BRICS Summit 2026 : पुतिन पहुंचे भारत, बिजनेस फोरम में खुले बाजार और मजबूत सप्लाई चेन पर जोर

ब्रिक्स के सदस्य देशों में भारत, ब्राजील, चीन, इजिप्ट, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) शामिल हैं। वहीं ब्रिक्स के पार्टनर देशों में बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाखस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं। आमंत्रित देशों में बहरीन, बुरूंडी, फिलिपींस और उरूग्वे शामिल हैं।

BRICS Summit 2026 : पुतिन पहुंचे भारत, बिजनेस फोरम में खुले बाजार और मजबूत सप्लाई चेन पर जोर

विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने व्लादिमीर पुतिन का स्वागत किया।

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Highlights

  • चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के 12 सितंबर को दोपहर 12:25 बजे भारत पहुंचने की संभावना है।
  • 11-12 सितंबर को भारत इनोवेट्स - डीपटेक एक्सपोसिशन का आयोजन किया जाएगा।
  • आज ब्रिक्स बिजनेस फोरम का आयोजन हो रहा है और इसमें डॉ. जयशंकर तथा पीयूष गोयल भी शामिल हुए।

भारत की राजधानी दिल्ली में 12-13 सितंबर को आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit 2026) के लिए कई वैश्विक नेताओं का भारत आगमन शुरू हो चुका है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी भारत पहुंच चुके हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी भारत पहुंच गए हैं। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राष्ट्रपति पुतिन का स्वागत किया।

इस मौके की कुछ तस्वीरें X पर शेयर करते हुए उन्होंने लिखा, "ब्रिक्स समिट के लिए नई दिल्ली में रूसी संघ के राष्ट्रपति महामहिम व्लादिमीर पुतिन का स्वागत करना सम्मान की बात है। भारत राष्ट्रपति पुतिन का गर्मजोशी से स्वागत करता है। समिट में उनकी मौजूदगी भारत और रूस के बीच 'विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी' की मजबूती और महत्व को दर्शाती है।" चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के 12 सितंबर को दोपहर 12.25 बजे भारत पहुंचने की संभावना है।

ब्रिक्स के सदस्य देशों में भारत, ब्राजील, चीन, इजिप्ट, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) शामिल हैं। वहीं ब्रिक्स के पार्टनर देशों में बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाखस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं। आमंत्रित देशों में बहरीन, बुरूंडी, फिलिपींस और उरूग्वे शामिल हैं।

इन देशों के अलावा सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद, विश्व व्यापार संगठन (WTO) की डायरेक्टर-जनरल डॉ. न्गोजी ओकोन्जो-इवेला (Dr. Ngozi Okonjo-Iweala), न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) की अध्यक्ष डिल्मा रूसेफ, यूनाइटेड नेशन्स (UN) के सेक्रेटरी-जनरल एंतोनियो गुटेरेस, एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) की अध्यक्ष जू जियायी, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के डायरेक्टर-जनरल टेड्रोस एडनॉम गेब्रियेसस को भी इस ब्रिक्स समिट के लिए आमंत्रित किया गया है।

आज 11 सितंबर को ब्रिक्स बिजनेस फोरम का आयोजन हो रहा है तथा 11-12 सितंबर को भारत इनोवेट्स - डीपटेक एक्सपोसिशन का आयोजन किया जाएगा। ब्रिक्स बिजनेस फोरम में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर तथा वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल समेत कई अन्य लोग भी मौजूद रहे। पीयूष गोयल ने ब्रिक्स बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री जयशंकर की उपस्थिति के लिए उनका धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि आज की बड़ी वैश्विक चुनौतियों के दौर में उनकी उपस्थिति आर्थिक कूटनीति के महत्व को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।

उन्होंने आगे कहा कि इस उपस्थिति से यह विश्वास मजबूत होता है कि व्यापार जगत आर्थिक और राजनीतिक कूटनीति के बीच के गहरे तालमेल को महत्व देता है। इसके साथ ही, पीयूष गोयल ने रूस के आर्थिक विकास मंत्री मैक्सिम रेशेतनिकोव का भारत में स्वागत किया और यह उम्मीद जताई कि इस फोरम से ऐसे सार्थक परिणाम निकलेंगे, जो सभी सदस्य देशों के व्यापार और आपसी बातचीत को अगले स्तर पर ले जाने में मदद करेंगे।

पीयूष गोयल ने कहा कि उनका मानना है कि साझेदारों के बीच व्यापार गहरा और मजबूत होना चाहिए, जिसमें सप्लाई चेन विविध हों। उन्होंने आगे कहा कि यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि व्यापार किसी भी समय किसी सदस्य देश के लोगों की तरक्की और भलाई में बाधा न बने। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सदस्य देशों को एक-दूसरे के उत्पादों के लिए अपने बाजार खोलने चाहिए, जिसमें कच्चा माल और जरूरी खनिज भी शामिल हों। उनके अनुसार, सप्लाई चेन तब मजबूत होंगी जब वे दोनों तरफ से काम करेंगी।

उन्होंने जानकारी दी कि 88% देशों के लिए नॉन-टैरिफ उपायों की वजह से एक्सपोर्ट की लागत टैरिफ से भी कहीं ज्यादा हो जाती है, इसलिए बाजार तक पहुँच को आसान और सुगम बनाने की जरूरत है। उन्होंने ब्रिक्स सदस्य देशों और साझेदार देशों से आग्रह किया कि वे अपने बाजार खोलें और साथ मिलकर नियम-कानूनों की प्रक्रियाओं को आसान बनाने और कंसाइनमेंट की तेजी से मंजूरी सुनिश्चित करने के लिए काम करें।

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