इकोनॉमिक सर्वे 2026: भारत की अर्थव्यवस्था 6.8 से 7.2% की दर से बढ़ने की उम्मीद

सर्वे में कहा गया कि वैश्विक स्तर पर चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था की बुनियाद पहले से मज़बूत होती जा रही है।

इकोनॉमिक सर्वे 2026: भारत की अर्थव्यवस्था 6.8 से 7.2% की दर से बढ़ने की उम्मीद

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा आज इकोनॉमिक सर्वे 2026 पेश किया गया है।

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Highlights

  • सर्वे के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था 6.8 से 7.2% की दर से बढ़ सकती है।
  • देश में इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभा रहा है।
  • खाद्य कीमतों के कारण महंगाई में उतार-चढ़ाव दिखता है, लेकिन कोर इन्फ्लेशन अब भी काबू में है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा आज इकोनॉमिक सर्वे 2026 पेश किया गया है। इसे 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट 2026-27 से पहले सबके सामने लाया गया है। इसका उद्देश्य मौजूदा आर्थिक स्थिति को बताना, पिछले साल का प्रदर्शन और आने वाले वित्तीय वर्ष की संभावनाओं को सबके सामने रखना है। इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था 6.8 से 7.2% की दर से बढ़ सकती है। सर्वे में कहा गया कि वैश्विक स्तर पर चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था की बुनियाद पहले से मज़बूत होती जा रही है।

सर्वे के मुताबिक, देश में इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभा रहा है। पिछले एक दशक में देश में एयरपोर्ट्स की संख्या में वृद्धि हुई है, जिससे देश के अलग-अलग हिस्सों में कनेक्टिविटी बढ़ी है। इसके अलावा इनलैंड वाटरवेज़ के ज़रिए माल ढुलाई में भी बढ़ोतरी हुई है इससे परिवहन लागत कम हुई है और लॉजिस्टिक्स सिस्टम ज़्यादा कुशल बना है। सर्वे में बताया गया है कि खाद्य कीमतों के कारण महंगाई में उतार-चढ़ाव दिखता है, लेकिन कोर इन्फ्लेशन अब भी काबू में है।

कम कोर इन्फ्लेशन का मतलब है कि उत्पादन क्षमता, सप्लाई चैन और लॉजिस्टिक्स पहले से बेहतर हो रहे हैं, जिससे आगे चलकर कीमतों पर दबाव कम रहने की उम्मीद है। इकोनॉमिक सर्वे में राज्यों द्वारा किए गए सुधारों की भी सराहना की गई है। कई राज्यों में नियमों को सरल बनाया गया है, जिससे Small & Medium Enterprises (SMEs) के लिए काम करना आसान हुआ। इन सुधारों से छोटे कारोबार फॉर्मल इकोनॉमी से जुड़ रहे है, जिससे रोज़गार बढ़ रहा है और प्रोडक्टिविटी में भी सुधार हो रहा है। सर्वे के मुताबिक, केंद्र सरकार की इस नीति ने विकास और फिस्कल डिसिप्लिन के बीच संतुलन साधा है। आर्थिक सर्वेक्षण में माना गया है कि मौजूदा जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण वैश्विक व्यापार और निवेश पर असर पड़ सकता है। उनके अनुसार भारत सही दिशा में आगे बढ़ रही है और विकसित होने की दिशा में मज़बूती से कदम बढ़ा रहा है

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