भारतीय राजनीति से एक बड़ी खबर सामने आई है। लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधित विधेयक, 2026 पारित हो गया है। यह विधेयक लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में संशोधन करता है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, संगठित परीक्षा धोखाधड़ी और अन्य अनुचित तौर-तरीकों को रोकने के लिए कानूनी ढांचे को और मजबूत करना है। ध्वनि मत द्वारा लोकसभा में बिल पारित होने के पश्चात, सदन को 30 जुलाई को सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।
दूसरी ओर राज्यसभा में भी, राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित हो चुका है। यह विधेयक राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन करता है। इस कानून के जरिए वंदे मातरम को भी राष्ट्रगान, जन गण मन के बराबर कानूनी संरक्षण दिया गया है। इन अपराधों के लिए तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। ध्वनि मत द्वारा राज्यसभा में बिल पारित होने के पश्चात, इस उच्च सदन को भी 30 जुलाई को सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।
काफी शोर-शराबे और जुबानी जंग के बाद, लोकसभा में पेपर लीक के खिलाफ ये विधेयक अथवा बिल पास हो गया। इससे पहले, केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण और उनके आरोपों व दावों का तथ्यों के साथ जवाब दिया। दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शनों के बारे में बात करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने साफ किया कि कोई गोली नहीं चलाई गई थी। सिर्फ आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया था। चूंकि कोई गोली नहीं चली थी, इसलिए आदेश देने का सवाल ही नहीं उठता। ऐसा आदेश देने का अधिकार मजिस्ट्रेट के पास होता है, मंत्री के पास नहीं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी के सरकारी आवास, 7 लोक कल्याण मार्ग (LKM) के बाहर राहुल के विरोध प्रदर्शन पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि, "ऐसा लगता है कि राहुल की गहरी इच्छा थी कि देश उन्हें चुने और 7 LKM में बिठाए। जब यह इच्छा पूरी नहीं हुई, तो वे निराशा और हताशा में डूब गए और आखिरकार 7 LKM के गेट पर ही बैठ गए। जब उन्हें विनम्रता से बताया गया कि ऐसा व्यवहार उनके कद के अनुरूप नहीं है, तो उन्होंने बस यही जवाब दिया कि उन्हें वहां से हटा दिया जाए।"
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, "हमारे एक सम्मानित सदस्य ने बताया कि विपक्ष शुरू में इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से हिचकिचा रहा था क्योंकि उन्हें लगा कि यह आम आदमी पार्टी (AAP) के नेतृत्व वाला आंदोलन है। हालाँकि, जब उन्होंने देखा कि विरोध प्रदर्शन जोर पकड़ रहा है, तो वे भी इसमें शामिल हो गए। जैसा कि एक सदस्य ने 'Gen Z' की भाषा में कहा, विपक्षी नेता 'MIA' यानी 'Missing in Action' (गायब) थे। एक अन्य सदस्य ने 'FOMO' यानी 'Fear of Missing Out' (कुछ छूट जाने का डर) का जिक्र किया। शायद इसीलिए वे आखिरकार प्रधानमंत्री आवास के बाहर जाकर बैठ गए।"