UPI ने बनाया नया रिकॉर्ड, दिसंबर में हुए 21.63 अरब के ट्रांसेक्शन्स

UPI द्वारा 21.63 अरब ट्रांसेक्शन्स दर्ज किए गए हैं, जो अपने आप में एक वर्ल्ड रिकॉर्ड है। ये आंकड़ा पिछले साल की तुलना में 29% अधिक है।

UPI ने बनाया नया रिकॉर्ड, दिसंबर में हुए 21.63 अरब के ट्रांसेक्शन्स

UPI के ज़रिए 27.97 लाख करोड़ रूपए का लेनदेन हुआ है।

Share:

Highlights

  • UPI के ज़रिए 27.97 लाख करोड़ रूपए का भुगतान हुआ है, जो सालाना आधार पर 20% की वृद्धि है।
  • UPI द्वारा 21.63 अरब ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए हैं।
  • एक औसत UPI ट्रांसेक्शन की राशि 1262 रूपए हो गई है।

​भारत में अब जेब में कैश-वॉलेट हो या न हो, फ़ोन से ऑनलाइन पेमेंट करना सामान्य व्यक्ति की आदत बन चुका है। इसी का नतीजा है कि नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (NPCI) के ताज़ा आंकड़ों ने सभी को चौंका दिया है। इसके मुताबिक़, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस (UPI) द्वारा 21.63 अरब ट्रांसेक्शन्स दर्ज किए गए हैं, जो अपने आप में एक वर्ल्ड रिकॉर्ड है। ये आंकड़ा पिछले साल की तुलना में 29% अधिक है। ये दिखाता है कि आम जनता का इन सेवाओं पर भरोसा बढ़ा है और अब अधिकतर लोग जेब में कैश रखने से "स्कैन" करने को ज़्यादा बेहतर समझते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि अब केवल बड़े कामों के लिए ही नहीं, बल्कि सब्ज़ी खरीदने और चाय पीने जैसी छोटी वस्तुओं में भी पेमेंट करने के लिए UPI का उपयोग हो रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, UPI द्वारा छोटे लेनदेन भी पर्याप्त मात्रा में बढ़े है। इसके द्वारा दिसंबर महीने में 27.97 लाख रूपए का भुगतान हुआ है, जो सालाना आधार पर 20 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। इसके अलावा दिसंबर में रोज़ाना औसतन 69.8 करोड़ ट्रांसेक्शन्स हुए हैं। वहीं रोज़ाना लेनदेन की औसत राशि बढ़कर 90,217 करोड़ रूपए हो गई है। एक औसत UPI ट्रांसेक्शन की राशि 1262 रूपए हो गई है ये राशि पहले 1363 रूपए थी।

हालांकि इसकी सफलता के पीछे भी कई प्रमुख कारण है। आज ग्राहकों को उचित दरों में फ़ोन और डाटा उपलब्ध है, जिस वजह से ये सुविधा सामान्य वर्ग तक पहुंच सकी है। इसके अलावा NPCI और अन्य बैंकों द्वारा अपनाए गए सुरक्षा मानकों से भी जनता का विश्वास बढ़ा है। साथ ही लॉगिन पासवर्ड और फेस आईडी के कारण कोई भी अनजान व्यक्ति किसी भी तरह की गड़बड़ नहीं कर सकता है।

लगातार नए रिकॉर्ड्स इस बात का संकेत हैं कि डिजिटल अर्थव्यवस्था अब और भी मज़बूत होती जा रही है। UPI का उपयोग भारत के अलावा कुछ अन्य देशों में भी हो रहा है, जिससे इसे वैश्विक स्तर पर भी पहचान मिली है। कुल-मिलाकर 27.97 लाख करोड़ रूपए का ये आंकड़ा हमें ये बताता है की UPI अब आम आदमी की ज़रूरत बन चुका है और कैशलेस अर्थव्यवस्था में भारत लगातार आगे बढ़ते जा रहा है।

रिलेटेड टॉपिक्स