धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर CJP फाउंडर अभिजीत दिपके ने कसा तंज, झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए

अभिजीत दिपके ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत का भी शुक्रिया अदा किया। अभिजीत ने कहा कि अगर उन्होंने हमें कॉकरोच न कहा होता, तो प्रधान ने इस्तीफा न दिया होता। 26 दिनों तक भूख हड़ताल करने वाले एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने भी X पर लिखा, "यह लोकतंत्र की जीत है। लोकतंत्र, जो सड़कों से निकला है। यह शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत है। CJP और देश की Gen Z को बधाई और उन सभी नागरिकों का धन्यवाद जिन्होंने डर को त्यागकर देश के हर कोने से आवाज उठाई।"

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर CJP फाउंडर अभिजीत दिपके ने कसा तंज, झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज प्रधानमंत्री मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया।

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Highlights

  • CJP फाउंडर अभिजीत दिपके ने कहा की याद रखना, कॉकरोच से पंगा मत लेना।
  • AAP नेता मनीष सिसोदिया के अनुसार देश को बड़े पैमाने पर शिक्षा क्रांति की जरूरत है।
  • प्रियंका गांधी वाड्रा मानती है की यह भारत के युवाओं की जीत है और उन्हें उन सभी पर बहुत गर्व है।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने जिस मुख्य मांग के लिए प्रदर्शन किया था, वह अब पूरी हो चुकी है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज प्रधानमंत्री मोदी को अपना त्यागपत्र सौंप दिया है। आज दिल्ली के जंतर-मंतर के साथ कई अन्य स्थानों पर भी जश्न का माहौल देखा जा रहा है। CJP और अन्य विपक्षी दलों की ओर से तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।

CJP के फाउंडर अभिजीत दिपके ने कहा कि मैं एक बहुत जरूरी बात कहना चाहता हूँ। धर्मेंद्र प्रधान के आज इस्तीफा देने की वजह से मुझे हीरो मत बनाइए। यह गलती मत कीजिएगा। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के कारण मुझे हीरो मत बनाइए। किसी एक व्यक्ति को हीरो बनाने की वजह से ही देश बर्बाद हुआ है।​ 

अभिजीत ने दावा किया कि ये भारत के संविधान और भारत की जनता की जीत है। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि डरने की कोई बात नहीं है, यह डेमोक्रेसी है। उन्होंने इस्तीफा दे दिया है, लेकिन हमारी दो और मांगें हैं। हम यूं ही नहीं हटेंगे।

धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है, लेकिन जिन छात्रों ने आत्महत्या की, उनके परिवारों को एक करोड़ रूपए का मुआवजा मिलना चाहिए, वे इसके हकदार हैं। उन सभी परिवारों को वह मुआवजा मिलना चाहिए। दूसरी बात, 20 तारीख को गुंडागर्दी करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। याद रखें, कॉकरोच से पंगा न लें।

अभिजीत ने बहुत ही जोश में प्रदर्शनकारियों से कहा, "झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।" उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत का भी शुक्रिया अदा किया। अभिजीत ने कहा कि अगर उन्होंने हमें कॉकरोच न कहा होता, तो प्रधान ने इस्तीफा न दिया होता

26 दिनों तक भूख हड़ताल करने वाले एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने भी X पर लिखा, "यह लोकतंत्र की जीत है। लोकतंत्र, जो सड़कों से निकला है। यह शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत है। CJP और देश की Gen Z को बधाई और उन सभी नागरिकों का धन्यवाद जिन्होंने डर को त्यागकर देश के हर कोने से आवाज उठाई।"

अब विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा भी अलग-अलग बयान सामने आ रहे हैं। दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी मर्जी से इस्तीफा नहीं दिया। देश के बच्चों और छात्रों ने धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा लिया है। अगर यह इस्तीफा अपनी मर्जी से दिया गया होता, तो यह NEET पेपर लीक होने के समय ही हो जाता। सिसोदिया के अनुसार, देश को बड़े पैमाने पर शिक्षा क्रांति की जरूरत है।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि, आज मैं कई वजहों से बहुत खुश हूँ, लेकिन मुख्य वजह यह है कि मेरा मानना है कि आज वह दिन है जब हमारे देश के लोगों ने अपना देश उन लोगों से वापस लेना शुरू कर दिया है जिन्होंने संविधान को खत्म करने की कोशिश की, जिन्होंने हमारे लोगों की आवाज को दबाने और कुचलने की हर मुमकिन कोशिश की।

मेरा मानना है कि यह भारत के युवाओं की जीत है। मुझे उन सभी पर बहुत गर्व है। वे सभी जो बाहर निकले और अपनी बात के लिए खड़े हुए। उन्होंने ठीक वैसे ही किया जैसा महात्मा गांधी ने हमें सिखाया था। उन्होंने अहिंसक तरीके से ऐसा किया।

उन पर पैलेट गन चलाई गईं। उनके खिलाफ आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। उन्हें लाठियों से पीटा गया। उन्हें गंभीर चोटें आईं, लेकिन वे झुके नहीं। इसके बजाय, सरकार को उनकी इच्छा के आगे झुकना पड़ा। यह इस देश के हर शासक के लिए एक सबक है, आज और हमेशा के लिए।

आपको लोगों की इच्छा सुननी होगी। यह एक लोकतंत्र है। लोगों की इच्छा सबसे ऊपर है। इससे ऊपर कुछ भी नहीं है। कोई इंसान, कोई नेता, कोई तानाशाह और कोई भी ताकत भारतीय लोगों की इच्छा को नहीं रोक सकती। आज, हमारे छात्रों और युवाओं ने यह साबित कर दिया है।

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