नई भाजपा टीम के ऐलान के बाद संसदीय बोर्ड के पुनर्गठन की तैयारी, जानिए संभावित चेहरे

संसदीय बोर्ड की अहमियत इस बात से आंकी जा सकती है कि राज्य में चुनावी जीत के बाद मुख्यमंत्री और विधायक दल के नेता का चयन यही समिति करती है। हालांकि, पार्टी द्वारा आधिकारिक घोषणा किए जाने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

नई भाजपा टीम के ऐलान के बाद संसदीय बोर्ड के पुनर्गठन की तैयारी, जानिए संभावित चेहरे

विधानसभा और लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखकर, पार्टी सभी समीकरण साधने की कोशिश भी कर सकती है।

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Highlights

  • येदियुरप्पा, सोनोवाल और सुधा यादव समेत कई मौजूदा सदस्यों की हो सकती है छुट्टी।
  • संसदीय बोर्ड में योगी, सरमा व फडणवीस की एंट्री पर चर्चा, शुभेंदु को लेकर भी तेज हुई अटकलें।
  • केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की वापसी को लेकर भी भारी उम्मीदें।

कुछ दिन पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की नई टीम की घोषणा की गई थी। इसके बाद, पार्टी की सबसे ताकतवर इकाई, संसदीय बोर्ड में फेरबदल को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। हाल ही में घोषित 65 राष्ट्रीय पदाधिकारियों की सूची में नए और अनुभवी लोगों का मिश्रण है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली इकाई में किन नए चेहरों को शामिल किया जाएगा। आने वाले विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखकर, पार्टी क्षेत्रीय, जातिगत और सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश भी कर सकती है।

मौजूदा संसदीय बोर्ड पर नजर डालें तो इसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा, असम के पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, तेलंगाना BJP के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. लक्ष्मण, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM) के पूर्व अध्यक्ष इकबाल सिंह लालपुरा, महेंद्रगढ़ से पूर्व लोकसभा सांसद डॉ. सुधा यादव, राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बी. एल. संतोष और मध्य प्रदेश BJP के पूर्व अध्यक्ष, पूर्व केंद्रीय मंत्री व उज्जैन से पूर्व लोकसभा सांसद डॉ. सत्यनारायण जाटिया शामिल हैं।

कयास लगाए जा रहे हैं कि बी.एस. येदियुरप्पा, सर्बानंद सोनोवाल, के. लक्ष्मण, इकबाल सिंह लालपुरा, सत्यनारायण जटिया और सुधा यादव जैसे मौजूदा सदस्यों की जगह नए चेहरे आ सकते हैं। अगर नए संसदीय बोर्ड में शामिल किए जा सकने वाले संभावित उम्मीदवारों पर नजर डालें, तो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी उनमें से एक हैं। फडणवीस अभी केंद्रीय चुनाव समिति के सदस्य हैं, लेकिन संसदीय बोर्ड का हिस्सा नहीं हैं। संसदीय बोर्ड में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा जैसे प्रमुख नेताओं को शामिल किए जाने की भी चर्चा है।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के संसदीय बोर्ड में शामिल होने की भी अटकलें जोरों पर हैं। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की वापसी की भी काफी उम्मीदें हैं। गौरतलब है कि 2022 में उनका नाम बोर्ड से हटा दिया गया था। उस समय उनके साथ केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को भी हटा दिया गया था। संसदीय बोर्ड की अहमियत इस बात से आंकी जा सकती है कि राज्य में चुनावी जीत के बाद मुख्यमंत्री और विधायक दल के नेता का चयन यही समिति करती है। हालांकि, पार्टी द्वारा आधिकारिक घोषणा किए जाने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

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