JSSC CGL परीक्षा रद्द होने पर बवाल, सफल अभ्यर्थियों का आरोप, सरकार ने हमें सड़कों पर ला दिया

मीडिया से बात करते हुए, CGL प्रक्रिया के जरिए भर्ती हुए एक कर्मचारी ने कहा कि आप लोगों को छह या आठ महीने तक नौकरी दें और फिर अचानक कह दें कि पूरी प्रक्रिया ही रद्द कर रहे हैं, यह ठीक नहीं है। कई लोगों ने इन पदों पर काम करने के लिए अपनी पिछली नौकरियां छोड़ दी थीं। क्या यह सही है? क्या हमारे कोई मानवाधिकार या कोई अधिकार नहीं हैं? लगभग 2,200 लोग नौकरी पर लग चुके हैं।

JSSC CGL परीक्षा रद्द होने पर बवाल, सफल अभ्यर्थियों का आरोप, सरकार ने हमें सड़कों पर ला दिया

परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवार प्रोजेक्ट भवन के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे है।

Share:

Highlights

  • झारखंड सरकार के इस निर्णय के खिलाफ रांची में टॉर्चलाइट प्रोटेस्ट निकालकर विरोध किया गया।
  • अंजनी कुमार नाम के एक व्यक्ति ने मुख्यमंत्री से यह फैसला वापस लेने की गुहार लगाई है।
  • आशीष नामक व्यक्ति ने बताया की रातों-रात बताया जाना कि हमारी सेवाएं खत्म कर दी गई है, बहुत चिंता की बात है।

झारखंड के रांची में विभिन्न परीक्षाओं में गड़बड़ियों को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों के दबाव में आकर राज्य सरकार ने प्रदर्शनकारियों की कुछ मांगें मान ली हैं। इसमें JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने का फैसला भी शामिल है। जहां इस फैसले से छात्र और युवा खुश हैं, वहीं उन लोगों को बड़ा झटका लगा है जो पहले ही परीक्षा पास कर नौकरी कर रहे थे। जिन उम्मीदवारों की भर्ती हो चुकी थी और जो अपने पदों पर काम कर रहे थे, उन्होंने झारखंड सरकार के इस निर्णय के खिलाफ रांची में टॉर्चलाइट प्रोटेस्ट निकालकर विरोध किया और न्याय की मांग की।

JSSC-CGL परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवार प्रोजेक्ट भवन (जिसे झारखंड सचिवालय भी कहा जाता है) के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। मीडिया से बात करते हुए, CGL प्रक्रिया के जरिए भर्ती हुए एक कर्मचारी ने कहा कि आप लोगों को छह या आठ महीने तक नौकरी दें और फिर अचानक कह दें कि पूरी प्रक्रिया ही रद्द कर रहे हैं, यह ठीक नहीं है। कई लोगों ने इन पदों पर काम करने के लिए अपनी पिछली नौकरियां छोड़ दी थीं। क्या यह सही है? क्या हमारे कोई मानवाधिकार या कोई अधिकार नहीं हैं? लगभग 2,200 लोग नौकरी पर लग चुके हैं।

कई और लोग भी अपने निजी अनुभव साझा कर रहे हैं। राजस्व विभाग में ASO, अंजनी कुमार ने बताया कि पिछले कई सालों से सरकारी जांच में कुछ भी सामने नहीं आया, लेकिन अचानक कैबिनेट की बैठक में एक निर्णय ले लिया गया। हमारी नियुक्तियां कोर्ट के आदेश के बाद हुई थीं। उन्होंने परीक्षा को राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। मैं मुख्यमंत्री से अपील करता हूं कि वे इस फैसले को वापस लें। वरना, हमें कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा। इस फैसले से झारखंड के छात्रों की हार ही हुई है। एक और प्रदर्शनकारी ने कहा कि सरकार के इस फैसले के बाद वो सड़क पर आ गए हैं।

वहीं खूंटी में लेबर एनफोर्समेंट ऑफिसर के तौर पर नियुक्त आशीष मिंज ने बताया कि सरकार के इस फैसले से हम बहुत परेशान हैं। यहां आने से पहले, मैंने 2019 से 2022 तक लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरशन (LIC) में डेवलपमेंट ऑफिसर और फिर 2022 से जनवरी 2026 तक फूड कॉर्पोरशन ऑफ इंडिया (FCI) में काम किया। मैंने दूसरी नौकरियों के साथ-साथ इस पद के लिए पढ़ाई की और एक चयन प्रक्रिया के जरिए यह नौकरी हासिल की। ​​अब हमारे पास वापस जाने के लिए कोई जगह नहीं है। हमारे पास कुछ नहीं बचा है। रातों-रात यह बताया जाना कि हमारी सेवाएं खत्म कर दी गई हैं, हमारे लिए बहुत चिंता की बात है।

रिलेटेड टॉपिक्स
Most Popular