला चौथा राज्य बन गया है। कांग्रेस के हंगामे के बावजूद, मध्य प्रदेश विधानसभा ने वॉइस वोट के जरिए UCC बिल पास कर दिया। इस बिल को कल राज्य मंत्री और सारंगपुर के विधायक गौतम टेटवाल ने पेश किया था।

वॉइस वोट से UCC बिल पास होने के बाद, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य ने अब UCC लागू कर दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हिंदुओं और मुसलमानों को वोट बैंक के तौर पर दो अलग-अलग नजरिए से देखती है और पार्टी को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। कांग्रेस देश के 80 प्रतिशत से ज्यादा भू-भाग से पहले ही गायब हो चुकी है और उसे आगे भी इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि यह कदम महिलाओं को बहुविवाह से होने वाली परेशानियों से आजाद करेगा​

इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच कल से ही तनातनी चल रही थी। जहां एक ओर भारतीय जनता पार्टी (BJP) UCC का समर्थन कर रही थी, वहीं कांग्रेस इसका विरोध कर रही थी। विधानसभा में नारेबाजी के बीच UCC पर बहस हुई। खबरों के मुताबिक, विपक्ष के नेता और गंधवानी के विधायक उमंग सिंघार ने बार-बार मांग की कि बिल को विस्तृत जांच के लिए एक सिलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहले ही कह दिया था कि चाहे राम हो, रहीम हो, रविंदर हो या रॉबिन सब को बराबर अधिकार मिलने चाहिए। नेताओं ने इस मामले पर अलग-अलग राय जाहिर की थी। मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने बिल की जरूरत पर ही सवाल उठा दिए थे। उन्होंने कहा कि NEET के छात्र हमलों का सामना कर रहे हैं और किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है।

उन्होंने तर्क दिया था कि ऐसे मामूली मुद्दे सिर्फ जनता का ध्यान जरूरी मुद्दों से हटाने और एक नया नैरेटिव बनाने के लिए उठाए जा रहे हैं। इस कदम की कोई जरूरत नहीं थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार सामने आया है और इस बिल को सिर्फ ध्यान भटकाने की चाल बताया।

वहीं, BJP विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा था कि देश में एक से अधिक शादी करने की प्रथा (बहुविवाह) खत्म हो जाएगी। चाहे राम हों या रहीम, देश का कानून सिर्फ एक शादी की इजाजत देता है। बाबासाहेब अंबेडकर का भी यही विजन था। आज, मध्य प्रदेश में मोहन यादव सरकार उसी विजन पर काम कर रही है।

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