राष्ट्रीय राजनीति से एक बड़ी खबर सामने आई है। लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधित विधेयक, 2026 को राज्यसभा में पेश किया गया है। बता दें कि कल लोकसभा में यह विधेयक ध्वनि मत से पारित हो गया था। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज राज्यसभा में इस विधेयक को पेश किया। जानकारी के मुताबिक, इस विधेयक पर चर्चा के लिए सात घंटे का समय निर्धारित किया गया है। इस दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जैसा कि सभी जानते हैं, यह विधेयक निचले सदन द्वारा पारित किया जा चुका है, जहाँ चर्चा के लिए 10 घंटे का समय आवंटित किया गया था।
बार-बार रूकावटों और शोर-शराबे के बीच भी चर्चा हुई और पूरा जवाब भी उसी हंगामे के बीच दिया गया। अब, यह विधेयक ऊपरी सदन में आ गया है। यह बड़ों का, वरिष्ठों का, बुद्धिमानों का और परिपक्व लोगों का सदन है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन में बताया कि एंटी-पेपर लीक बिल देश के छात्रों और युवाओं के कल्याण की रक्षा के लिए सरकार की सर्वोच्च प्रतिबद्धता को फिर से दोहराता है। उन्होंने बताया कि चार मुख्य भर्ती एजेंसियां हैं, जो अलग-अलग सेक्टरों के लिए परीक्षाएं आयोजित करती हैं।
इनमें यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC), रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड (RRB) और इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सिलेक्शन (IBPS) शामिल हैं। उन्होंने आगे कहा, "हायर एजुकेशन में दाखिले की परीक्षाओं के लिए अब हमारे पास नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) है। यह अजीब बात है कि NTA बनाने का विचार सबसे पहले 1992 में, यानी लगभग 33 साल पहले आया था। तब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। समय-समय पर कई कमेटियों ने इस विचार को दोहराया और 2010 में भी एक कमेटी ने ऐसी एजेंसी बनाने की सिफारिश की थी। मुझे यकीन है कि विपक्ष प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करेगा और उन्हें धन्यवाद देगा कि यह अधूरा काम अब पूरा किया जा रहा है।"
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री ने बिना देर किए एक बिल पेश किया जो यह गारंटी देता है कि किसी को भी हमारे बच्चों के भविष्य को खतरे में डालने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार ने पेपर लीक को रोकने के लिए कानून में बहुत सख्ती से बदलाव किए हैं, क्योंकि ऐसी घटनाओं को लेकर सरकार की नीति 'जीरो टॉलरेंस' की है। उन्होंने UPA सरकार के दौरान हुए पेपर लीक्स का भी जिक्र किया।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने दावा किया कि इस पेपर लीक के कारण बहुत से बेगुनाह लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। उन्होंने कहा किए इस नए बिल से कुछ नहीं होने वाला है क्योंकि पुराने कानून में बस कुछ डेटा ही बदला गया है। भारी जुर्माना, कड़ी सजा, स्पेशल टास्क फोर्स और फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसे प्रावधान तो किए गए हैं, लेकिन इससे कुछ नहीं बदलेगा। असली बदलाव तभी आएगा जब परीक्षा कराने के तरीके में बदलाव होगा। इस बिल में कुछ भी नया नहीं है। हमने 2024 में ही एक कड़े कानून की मांग की थी, लेकिन हमारी मांग ठुकरा दी गई थी।
खरगे ने कहा कि सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं को शांत करने के लिए यह बिल लाया गया है, पेपर लीक रोकने के लिए नहीं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह का भी उल्लेख किया। खरगे ने कहा कि हमारे गृह मंत्री अमित शाह कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। वे छोटी बातों पर बोलते हैं, हर जगह जाते हैं, पर यहाँ नहीं आ रहे हैं। प्रधानमंत्री भी कुछ नहीं कह रहे हैं। आप गृह मंत्री हैं, कानून-व्यवस्था की देखरेख करते हैं और दिल्ली में इतना कुछ होने के बावजूद आपने कुछ नहीं कहा। आपको खुलकर बोलना चाहिए था। कभी-कभी देश की भलाई के लिए अपमान भी झेलना पड़ता है।
खरगे के मुताबिक, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर चुप रहे हैं। अगर वे कुछ नहीं बोलते हैं, तो छात्र उन्हें एक बार फिर सबक सिखाएंगे। छात्रों पर हुए अत्याचारों के लिए गृह मंत्री अमित शाह जिम्मेदार हैं। वे बंद दरवाजा के पीछे छिप नहीं सकते। सरकार को संसद में 20 जुलाई की घटनाओं के बारे में सच बताना चाहिए था, लेकिन वह ऐसा करने में नाकाम रही। खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की समस्याओं को हल करने के लिए नहीं, बल्कि सत्ता खोने के डर से उनके आगे झुकी। उन्होंने एक तय समय-सीमा वाला सालाना कैलेंडर बनाने की मांग की ताकि यह पक्का किया जा सके कि छात्रों का भविष्य अनिश्चितता में न रहे।