BIMSTEC बैठक में अमित शाह का आतंकवाद और ड्रग तस्करी पर मिलकर लड़ने का आह्वान

अमित शाह ने कहा कि आज, भारत 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना के साथ आगे बढ़ रहा है। हम हमेशा शांति, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और मानव कल्याण के लिए प्रतिबद्ध रहे हैं और आज भी हम इन सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध हैं। भारत ने कभी भी किसी देश पर आक्रमण करने या उस पर प्रभुत्व स्थापित करने में विश्वास नहीं किया है। भारत ने हमेशा सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने और मतभेदों के शांतिपूर्ण समाधान में विश्वास किया है।

BIMSTEC बैठक में अमित शाह का आतंकवाद और ड्रग तस्करी पर मिलकर लड़ने का आह्वान

अमित शाह ने कहा की BIMSTEC गृहमंत्रियों की बैठक की मेजबानी भारत के लिए गर्व का विषय है।

Share:

Highlights

  • अमित शाह ने कहा कि भारत हमेशा सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करता आया है।
  • BIMSTEC देशों से आतंकवादी नेटवर्क की फंडिंग, भर्ती और ट्रेनिंग रोकने के लिए सहयोग करने की अपील की गई।
  • बैठक में मानव तस्करी के पीड़ितों को बचाने, पुनर्वास और सुरक्षित स्वदेश वापसी में सहयोग पर जोर दिया गया।

आज नई दिल्ली में 'बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन' (BIMSTEC) के गृह मंत्रियों और प्रतिनिधियों की बैठक हुई। BIMSTEC के सदस्य देशों में भारत, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, म्यांमार, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल हैं। बैठक में भारत के गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि BIMSTEC के गृह मंत्रियों की पहली बैठक की मेजबानी करना भारत के लिए बहुत गर्व और सम्मान की बात है। BIMSTEC क्षेत्रीय एकीकरण, आर्थिक सहयोग और सामूहिक सुरक्षा के लिए एक अहम मंच बन गया है। 

आज, भारत 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना के साथ आगे बढ़ रहा है। हम हमेशा शांति, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और मानव कल्याण के लिए प्रतिबद्ध रहे हैं और आज भी हम इन सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध हैं। भारत ने कभी भी किसी देश पर आक्रमण करने या उस पर प्रभुत्व स्थापित करने में विश्वास नहीं किया है। भारत ने हमेशा सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने और मतभेदों के शांतिपूर्ण समाधान में विश्वास किया है।

4 अप्रैल 2025 को बैंकॉक में छठे BIMSTEC शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि BIMSTEC हमारे लिए सिर्फ एक क्षेत्रीय संगठन नहीं है। यह समावेशी विकास और सुरक्षा का एक मॉडल है। इस सोच को आगे बढ़ाते हुए, आज गृह मंत्रियों के तौर पर हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने सहयोग को ऐसी व्यावहारिक व्यवस्थाओं में बदलें जो हमारे नागरिकों की सुरक्षा और हमारी एजेंसियों की क्षमताओं को मजबूत करें।

भारत BIMSTEC के सुरक्षा ढांचे के तहत हुई प्रगति की सराहना करता है। हम अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद, सीमा-पार संगठित अपराध और नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी जैसी आपस में जुड़ी चुनौतियों से निपटने में सहयोग करने और साथ ही संबंधित BIMSTEC समझौतों को पूरी तरह और प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

आपराधिक नेटवर्क सीमाओं के पार अपनी गतिविधियां चलाते हैं और स्थानीय कमजोरियों का फायदा उठाते हैं। इसलिए हमारी प्रतिक्रिया में क्षेत्रीय सहयोग का विशेष स्थान बनता है। इन नेटवर्कों की प्रणाली बहुत तेजी से बदल रही है। एन्क्रिप्टेड संचार, सोशल मीडिया, क्रिप्टो करेंसी, ड्रोन और डार्क वेब का दुरूपयोग प्रचार, भर्ती, धन जुटाने के लिए और अवैध गतिविधियों के संचालन में किया जा रहा है।

इन चुनौतियों से असरदार ढंग से निपटने के लिए इंटेलिजेंस एजेंसियों, कानून लागू करने वाली एजेंसियों, फाइनेंशियल मॉनिटरिंग एजेंसियों और बॉर्डर मैनेजमेंट एजेंसियों के बीच रियल-टाइम सहयोग और तालमेल बहुत जरूरी है। भारत ने हमेशा आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। हमारी साझेदारी इस भरोसे से मजबूत होती है कि हर सदस्य देश की सुरक्षा व्यवस्था दूसरे सदस्य देशों की सुरक्षा में भी योगदान दे। 

हमारी साझा प्रतिबद्धता यह सुनिश्चित करे कि आतंकवादी नेटवर्क को इस क्षेत्र के किसी भी हिस्से में पनाह लेने, लोगों को भर्ती करने और ट्रेनिंग देने, फंड जुटाने या पड़ोसी देशों के खिलाफ गतिविधियां चलाने का कोई मौका या जगह न मिले। हमें राष्ट्रीय कानूनों और लागू संधियों के अनुसार आपसी कानूनी सहायता और प्रत्यर्पण के मामलों में एक-दूसरे का समर्थन करना चाहिए।

भारत का मानना है कि ड्रग तस्करी एक प्रकार से मौत की तस्करी है। यह हमारे युवाओं, हमारे समाज, हमारी संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों की जिंदगी पर हमला है। इसे सिर्फ एक देश की कोशिशों से नहीं रोका जा सकता। हमें पूरे क्षेत्र को साथ लेकर चलने वाला नजरिया अपनाना होगा। ड्रग तस्करी से होने वाली गैर-कानूनी कमाई संगठित अपराध को आर्थिक ताकत देती है और इसका इस्तेमाल आतंकवाद को फंड करने के लिए भी किया जाता है। 

प्रीकर्सर केमिकल्स का गलत इस्तेमाल और डार्क वेब के जरिए होने वाले लेन-देन इस चुनौती को और भी मुश्किल बना देते हैं। मानव तस्करी भी हमारी साझा सुरक्षा और मानवाधिकारों के लिए एक गंभीर चुनौती है। पीड़ितों की पहचान करने, उन्हें बचाने, मदद करने, उनका पुनर्वास करने और उन्हें सुरक्षित रूप से उनके देश वापस भेजने में सहयोग हमारी सामूहिक कोशिशों का एक अहम हिस्सा बना रहना चाहिए।

रिलेटेड टॉपिक्स