जलवायु परिवर्तन के गंभीर होते संकट के बीच, पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए 13 मई को 100 दिन की 'भारत क्लाइमेट सत्याग्रह यात्रा' शुरू की गई थी। 'सोलर मैन ऑफ इंडिया' के नाम से मशहूर आईआईटी बॉम्बे (IITB) के पूर्व प्रोफेसर चेतन सिंह सोलंकी के नेतृत्व में, यह यात्रा दिल्ली के राजघाट से शुरू हुई और 20 अगस्त को वापस राजघाट पहुंचकर संपन्न होगी।
रिपोर्ट्स की मानें तो, इन 100 दिनों के दौरान, क्लाइमेट सत्याग्रह यात्रा ने 5 हजार किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय की और 130 से ज्यादा कार्यक्रमों के जरिए 51 शहरों में कई लोगों से संवाद किया। प्रोफेसर सोलंकी के अनुसार, 51 शहरों में लोगों से बातचीत के उनके अनुभव से पता चलता है कि भले ही जलवायु परिवर्तन के बारे में जागरूकता बढ़ी है।
लेकिन इसके मूल कारणों और जरूरी समाधानों की समझ अभी भी बहुत सीमित है, यहां तक कि पढ़े-लिखे लोगों और निर्णय लेने वालों के बीच भी। प्रोफेसर सोलंकी के अनुसार, पेड़ लगाना, सोलर पावर अपनाना, EV (इलेक्ट्रिक वाहन) इस्तेमाल करना और नई तकनीकें व नीतियां बनाना जरूरी कदम हैं। लेकिन, लगातार बढ़ती खपत को कम किए बिना ये काफी नहीं होंगे।
प्रोफेसर सोलंकी कहते हैं कि जैसे पैरासिटामोल से कैंसर का इलाज नहीं हो सकता, वैसे ही सिर्फ तकनीकी या प्रतीकात्मक उपायों से जलवायु परिवर्तन की समस्या हल नहीं हो सकती। विज्ञान और तकनीक भले ही आगे बढ़ें और अर्थव्यवस्था का विकास हो, लेकिन पृथ्वी का आकार नहीं बढ़ सकता। पृथ्वी सीमित है और इसके संसाधन भी सीमित हैं। इसलिए, हमारी खपत भी सीमित होनी चाहिए।
क्लाइमेट सत्याग्रह यात्रा के दौरान, लोगों से अपील की गई कि वे एक साल तक नए कपड़े न खरीदें। अब तक 10 हजार से अधिक लोग यह संकल्प ले चुके हैं। अभियान के अनुमान के अनुसार, इससे 200 मिलियन लीटर से अधिक पानी बचाया जा सकता है और लगभग 5 लाख किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन को रोका जा सकता है।
जानकारी के मुताबिक, इस 'भारत क्लाइमेट सत्याग्रह यात्रा' के रूट में दिल्ली, आगरा, कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, पटना, कोलकाता, दुर्गापुर, खड़गपुर, कटक, भुवनेश्वर, गंजम, ब्रह्मपुर, विशाखापत्तनम, राजमहेंद्रवरम, बेंगलुरू, पुणे, मुंबई, कोल्हापुर, वापी, सूरत, अहमदाबाद, इंदौर, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, जयपुर और कई अन्य शहर शामिल हैं।