उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज बरेली जिले में आयोजित एक कार्यक्रम में 68,000 प्रहरियों को सम्मानित किया। इसकी कुछ तस्वीरें X पर शेयर करते हुए उन्होंने लिखा, "ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा का सुदृढ़ वातावरण बनाने एवं अपराध नियंत्रण व पुलिस-जनसहयोग में ग्राम प्रहरियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर आज प्रदेश के 68,000 ग्राम प्रहरियों के सम्मान हेतु जनपद बरेली में आयोजित कार्यक्रम में सम्मिलित हुआ। इस अवसर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले ग्राम प्रहरियों को सम्मानित भी किया। समस्त लाभार्थियों को हार्दिक बधाई।"
इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के अलावा कई अन्य लोग भी मौजूद थे, जिनमें उत्तर प्रदेश के वित्त और संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह, पर्यावरण और वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना और लोकसभा सांसद छत्रपाल सिंह गंगवार शामिल थे। मुख्यमंत्री ने इस कार्यक्रम को संबोधित किया। आज शारदीय नवरात्रि की तृतीया तिथि है। इस अवसर पर उन्होंने मां भगवती को भी नमन किया। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब बदल चुका है। 2017 से पहले यदि कोई त्यौहार आता था, लोग उत्सव भूल जाते थे, उपद्रव पहले ही शुरु हो जाता था। अब लोग उपद्रव भूल गए हैं।
पहले अक्सर ऐसा होता था कि मूर्तियां पंचमी और सप्तमी के बीच स्थापित की जाती थीं। लेकिन इस बार मैंने देखा है कि लोगों ने प्रतिपदा के दिन से ही मूर्तियां स्थापित कर पूजा-अर्चना शुरू कर दी है और भारी भीड़ भी जुट गई है। मुझे अलग-अलग देवी मंदिरों से भीड़ के बारे में लगातार जानकारी मिल रही है। कल श्री विंध्यवासिनी धाम में लगभग 2,25,000 से 2,50,000 श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। उससे पहले भी श्रद्धालु आए थे और आज सुबह 6.00 बजे तक श्री विंध्यवासिनी धाम में 1,50,000 श्रद्धालु पूजा कर चुके हैं।
उत्तर प्रदेश में जो सुरक्षित माहौल बना है, उसने देश और दुनिया में यूपी की धारणा को बदला है। पहले लोग क्या सोचते थे? लोगों को लगता था कि चाहे कुछ भी हो जाए, यूपी कभी नहीं सुधरेगा। यूपी के लोगों और यहां के नागरिकों पर सवाल उठाए जाते थे। कुछ मुट्ठी भर लोग गलत काम करते थे और उसका खामियाजा यूपी की 25 करोड़ जनता को भुगतना पड़ता था। कुछ लोगों की गलतियों की वजह से यूपी के युवाओं, बेटियों, व्यापारियों और हर नागरिक के सामने पहचान का संकट खड़ा हो जाता था। जब भी यूपी का कोई व्यक्ति राज्य से बाहर जाता था, तो उसे इस पहचान के संकट का सामना करना पड़ता था और अपनी पहचान छिपानी पड़ती थी।
अब यूपी पर कोई सवाल नहीं करता। अब यूपी पर कोई आक्षेप नहीं लगाता। जो लोग कल तक हमसे सौ कदम दूर रहते थे, आज जब उन्हें पता चलता है कि कोई यूपी से है, तो वे दूरी नहीं बनाते। बल्कि, वे पास आते हैं और गले लगाने की कोशिश करते हुए कहते हैं कि हम भी यूपी जैसा बनना चाहते हैं और यूपी की तरह ही आगे बढ़ना चाहते हैं। इस बदलाव ने हर नागरिक के जीवन पर असर डाला है। हर व्यक्ति को इससे फायदा हुआ है। जब सुरक्षा का माहौल होता है, तो सड़कें बनती हैं। सड़कें बनती हैं और चौड़ी होती हैं, जिससे व्यापार और कारोबार को बढ़ावा मिलता है।
उन्होंने आगे कहा कि पुलिस विभाग में बड़े और बुनियादी बदलाव किए गए। कई सिस्टम और व्यवस्थाएं लागू की गईं। यह पक्का किया गया कि अगर पुलिस को अच्छी ट्रेनिंग और सुविधाएं मिलती हैं, तो उन सुविधाओं का फायदा होम गार्ड, PRD और गांव के चौकीदारों व गार्डों को भी मिलना चाहिए। उन्हें भी इस सिस्टम का अहम हिस्सा बनाना जरूरी था। 2017 से पहले क्या हालात थे? उनकी देखभाल करने या उनका हाल-चाल पूछने वाला कोई नहीं था। उस समय 68,000 ग्राम पंचायतें थीं। हमने कई ग्राम पंचायतों को शहरी स्थानीय निकायों में मिला दिया और बाकियों का विस्तार किया।
उन्होंने ग्राम प्रहरियों का मानदेय 2,500 रूपए से बढ़ाकर 3,500 रूपए करने का ऐलान भी किया है। इसके साथ ही, उनके परिजनों को 5 लाख रूपए तक का मुफ्त कैशलेस इलाज दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बरेली जिले में आयोजित शिक्षक सम्मेलन और संवाद कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि 2017 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर हमें आपका आशीर्वाद मिला। राज्य में डबल-इंजन वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनी। हमने 1,60,000 से अधिक शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की। इसका नतीजा क्या हुआ? राज्य में शिक्षकों की भर्ती हुई और राज्य के युवाओं को बिना किसी भेदभाव के सरकारी नौकरी मिली।