दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री से डॉ. जयशंकर की मुलाकात, तकनीक और स्वच्छ ऊर्जा में सहयोग पर चर्चा

दक्षिण कोरिया से पूर्व, डॉ. जयशंकर 22 और 23 जून को मंगोलिया की यात्रा पर थे। इस दौरान वो मंगोलियाई नेतृत्व से मिले और अपनी समकक्ष विदेश मंत्री बी. बटसेत्सेग के साथ बातचीत की।

दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री से डॉ. जयशंकर की मुलाकात, तकनीक और स्वच्छ ऊर्जा में सहयोग पर चर्चा

दक्षिण कोरिया के सियोल में दोनों विदेश मंत्रियों की मुलाकात हुई।

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Highlights

  • चो ह्यून और डॉ. जयशंकर के बीच स्टार्टअप और फिनटेक में मौजूद अवसरों पर भी बातचीत हुई।
  • डॉ. जयशंकर के अनुसार दुनिया में उन देशों को साथ मिलकर काम करने की जरूरत है जिनके बीच आपसी भरोसा हो।
  • दोनों लीडर्स ने अपने-अपने क्षेत्रों और दुनिया भर में हो रहे घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर 24 और 25 जून को दक्षिण कोरिया (ROK) के दो-दिवसीय दौरे पर हैं। आज उन्होंने ROK के विदेश मंत्री चो ह्यून से भी मुलाकात की। सोशल मीडिया पर इसकी कुछ तस्वीरें साझा करते हुए उन्होंने लिखा, "आज सियोल में ROK के विदेश मंत्री चो ह्यून से मिलकर खुशी हुई। हमारी बातचीत राष्ट्रपति जे म्युंग ली की हालिया भारत यात्रा के नतीजों पर आधारित थी।

जयशंकर ने आगे लिखा, "हमने राजनीति, शिपबिल्डिंग, व्यापार, निवेश, रक्षा, टेक्नोलॉजी, स्वच्छ ऊर्जा, संस्कृति और लोगों के बीच आपसी संपर्क (P2P) जैसे क्षेत्रों में अपने सहयोग की समीक्षा की। साथ ही, स्टार्टअप, फिनटेक और मल्टीलेटरल मंचों पर मौजूद मौकों पर भी चर्चा की। हमने अपने-अपने क्षेत्रों और दुनिया भर में हो रहे घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।"

ROK के विदेश मंत्री के साथ बैठक के दौरान डॉ. जयशंकर ने कहा कि, "सियोल वापस आकर और आज आपसे तथा आपकी टीम से बातचीत करके मुझे बहुत खुशी हो रही है। मैं आपसे सहमत हूँ कि हमारी यह बैठक बहुत सही समय पर हो रही है सही समय पर इसलिए भी क्योंकि हम हाल ही में हुए राष्ट्रपति के दौरे के सिलसिले को आगे बढ़ा रहे हैं और इसलिए भी क्योंकि दुनिया के मौजूदा हालात और इस थोड़ी जटिल दुनिया में हमारे रिश्तों की अहमियत को देखते हुए यह बैठक बहुत जरूरी है।"

उन्होंने आगे कहा, "जब से आपने मंत्री का पद संभाला है, हम न्यूयॉर्क, कुआलालंपुर और वॉशिंगटन में G7 विदेश मंत्रियों की बैठक में और हाल ही में राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान भी मिले हैं। लेकिन मैं उन्हें वही बात कहता हूँ जो आप कहते हैं कि हाँ, हम हाल ही में मिले हैं, लेकिन मैं आपको लंबे समय से जानता हूँ। इसलिए आज मुझे लगता है कि विदेश मंत्रियों के तौर पर इस रिश्ते को आगे बढ़ाना हमारी जिम्मेदारी है।

डॉ. जयंशकर ने कहा, "हमें यह देखना है कि सरकार और हमारी अर्थव्यवस्था के अलग-अलग हिस्से आपस में कैसे काम करते हैं और एक-दूसरे के साथ कैसे जुड़ते हैं। इस तालमेल को बिठाने में, और मैं कहूँगा कि एक मुश्किल दुनिया में भविष्य की ओर देखने वाले और आज के दौर के हिसाब से बेहतर रिश्ते बनाने में हमारी भूमिका है। मुझे लगता है कि ऐसी दुनिया में खास तौर पर उन देशों को एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करने की जरूरत है जिनकी सोच एक जैसी हो, जिनकी मान्यताएँ समान हों और जिनके बीच आपसी भरोसा हो।"

विदेश मंत्री ने कहा कि, "जैसा कि आपने कहा, राष्ट्रपति का दौरा और इवियन में G7 के दौरान हमारे प्रधानमंत्री और आपके राष्ट्रपति की मुलाकात, ये हाल के ऐसे मौके थे जब हमें रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए निर्देश मिले। मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूँ कि हमारी तरफ से पूरी प्रतिबद्धता है कि हम अपने संबंधों की उस क्षमता को पूरी तरह से साकार करने के लिए काम करेंगे, जिसे हम दोनों मानते हैं कि अभी हासिल किया जाना बाकी है।" दक्षिण कोरिया से पूर्व, डॉ. जयशंकर 22 और 23 जून को मंगोलिया की यात्रा पर थे। इस दौरान वो मंगोलियाई नेतृत्व से मिले और अपनी समकक्ष विदेश मंत्री बी. बटसेत्सेग के साथ बातचीत की।

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