पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मिले TMC के बागी विधायक, कहा हम ही असली तृणमूल है

ऋतब्रत बनर्जी की मुख्य निर्वाचन अधिकारी के साथ बैठक पर टिप्पणी करते हुए, ममता गुट के सांसद सौगत रॉय ने कहा कि हालाँकि बनर्जी को ऐसे कदम उठाने का अधिकार है, लेकिन अगर प्रक्रिया कानून के अनुसार नहीं है तो ऐसे लोगों को मान्यता नहीं मिलनी चाहिए। कारण यह है कि TMC एक ही है और ममता बनर्जी इसकी अध्यक्ष हैं। संख्या मायने रखती है, लेकिन वह निर्णायक नहीं है।

पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मिले TMC के बागी विधायक, कहा हम ही असली तृणमूल है

TMC के दोनों गुट, पार्टी के नेतृत्व और उसकी वैधता को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे है।

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Highlights

  • बागी गुट के पांच प्रमुख विधायकों ने CEO से मुलाकात की व उन्हें पार्टी की नई कार्य समिति से जुड़े दस्तावेज सौंपे।
  • इन घटनाक्रमों पर अग्निमित्रा पॉल ने कहा की हमें समझ नहीं आ रहा है की असली TMC कौन सी है।
  • दिलीप घोष ने भी टिप्पणी करते हुए कहा की TMC जितनी जल्दी खत्म हो जाए, उतना अच्छा है।

विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद, तृणमूल कांग्रेस (TMC) कई तरह की समस्याओं से जूझ रही है। यह संकट अब चुनाव आयोग तक भी पहुँच गया है, जहाँ विरोधी गुट पार्टी के नेतृत्व और उसकी वैधता को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। बागी गुट के पाँच प्रमुख विधायक और राष्ट्रीय कार्य समिति के सदस्य, ऋतब्रत बनर्जी, अरूप रॉय, संदीपन साहा, जावेद खान और अखरूज्जमान ने पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) से मुलाकात की और पार्टी की नई कार्य समिति से जुड़े दस्तावेज सौंपे। बाद में मीडिया से बात करते हुए ऋतब्रत ने कहा, "यह एक सामान्य प्रक्रिया है। जब भी कोई विशेष सत्र होता है, तो चुनाव आयोग और राज्य निकाय को सूचित करना जरूरी होता है। हमने बस वही किया जो जरूरी था।"

उन्होंने आगे कहा, "हम ही तृणमूल कांग्रेस हैं। इसलिए, पार्टी के चुनाव चिह्न पर दावा करने का सवाल ही नहीं उठता। पश्चिम बंगाल में चुने गए ज्यादातर विधायक हमारे साथ हैं।" ऋतब्रत बनर्जी की मुख्य निर्वाचन अधिकारी के साथ बैठक पर टिप्पणी करते हुए, ममता गुट के सांसद सौगत रॉय ने कहा कि हालाँकि बनर्जी को ऐसे कदम उठाने का अधिकार है, लेकिन अगर प्रक्रिया कानून के अनुसार नहीं है तो ऐसे लोगों को मान्यता नहीं मिलनी चाहिए। कारण यह है कि TMC एक ही है और ममता बनर्जी इसकी अध्यक्ष हैं। संख्या मायने रखती है, लेकिन वह निर्णायक नहीं है।

इन घटनाक्रमों पर टिप्पणी करते हुए, पश्चिम बंगाल की शहरी विकास और नगरपालिका मामलों की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा, "हमें यह भी समझ नहीं आ रहा है कि असली TMC कौन सी है। कुछ लोग विरोध कर रहे हैं, जबकि कुछ हमारा समर्थन कर रहे हैं। अभी एक महीना भी नहीं बीता होगा और जिस पार्टी में इतना अहंकार और घमंड था कि उन्होंने बंगाल के लोगों के लिए बहुत काम किया है, वह पूरी तरह खत्म हो गई है।" पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष ने भी कहा कि यह TMC का अंदरूनी मामला है। चुनाव आयोग तय करेगा कि नेता कौन होगा, कितने हिस्से होंगे और पार्टी का नाम क्या होगा। हमारी विधानसभा में भी इस पर चर्चा हो रही है। जनता को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि यह पार्टी जितनी जल्दी खत्म हो जाए, उतना ही अच्छा है।

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