महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। कई इलाकों में गैर-मराठी ऑटो-रिक्शा चालक और मालिक मराठी भाषा सीखने के कथित दबाव के खिलाफ सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करते देखे गए। इसके चलते ट्रैफिक में रूकावट की खबरें भी सामने आई हैं। एक ऑटो चालक ने बताया कि हम 55-60 साल के हैं। हम कभी स्कूल नहीं गए। हम मराठी कैसे बोल सकते हैं?
हम टूटी-फूटी मराठी बोलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है, बल्कि हमें सजा दी जा रही है। क्या हम 15,000-20,000 रूपए का जुर्माना भर सकते हैं? हम यह 3 दिन की हड़ताल तब तक जारी रखेंगे जब तक हमें इंसाफ नहीं मिल जाता।
वहीं एक अन्य व्यक्ति ने भी बताया कि ये हड़ताल मराठी भाषा से जुड़े एक आदेश के कारण बुलाई गई है। हमारी बात कोई नहीं सुन रहा है। अगर आप अचानक किसी 60 साल के व्यक्ति से मराठी बोलने के लिए कहें, तो वे ऐसा कैसे कर सकते हैं? हमें न्याय चाहिए। इसी दौरान, शिवसेना (SS) के प्रवक्ता संजय निरूपम ने महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक को एक ज्ञापन सौंपा है।
इसमें सरकार से मांग की गई कि गैर-मराठी भाषी ऑटो-रिक्शा चालकों को मराठी सीखने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाए। दोनों ने एक प्रेस वार्ता भी की, जिसमें संजय ने कहा कि मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना है कि महाराष्ट्र में मराठी भाषा का सम्मान किया जाना चाहिए। महाराष्ट्र में रहने वाले हर व्यक्ति को मराठी में बातचीत करनी चाहिए और सभी को कम से कम इस भाषा की बुनियादी जानकारी होनी चाहिए।
महाराष्ट्र में कोई भी यह नहीं कह सकता कि मैं मराठी नहीं बोलूंगा। यह पूरी तरह से अनुचित व्यवहार है। संजय ने कहा कि जब से शिवसेना बनी है, तब से शिवसेना प्रमुख बाळासाहेब ठाकरे के नेतृत्व में पार्टी का यही मानना रहा है कि महाराष्ट्र में मराठी भाषा का सम्मान किया जाना चाहिए। शिवसेना ने हमेशा इस मुद्दे को लोगों के सामने बहुत गंभीरता और मजबूती से उठाया है।
व्यक्तिगत रूप से, मेरा भी मानना है कि अगर कोई महाराष्ट्र या किसी अन्य राज्य में रहता है, तो उसे निश्चित रूप से वहां की स्थानीय भाषा का सम्मान करना चाहिए और उसमें बातचीत करना आना चाहिए। किसी पर जबरदस्ती करने का सवाल ही नहीं उठता, लेकिन राज्य की भाषा और संस्कृति का सम्मान किया जाना चाहिए।