खुशी की पतंग, जानलेवा डोर : केमिकल मांजा बन रहा लोगों के लिए खतरा

हर साल मकर संक्रांति पर पतंगबाज़ी का माहौल बनता है। बच्चे और युवा अपने परिवार के साथ खुशी के साथ पतंग उड़ाते है। लेकिन इस खुशी के बीच एक वस्तु लोगों को बहुत नुकसान भी पहुंचा रही है। इसे हम आमतौर पर चायनीज़ मांजा भी कहते है। हालांकि इस मांजे का चीन से कोई सीधा सम्बन्ध नहीं है। इसका असली नाम केमिकल मांजा है।

खुशी की पतंग, जानलेवा डोर : केमिकल मांजा बन रहा लोगों के लिए खतरा

चायनीज़ मांजे का उपयोग बहुत खतरनाक साबित हो रहा है।

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Highlights

  • केमिकल मांजे में डोर नायलॉन या अन्य सिंथेटिक धागे से बनाई जाती है।
  • इस मांजे पर मेटलिक पाउडर, कांच और लोहे के चूरे की परत चढ़ाई जाती है।
  • ये मांजा इंसानों और पशु-पक्षियों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है।

हर साल मकर संक्रांति पर पतंगबाज़ी का माहौल बनता है। बच्चे और युवा अपने परिवार के साथ खुशी के साथ पतंग उड़ाते है। लेकिन इस खुशी के बीच एक वस्तु लोगों को बहुत नुकसान भी पहुंचा रही है। इसे हम आमतौर पर चायनीज़ मांजा भी कहते है। हालांकि इस मांजे का चीन से कोई सीधा संबंध​ नहीं है। न ये चीन में बनता है और न ही वहां से तैयार हालत में भारत आता है। इसका असली नाम केमिकल मांजा है। इसे नायलॉन मांजा भी कहा जाता है। खबरों के अनुसार, इसे चायनीज़ मांजा कहने की वजह ये है कि इसमें इस्तेमाल होने वाला कुछ कच्चा माल चीन से मंगाया जाता रहा है। बाज़ार में पतंग उड़ाने के लिए दो तरह के मांजे मिलते है। पहला साधारण या सूती मांजा जो बरेली, सूरत और लुधियाना जैसे शहरों में बनाया जाता है और ये ज़्यादा सुरक्षित होता है। वहीं दूसरा मांजा होता है केमिकल मांजा जो खतरनाक होता है।

केमिकल मांजे में डोर नायलॉन या अन्य सिंथेटिक धागे से बनाई जाती है। इस पर मेटलिक पाउडर, कांच और लोहे के चूरे की परत चढ़ाई जाती है। ये ज़्यादा मज़बूत और खतरनाक होता है और इसी पर सबसे ज़्यादा प्रतिबंध है। ये मांजा इतना तेज़ होता है कि एक व्यक्ति के गले या हाथ-पैर को भी काट सकता है। साथ ही राह चलते बाइक सवारों को भी नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा कुछ पक्षी भी इसकी चपेट में आकर घायल हो जाते हैं या मर जाते हैं। कई बार जानवर भी इसका शिकार बन जाते हैं।

पिछले कुछ समय से इसके उपयोग के कारण देश में कई दुर्घटनाएं भी सामने आई हैं। यदि इसी साल की बात करें तो एक-दो दिन पूर्व ही इंदौर में एक 45 वर्षीय ठेकेदार की चायनीज़ मांजे से गला कटने के कारण मौत हो गई। इसके अलावा अन्य घटनाओं में दो लोग घायल भी हो गए, जिनमें से एक की हालत गंभीर बताई जा रही है। प्रयागराज में भी एक स्कूटी सवार व्यक्ति इसकी चपेट में आ गया और उसका गला और उंगली कट गई। हालांकि इलाज के बाद अब वे सुरक्षित है। डॉक्टरों ने बताया कि यदि मांजा और कस जाता तो बड़ा हादसा होने की संभावना थी। सिर्फ इस मांजे को "चायनीज़" या "खूनी" कह देने से हमारी ज़िम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती। सच्चाई ये है कि हम ही इसे बनाते हैं और हम ही इसका उपयोग करते हैं। तो इससे होने वाले नुकसान की ज़िम्मेदारी भी हमारी ही है।

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