देशभर में हर्षोल्लास के साथ मनाई जा रही है देवशयनी एकादशी, आज से चातुर्मास भी शुरू

लाखों वारकरी आज पंढरपूर स्थित चंद्रभागा नदी के तट पर एकत्र हुए, ताकि वार्षिक पंढरपूर वारी तीर्थयात्रा का समापन किया जा सके। वारी में संतों, खास तौर पर ज्ञानेश्वर और तुकाराम की पादुकाओं को पालकी में रखकर उनके मंदिरों से पंढरपूर तक ले जाया जाता है। कई तीर्थयात्री पैदल ही इस जुलूस में शामिल होते हैं। 'वारकरी' का अर्थ है वारी करने वाला। बताया जाता है कि यह परंपरा 700 से 800 साल से भी अधिक पुरानी है।

देशभर में हर्षोल्लास के साथ मनाई जा रही है देवशयनी एकादशी, आज से चातुर्मास भी शुरू

श्रीक्षेत्र पंढरपूर स्थित विठोबा और रखुमाई के दर्शन करें।

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Highlights

  • आज देवशयनी एकादशी के अवसर पर भक्तों ने पंढरपूर स्थित चंद्रभागा नदी में पवित्र डुबकी लगाई।
  • महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने की पंढरपूर में भगवान विट्ठल और देवी रुक्मिणी की शासकीय महापूजा।
  • गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत भी सांखळी के श्री विट्ठल रखुमाई देवस्थान पहुंचे और भगवान का आशीर्वाद लिया।

आज देशभर में आषाढ़ी एकादशी या देवशयनी एकादशी का पर्व बहुत ही श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। आज ही के दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा में चले जाते हैं और आज से ही 'चातुर्मास' का भी आरंभ होता है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर सभी को शुभकामनाएं देते हुए लिखा, "आषाढ़ी एकादशी के शुभ अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएँ। यह पावन दिन भक्ति, करुणा और सामाजिक सद्भाव का शाश्वत संदेश देता है। भगवान विट्ठल का आशीर्वाद हम सभी के जीवन में खुशहाली, सद्भाव और समृद्धि लाए। मैं भगवान विट्ठल के चरणों में प्रार्थना करता हूँ कि समाज के हर व्यक्ति के कल्याण और सम्मान के लिए निरंतर काम करने का हमारा संकल्प और भी मजबूत हो।"

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उनकी पत्नी अमृता फडणवीस ने आज पंढरपूर के विट्ठल-रुक्मिणी मंदिर में विठोबा और रखुमाई का आशीर्वाद प्राप्त किया। X पर इसकी तस्वीर शेयर करते हुए उन्होंने लिखा, "देवशयनी आषाढ़ी एकादशी के शुभ अवसर पर, मुझे पंढरपुर में भगवान विट्ठल और देवी रुक्मिणी के पवित्र चरणों में अपनी पत्नी के साथ शासकीय 'महापूजा' करने का सौभाग्य मिला।"

उन्होंने आगे लिखा, "भगवान विट्ठल और देवी रुक्मिणी के पवित्र दर्शन पाकर मेरा मन गहरी संतुष्टि से भर गया। मैंने राज्य के किसानों, श्रमिक वर्ग, महिलाओं, युवाओं और महाराष्ट्र के हर नागरिक की खुशी, समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना की। मैंने भगवान विट्ठल के चरणों में यह भी प्रार्थना की कि हमारे किसानों की मेहनत सफल हो और महाराष्ट्र निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता रहे।" मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आज पंढरपूर में 'श्री ज्ञानेश्वर महाराज संस्थान समिति, आळंदी देवाची' द्वारा संचालित भक्त निवास का भूमिपूजन भी किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री जयकुमार गोरे और कुछ अन्य लोग भी उपस्थित थे।

गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत भी आज सांखळी (सांकेलीम) के श्री विट्ठल रखुमाई देवस्थान पहुंचे और भगवान का आशीर्वाद लिया। ये मंदिर प्रति पंढरपूर के नाम से भी विख्यात है। उन्होंने भी सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, "आषाढ़ी एकादशी के पावन अवसर पर श्री विट्ठल-रखुमाई देवस्थान में पूजा-अर्चना की। भक्तों को शुभकामनाएं दीं और गोवा के लोगों की शांति, समृद्धि और खुशहाली के लिए प्रार्थना की।"

आज देवशयनी एकादशी के अवसर पर बड़ी संख्या में भक्तों ने पंढरपूर स्थित चंद्रभागा नदी में पवित्र डुबकी लगाई। लाखों वारकरी आज चंद्रभागा नदी के तट पर एकत्र हुए, ताकि वार्षिक पंढरपूर वारी तीर्थयात्रा का समापन किया जा सके। वारी में संतों, खास तौर पर ज्ञानेश्वर और तुकाराम की पादुकाओं को पालकी में रखकर उनके मंदिरों से पंढरपूर तक ले जाया जाता है। कई तीर्थयात्री पैदल ही इस जुलूस में शामिल होते हैं। 'वारकरी' का अर्थ है वारी करने वाला। बताया जाता है कि यह परंपरा 700 से 800 साल से भी अधिक पुरानी है।

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