लोकसभा में पेपर लीक संशोधन विधेयक पर बहस शुरू, सजा और जुर्माने में होगी बढ़ोतरी

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि हम परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों को निपटाने के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करेंगे। हमने इसके लिए एक समय-सीमा भी तय की है। जांच दो महीने के भीतर पूरी होनी चाहिए, चाहे वह केंद्रीय एजेंसी द्वारा या विशेष कार्य बल (स्पेशल टास्क फोर्स) द्वारा की जाए।

लोकसभा में पेपर लीक संशोधन विधेयक पर बहस शुरू, सजा और जुर्माने में होगी बढ़ोतरी

डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार यह बिल संसद के इतिहास में एक मील का पत्थर है।

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Highlights

  • डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा की ये बिल पब्लिक एग्जामिनेशन प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स एक्ट में एक संशोधन है।
  • अपने संबोधन में डॉ. जितेंद्र सिंह ने UPA के कार्यकाल के दौरान हुए पेपर लीक के मामलों का भी जिक्र किया।
  • इस बिल में किए गए संशोधन के तहत जुर्माना 1 करोड़ रूपए से बढ़ाकर 5 करोड़ रूपए किया जा रहा है।

आज लोकसभा के लिए एक अहम दिन है। काफी हंगामे के बाद, सदन में 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधित विधेयक' या 'पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल' पर चर्चा आखिरकार शुरू हो गई है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि उन्होंने सभी पार्टियों के नेताओं, जिनमें कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के चीफ व्हिप, DMK और शरद पवार की NCP शामिल हैं, से बातचीत की

जरूरत पड़ी तो सरकार 10 घंटे तक चर्चा बढ़ाने को तैयार

इसमें तय समय की 6 घंटे की चर्चा को 2 घंटे और बढ़ाकर 8 घंटे की बहस करने पर सहमति बनी। उन्होंने कहा कि अगर 8 घंटे से अधिक समय की जरूरत पड़ी, तो सरकार चर्चा को 10 घंटे तक बढ़ाने के लिए भी तैयार है। इस बीच, राज्यसभा की कार्यवाही 29 जुलाई को सुबह 11.00 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है। लोकसभा में बिल पर बोलते हुए, केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह पब्लिक एग्जामिनेशन प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स एक्ट, 2024 में एक संशोधन है।

भारत माता के बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नही​

उस पहले वाले बिल को भी इसी सरकार ने पेश किया था। न सिर्फ पेश किया था, बल्कि आजाद भारत के इतिहास में शायद वह अपनी तरह का पहला बिल था। पहले वाला बिल और आज का यह संशोधन, एक तरह से, देश के छात्रों और युवाओं के कल्याण की रक्षा के लिए इस सरकार की गहरी प्रतिबद्धता को फिर से पुष्ट करते हैं। साथ ही, यह प्रधानमंत्री मोदी के उस संकल्प को भी दोहराता है कि भारत माता के बच्चों के भविष्य के साथ किसी को भी खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा। इसलिए, इस बिल को भारतीय संसद के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने वाला कानून कहा जा सकता है।

UPA काल के पेपर लीक का भी हुआ उल्लेख 

इस दौरान, डॉ. जितेंद्र सिंह ने यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस (UPA) के कार्यकाल में हुए पेपर लीक के मामलों का भी जिक्र किया। उन्होंने रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड (2009), ऑल इंडिया इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जामिनेशन (2011), AIIMS नई दिल्ली एंट्रेंस एग्जाम पेपर लीक (2012), महाराष्ट्र सेकेंडरी सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (2013), तमिलनाडु पब्लिक सर्विस कमीशन (2012) और वेस्ट बंगाल जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम (2009) का उदाहरण दिया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अगर वे इनकी लिस्ट बनाते रहे, तो बिल पर चर्चा नहीं कर पाएंगे। इसलिए, इस सरकार को एक खास कानून की जरूरत महसूस हुई।

इसी सरकार ने किया 2017 में NTA का गठन

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि भारत सरकार के तहत चार प्रमुख भर्ती एजेंसियां ​​हैं। इनमें यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC), स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड और इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सिलेक्शन (IBPS) शामिल हैं। इसी तरह, उच्च शिक्षा में दाखिले के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) है। NTA की स्थापना भी इसी सरकार ने 2017 में की थी। एक कॉमन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी बनाने की सिफारिश सबसे पहले 1992 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार से की गई थी। बाद में, 2010 में UPA के कार्यकाल के दौरान, एक समिति ने भी यही सुझाव दिया था। मुझे नहीं पता कि इस मामले पर ठीक से विचार क्यों नहीं किया गया, चाहे कारण या निहित स्वार्थ कुछ भी रहे हों। इसलिए, मेरा मानना ​​है कि प्रधानमंत्री मोदी और इस सरकार की सराहना करनी चाहिए।

सर्विस प्रोवाइडर्स पर जुर्माना 1 करोड़ से बढ़कर हुआ 5 करोड़

डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, यह संशोधन कानून को और मजबूत करने और तेजी से न्याय सुनिश्चित करने के लिए लाया जा रहा है, ताकि इन सभी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ाई और बहाल की जा सके। 2024 के कानून के तहत, सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए सजा में 1 करोड़ रूपए तक का जुर्माना शामिल था। अब इसे बढ़ाकर 5 करोड़ रूपए किया जा रहा है। 2024 के कानून में यह भी प्रावधान था कि प्रोवाइडर को अगले चार वर्षों तक कोई भी परीक्षा आयोजित करने से रोक दिया जाएगा। इस संशोधन के तहत, उस अवधि को बढ़ाकर आठ साल किया जा रहा है।

परीक्षा में धांधली, अब फास्ट-ट्रैक कोर्ट में होगी सुनवाई​

अंत में, माफिया गिरोहों से जुड़े संगठित अपराध के मामले में, पहले की 5-10 साल की सजा को बढ़ाकर 7-10 साल किया जा रहा है। जुर्माना, जो पहले 1 करोड़ रूपए तक था, अब उसे बढ़ाकर 10 करोड़ रूपए करने का प्रस्ताव है। सबसे महत्वपूर्ण बात, जिस पर प्रधानमंत्री ने भी वीडियो के माध्यम से जोर दिया है, वह है तेजी से न्याय का भरोसा। हम परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों को निपटाने के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करेंगे। हमने इसके लिए एक समय-सीमा भी तय की है। जांच दो महीने के भीतर पूरी होनी चाहिए, चाहे वह केंद्रीय एजेंसी द्वारा या विशेष कार्य बल (स्पेशल टास्क फोर्स) द्वारा की जाए।

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