उत्तर प्रदेश से एक बड़ी हैरान करने वाली खबर सामने आई है। कल लखनऊ में जिस इमारत में आग लगने से कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई, 2016 में उसे गिराने का आदेश दे दिया गया था। हालांकि सिर्फ 2 महीनों के बाद उसे वापस भी ले लिया गया था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अलीगंज स्कीम एरिया के सेक्टर D में मौजूद यह बिल्डिंग पहले रिहायशी योजना के तहत आवंटित की गई थी। जुलाई 1980 को लॉटरी सिस्टम के जरिए इसे रामेश्वर सहाय के बेटे विजय कुमार को हायर-परचेज स्कीम में दिया गया था। नवंबर 1980 को एग्रीमेंट के बाद उन्हें इसका कब्जा सौंप दिया गया। साल 2005 में यह संपत्ति विजय कुमार और उनकी पत्नी उषा के नाम रजिस्टर्ड हुई।
इसके बाद जनवरी 2013 को उन्होंने इसे वीरेंद्र प्रताप शुक्ला और सुरेंद्र प्रताप शुक्ला को बेच दिया। लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी (LDA) ने अगस्त 2014 को दोनों के नाम म्यूटेशन की प्रक्रिया पूरी की। 1,992 वर्ग फीट क्षेत्रफल वाली इस रिहायशी बिल्डिंग के नक्शे को अगस्त 2014 को सेल्फ-सर्टिफिकेशन बिल्डिंग प्लान स्कीम के तहत मंजूरी मिली थी। लेकिन बाद में जांच में यहां अवैध निर्माण पाए जाने के बाद LDA ने कार्रवाई शुरू की। जांच के बाद मई 2016 को अवैध निर्माण हटाने यानी बिल्डिंग गिराने का आदेश जारी किया गया था। हालांकि, सिर्फ दो महीने बाद जुलाई 2016 को यह आदेश रद्द कर दिया गया। अब इस पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि उस समय इस आदेश को रद्द क्यों किया गया था।
बता दें कि 22 जून को लखनऊ के अलीगंज इलाके में एक कोचिंग सेंटर में आग लग गई थी। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी थी। खबरों के मुताबिक, तीन-चार छात्रों ने अपनी जान बचाने के लिए खुद को वॉशरूम में बंद कर लिया, जबकि बाकी छात्र बचने के लिए बाहर कूदे और घायल हो गए। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने इस घटना पर दुख जताया है। PMO ने अपने X अकाउंट पर कहा, "उत्तर प्रदेश के लखनऊ में आग लगने की घटना में हुई मौतों से बहुत दुख हुआ है। पीड़ित परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं। घायल जल्द ठीक हों।"
उन्होंने आगे लिखा, "मृतकों के परिजनों को PMNRF से 2 लाख रूपए की सहायता राशि दी जाएगी। घायलों को 50 हजार रूपए दिए जाएंगे।" इस घटना के बाद, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत कार्रवाई करते हुए चार लोगों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। इन लोगों की पहचान कमलेन्द्र कुमार सिंह, अनिल कुमार, गौरव कुमार और प्रमोद पांडे के तौर पर हुई है। फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) और स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की एक संयुक्त टीम भी घटना स्थल की जांच कर रही है। LDA द्वारा इस इमारत को गिराने का नोटिस भी जारी कर दिया गया है।