पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक और बड़ा उलटफेर हुआ है। विधानसभा में LoP ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को तृणमूल कांग्रेस (TMC) की चेयरपर्सन के पद से हटा दिया है। इतना ही नहीं, TMC में दूसरे नंबर के नेता माने जाने वाले अभिषेक बनर्जी को भी पार्टी से सस्पेंड कर दिया गया है। इसकी घोषणा करते हुए ऋतब्रत ने बताया कि कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस का एक विशेष सत्र आयोजित किया गया था। इस सत्र के दौरान, प्रतिनिधियों के सर्वसम्मत चुनाव के माध्यम से तृणमूल कांग्रेस समिति और राष्ट्रीय कार्य समिति (NWC) का गठन किया गया। अरूप रॉय को तृणमूल कांग्रेस का चेयरपर्सन चुना गया है।
अरूप रॉय के अलावा 29 अन्य लोगों को शामिल करके 30 सदस्यीय NWC का गठन किया गया है। सदस्यों में फिरहाद हाकिम, अरूप बिस्वास, रथिन घोष, सबीना यास्मीन, ऋतब्रत बनर्जी, जावेद खान, संदीपन साहा और अन्य शामिल हैं। उपाध्यक्ष फिरहाद हाकिम, अरूप बिस्वास, रथिन घोष और सबीना यास्मीन हैं। उन्होंने आगे कहा कि वे जिला अध्यक्षों की नियुक्ति भी करेंगे और जिला समितियों का गठन करेंगे।
ऋतब्रत ने आगे कहा कि, "हमने TMC में ममता बनर्जी की भूमिका को लेकर बार-बार अपना रूख साफ किया है। हम चाहते हैं कि 'दीदी' एक मेंटर की भूमिका निभाएं और हमारा मार्गदर्शन करें।" उन्होंने बताया कि सवाल असली या नकली होने का नहीं है, हम TMC हैं और इस विशेष सत्र की कार्यवाही के बारे में चुनाव आयोग (ECI) को भी सूचित किया जाएगा।
बता दें कि अरूप रॉय 2011 से हावड़ा मध्य के विधायक हैं। उन्होंने ममता बनर्जी की कैबिनेट में मंत्री के रूप में भी काम किया, जहाँ वे सहकारिता विभाग संभालते थे। 2026 के विधानसभा चुनावों में, TMC 294 में से सिर्फ 80 सीटों पर आ गई। ऋतब्रत के गुट ने लगातार 65 विधायकों के समर्थन का दावा किया है, जिससे ममता के पास सिर्फ 15 विधायक रह गए हैं। दूसरी ओर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले धड़े ने भी अपनी NWC का पुनर्गठन करके ECI को सूचित कर दिया है। सौंपी गई सूची में ममता बनर्जी को तृणमूल कांग्रेस की चेयरपर्सन बताया गया है।
इस सूची में सुब्रत बक्शी को उपाध्यक्ष, अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा में TMC के नेता, डेरेक ओ'ब्रायन को संयुक्त सचिव और राज्यसभा में पार्टी के नेता, डोला सेन को भी संयुक्त सचिव और सुभाशीष चक्रवर्ती को कोषाध्यक्ष बताया गया है। NWC के अन्य नेताओं में चंद्रिमा भट्टाचार्य सदस्य एवं पश्चिम बंगाल प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर और अमित मित्रा, राजेश पति त्रिपाठी, असीमा पात्रा, मोलॉय घटक तथा गौतम देव सिर्फ सदस्य के तौर पर शामिल हैं।
इस घटनाक्रम पर राज्य सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने टिप्पणी करते हुए कहा, "ममता बनर्जी को चेयरपर्सन किसने बनाया? उन्हें हटाने की मांग किसने की? यह ड्रामा अभी भी चल रहा है। TMC एक 'ड्रामा पार्टी' है। मैं इसे 'सर्कस पार्टी' कहता था। बंगाल के लोगों या हमारे लिए इसका कोई महत्व नहीं है।"
राज्य के पूर्व अध्यक्ष राहुल सिन्हा ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "ममता बनर्जी अभी TMC के सबसे छोटे गुट की नेता हैं। इसलिए, मैंने उनसे पहले ही कहा था कि वे सीधे TMC के खत्म होने की घोषणा कर दें। लेकिन उन्होंने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। अभी भी समय है, वरना उन्हें भी TMC से सस्पेंड कर दिया जाएगा। उनकी कोई इज्जत नहीं बचेगी। इसलिए, उन्हें राजनीति छोड़ देनी चाहिए। वे बूढ़ी हो गई हैं, उन्हें अब घर पर आराम करना चाहिए। राजनीति और TMC में अब उनका कोई महत्व नहीं है।"