वन्दे मातरम् पर भाजपा ने पारित किया प्रस्ताव, दो पद ही गाने पर की कांग्रेस की आलोचना

भारतीय जनता पार्टी ने देश के लोगों से याद रखने को कहा है कि, वन्दे मातरम् के शब्द कभी इतने शक्तिशाली थे कि एक साम्राज्य उनसे भयभीत हो उठा था। अंग्रेजों ने इन्हें दबाने का प्रयास इसलिए किया क्योंकि इन शब्दों ने प्रतिरोध की चेतना जगाई थी। पीढ़ियों के भारतीयों ने इन्हें स्वतंत्रता, बलिदान और राष्ट्रगौरव के मंत्र के रूप में अपनाया। इस विरासत को आज की वोट बैंक राजनीति की गणित में सीमित नहीं किया जा सकता।

वन्दे मातरम् पर भाजपा ने पारित किया प्रस्ताव, दो पद ही गाने पर की कांग्रेस की आलोचना

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा पार्टी की नई टीम की घोषणा के बाद आज पदाधिकारियों की बैठक हुई।

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Highlights

  • भाजपा द्वारा राष्ट्रीय गीत को सांप्रदायिक दबाव के अधीन करने के हर प्रयास का विरोध किया जाएगा।
  • भाजपा गांधीजी का वो कथन लोगों तक पहुंचाएगी जिसमें उन्होंने वन्दे मातरम् को शुद्धतम राष्ट्रीय भावना से जुड़ा हुआ बताया था
  • युवाओं को वन्दे मातरम् के इतिहास व स्वतंत्रता संग्राम में इसका महत्व बताने के लिए जागरूकता अभियान शुरू होगा।

राष्ट्रीय राजनीति के क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन द्वारा पार्टी की नई टीम की घोषणा के बाद, आज राष्ट्रीय पदाधिकारियों की पहली बैठक संपन्न हुई और बैठकों का सिलसिला जारी है। आज BJP ने एक प्रस्ताव पास करके कांग्रेस वर्किंग कमिटी (CWC) के उस फैसले की निंदा की, जिसमें कांग्रेस के कार्यक्रमों में वन्दे मातरम् को सिर्फ शुरूआती दो पदों तक ही गाने का फैसला किया गया था।​​

इस सिलसिले में BJP ने भी आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसे पार्टी के प्रवक्ता और लोकसभा सांसद डॉ. संबित पात्रा ने संबोधित किया। पात्रा ने बताया कि यह वन्दे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ है। 15 अगस्त 2026 को लाल किले से पूरा वन्दे मातरम् गाया गया, जिसमें छह पद हैं। लेकिन 15 अगस्त को कांग्रेस दफ्तर में एक अशोभनीय घटना हुई। कांग्रेस सांसद सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता व कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की मौजूदगी में, जब तिरंगा फहराया जा रहा था, तो सोनिया गांधी ने दो पदों के बाद वन्दे मातरम् को रोकने का इशारा किया।

19 अगस्त को CWC की बैठक में एक प्रस्ताव आया कि हम वन्दे मातरम् के केवल दो पद गाएंगे। हम सभी जानते हैं कि 1937 में यह फैसला क्यों लिया गया था। पात्रा ने आगे बताया कि 1905 में बंगाल का बंटवारा हो रहा था और बंगाल के बंटवारे को रोकने के लिए वन्दे मातरम् लिखा गया था। तब ब्रिटिश सरकार वन्दे मातरम् को रोक रही थी और आज कांग्रेस वन्दे मातरम् को रोक रही है। यह राजनीति का नहीं, बल्कि देश के बंटवारे का मामला है। 1937 में पहली बार पंडित नेहरू के कहने पर वन्दे मातरम् को बांटा गया था। तुष्टीकरण का यही बीज बाद में बंटवारे का बीज बन जाता है।

कांग्रेस पार्टी ने जान-बूझकर तुष्टीकरण की राजनीति को बढ़ावा दिया है। यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है। हम भी इस मामले में पीछे नहीं हटेंगे। 1937 में कांग्रेस के प्रस्ताव से जो 'टू-नेशन थ्योरी' शुरू हुई थी। उसी कोशिश को एक बार फिर दोहराया जा रहा है। हम इस कोशिश को किसी भी कीमत पर आगे नहीं बढ़ने देंगे। देश किस आधार पर चलेगा? क्या देश संसद में लिए गए फैसलों के आधार पर चलेगा, या CWC कमेटी में लिए गए फैसलों और प्रस्तावों के आधार पर?

संबित पात्रा ने कहा कि संसद में नियम बनते हैं, जब संसद में कानून पास होते हैं, तब कांग्रेस पार्टी के लोग संसद की सीढ़ियों पर बैठते हैं। वे वहां भेष बदलकर आते हैं। वे वहां दूसरों का अपमान करते हैं। कोई साधु का भेष धरकर आता है। तो कोई साधुओं के साथ मारपीट करता है।

BJP ने आज अपने प्रस्ताव में 10 संकल्प भी लिए हैं, जो इस प्रकार हैं:

1. 19 अगस्त 2026 को कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा 1937 के प्रस्ताव को दोहराते हुए वन्दे मातरम् के प्रथम दो पदों तक गायन सीमित करने के निर्णय की कड़ी निंदा और स्पष्ट विरोध करेगी।

2. पूर्ण वन्दे मातरम् के सम्मान, गरिमा, विरासत और राष्ट्रीय स्वरूप की रक्षा करेगी, इसे भारत का राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रीय चेतना का अमर प्रतीक और स्वतंत्रता संग्राम की गौरवशाली विरासत मानेगी।

3. 1950 में संविधान सभा की घोषणा तथा 2026 में संसद द्वारा राष्ट्रीय गीत को जन गण मन के समान वैधानिक संरक्षण प्रदान किए जाने से स्थापित स्थिति की दृढ़ता से पुष्टि करेगी।

4. राष्ट्रीय गीत को सांप्रदायिक दबाव, राजनीतिक तुष्टीकरण अथवा संकीर्ण वोट-बैंक की राजनीति के अधीन करने के हर प्रयास का विरोध करेगी।

5. कांग्रेस को स्मरण कराएगी कि उसकी कार्यसमिति का कोई प्रस्ताव भारत के संवैधानिक संस्थानों और संसद द्वारा बनाए गए कानूनों से ऊपर नहीं हो सकता। 1937 का राजनीतिक समझौता 1950 के संवैधानिक निर्णय और 2026 में संसद द्वारा बनाए गए कानून से ऊपर नहीं रखा जा सकता।

6. जनता के सामने उस ऐतिहासिक और राजनीतिक संदर्भ को उजागर करेगी, जिसमें वन्दे मातरम् के गायन को सीमित किया गया था, जिसमें मुस्लिम लीग की आपत्तियां तथा बाद में बढ़ती सांप्रदायिक और अलगाववादी मांगों की राजनीति शामिल थी।

7. महात्मा गांधी के उस ऐतिहासिक कथन को जन-जन तक पहुंचाएगी, जिसमें उन्होंने वन्दे मातरम् को “साम्राज्यवाद- विरोधी नारा” और “शुद्धतम राष्ट्रीय भावना” से जुड़ा हुआ बताया था।

8. भाजपा कार्यकर्ताओं के माध्यम से देशव्यापी अभियान चलाएगी, जिसके अंतर्गत वन्दे मातरम् का इतिहास, अर्थ, राष्ट्रीय महत्व और गौरवशाली विरासत भारत के हर कोने तक पहुंचाई जाएगी।

9. विशेषकर युवा पीढ़ी के बीच जागरूकता का अभियान चलाया जाएगा, ताकि छह पदों वाले पूर्ण राष्ट्रीय गीत और उसके इतिहास को विस्मृति में न जाने दिया जाए तथा आने वाली पीढ़ियां समझ सकें कि वन्दे मातरम् के साथ भारत की स्वतंत्रता, संघर्ष, बलिदान और राष्ट्र-जागरण की कितनी गहरी स्मृतियां जुड़ी हैं।

10. राजनीतिक सुविधा या तुष्टीकरण के लिए वन्दे मातरम् के सम्मान और विरासत से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

भारतीय जनता पार्टी ने देश के लोगों से याद रखने को कहा है कि, वन्दे मातरम् के शब्द कभी इतने शक्तिशाली थे कि एक साम्राज्य उनसे भयभीत हो उठा था। अंग्रेजों ने इन्हें दबाने का प्रयास इसलिए किया क्योंकि इन शब्दों ने प्रतिरोध की चेतना जगाई थी। पीढ़ियों के भारतीयों ने इन्हें स्वतंत्रता, बलिदान और राष्ट्रगौरव के मंत्र के रूप में अपनाया। इस विरासत को आज की वोट बैंक राजनीति की गणित में सीमित नहीं किया जा सकता।

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